Bangladesh US Trade: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बांग्लादेश का बड़ा कदम, ‘यूएस ट्रेड डील’ की होगी समीक्षा

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप की टैरिफ शक्तियों को सीमित करने के फैसले ने बांग्लादेश को संजीवनी दे दी है। ढाका ने प्रस्तावित यूएस-ट्रेड डील की समीक्षा का आदेश देकर स्पष्ट कर दिया है कि वह अब शर्तों पर बात करेगा। क्या इस फैसले से बांग्लादेश के गारमेंट सेक्टर को मिलेगा बड़ा बूस्ट?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 21, 2026

Bangladesh US Trade: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को ‘गैर-कानूनी’ करार दिए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में बड़ी हलचल शुरू हो गई है। इस ऐतिहासिक फैसले के तुरंत बाद बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार ने शनिवार, 21 फरवरी 2026 को घोषणा की है कि वह अमेरिका के साथ हुए अपने हालिया व्यापार समझौते (Trade Agreement) की गहन समीक्षा करेगी। बांग्लादेश उन चुनिंदा देशों में शामिल था, जिन्होंने ट्रंप प्रशासन के दबाव और भारी टैरिफ से बचने के लिए समझौता किया था। अब कोर्ट के आदेश के बाद ढाका को लगता है कि पुराने नियमों की प्रासंगिकता खत्म हो गई है और वह अपने हितों की रक्षा के लिए नए सिरे से रणनीति तैयार करेगा।

वाणिज्य मंत्रालय का रुख: ‘एग्जिट क्लाउज’ का इस्तेमाल कर सकता है बांग्लादेश

बांग्लादेश के वाणिज्य मंत्रालय के डब्ल्यूटीओ (WTO) विंग की सचिव खदीजा नाजनीन ने स्पष्ट किया कि सरकार अब अमेरिका के साथ हुए व्यापार सौदे का नए सिरे से विश्लेषण करेगी। उन्होंने ‘द डेली स्टार’ को दिए इंटरव्यू में एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि बांग्लादेश-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट में एक विशेष ‘एग्जिट क्लाउज’ (Exit Clause) शामिल है। यह शर्त दोनों देशों को निर्धारित नियमों के तहत समझौता खत्म करने की शक्ति देती है। नाजनीन ने चौंकाने वाला दावा किया कि यह विशेष क्लाउज केवल बांग्लादेश के समझौते में है, जबकि अमेरिका ने अन्य देशों के साथ ऐसी शर्त नहीं रखी है। इसी आधार पर अब सरकारी नीति के अनुसार अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल में हुआ था समझौता: आलोचनाओं के घेरे में थी डील

उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान 9 फरवरी 2026 को अमेरिका के साथ इस व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस डील के तहत पारस्परिक टैरिफ को 20 फीसदी से घटाकर 19 फीसदी किया गया था। हालांकि, बांग्लादेश के भीतर इस समझौते की काफी आलोचना हुई थी। विशेषज्ञों ने इसे ‘एकतरफा’ करार देते हुए कहा था कि बांग्लादेश ने केवल अमेरिकी बाजार तक अपनी पहुंच बनाए रखने के लिए ट्रंप प्रशासन की शर्तों के आगे घुटने टेक दिए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने बांग्लादेश सरकार को इस विवादास्पद समझौते से बाहर निकलने का एक कानूनी मौका दे दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर: क्या रद्द हो जाएगा पूरा समझौता?

वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि चूंकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ लगाने के आधार को ही अवैध घोषित कर दिया है, इसलिए उन टैरिफ पर आधारित द्विपक्षीय समझौते स्वतः ही अपनी वैधता खो चुके हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “यूएस सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मतलब है कि अमेरिका का पहले वाला फैसला अब बांग्लादेश पर लागू नहीं होगा। समझौते को रद्द किए जाने की प्रबल संभावना है क्योंकि पूरा कानूनी आधार ही धराशायी हो गया है।” सरकार जल्द ही इस विषय पर एक उच्च स्तरीय बैठक करने वाली है जिसमें समझौते को समाप्त करने की औपचारिकताओं पर चर्चा होगी।

ट्रंप के टैरिफ का इतिहास: बांग्लादेश पर लगा था 37 फीसदी शुल्क

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल 2025 को राष्ट्रीय आपातकाल का उपयोग करते हुए ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ की घोषणा की थी। शुरुआत में बांग्लादेश से आने वाले सामानों पर 37 फीसदी का भारी टैरिफ थोपा गया था। बाद में इसे घटाकर 35 फीसदी किया गया और लंबी बातचीत के बाद इसे 20 फीसदी तक लाया गया। अंततः 9 फरवरी के समझौते के बाद इसे 19 फीसदी करने पर सहमति बनी थी। अमेरिका बांग्लादेश के एक्सपोर्ट के लिए सबसे बड़ा बाजार है, इसलिए ढाका के लिए टैरिफ में एक-एक फीसदी की कमी भी मायने रखती थी, लेकिन अब कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया को ही असंवैधानिक बता दिया है।

ट्रंप की नई घोषणा: 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ का नया संकट

सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद उन्होंने एक नए कानून के तहत 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है। ट्रंप का यह नया कदम फिर से वैश्विक व्यापार युद्ध को हवा दे सकता है। बांग्लादेश के लिए अब चुनौती यह है कि वह पुराने अवैध करार से बाहर निकले और ट्रंप के इस नए 10 फीसदी टैरिफ का मुकाबला करने के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को तैयार करे। आने वाले दिन ढाका और वाशिंगटन के कूटनीतिक संबंधों के लिए परीक्षा की घड़ी साबित होंगे।

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