Bangladesh Hindu Attack: बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़ते हमले, नरसिंगदी और जेसोर में दो हिंदू व्यापारियों की नृशंस हत्या

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बर्बरता की सारी हदें पार! नरसिंगदी में दुकानदार मोनी चक्रवर्ती और जेसोर में अखबार संपादक राणा प्रताप बैरागी की नृशंस हत्या ने पूरे देश में दहशत फैला दी है। क्या यह सुनियोजित नरसंहार है? पिछले 45 दिनों में 15 हिंदुओं की मौत के बाद क्या कर रही है यूनुस सरकार?

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Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 16, 2026

Bangladesh Hindu Attack: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय और व्यावसायिक वर्ग को निशाना बनाने वाली हिंसा की आग बुझने का नाम नहीं ले रही है। ताजा और रूह कंपा देने वाली घटना नरसिंगदी जिले से सामने आई है, जहाँ सोमवार रात करीब 11 बजे एक किराना दुकानदार, मोनी चक्रवर्ती की चाकू गोदकर हत्या कर दी गई। जानकारी के अनुसार, मोनी अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे, तभी घात लगाए अज्ञात हमलावरों ने उन पर धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि मोनी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। पलाश थाना प्रभारी शाहिद अल मामून ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि हत्या में पेशेवर हथियारों का प्रयोग किया गया है और पुलिस हमलावरों की तलाश में जुटी है।

एक ही दिन में दो हत्याएं: दहशत में हिंदू समुदाय

हैरानी और दुख की बात यह है कि जिस दिन नरसिंगदी में मोनी चक्रवर्ती को मारा गया, उसी शाम जेसोर जिले में एक और प्रमुख हिंदू व्यवसायी की हत्या कर दी गई। 38 वर्षीय राणा प्रताप बैरागी, जो एक फैक्ट्री के मालिक और अखबार के संपादक थे, को हमलावरों ने सिर में गोली मार दी। महज कुछ ही घंटों के अंतराल पर दो अलग-अलग जिलों में हुई इन वारदातों ने बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों के बीच भारी खौफ पैदा कर दिया है। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ाने का दावा तो किया है, लेकिन अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी न होने से जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।

हिंदू युवाओं को चुन-चुनकर निशाना बनाने का खौफनाक ट्रेंड

बांग्लादेश में दिसंबर महीने से शुरू हुआ हिंसा का यह दौर अब बेहद खतरनाक मोड़ ले चुका है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले कुछ हफ्तों में कई निर्दोष हिंदुओं की जान जा चुकी है। 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी, जबकि 24 दिसंबर को अमृत मंडल नाम के युवक को मौत के घाट उतार दिया गया। इसी साल 11 जनवरी को चटगांव में ऑटो ड्राइवर समीर दास की चाकू मारकर हत्या कर दी गई और उनका वाहन लूट लिया गया। ये घटनाएं साबित करती हैं कि यह केवल छिटपुट अपराध नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश के तहत हिंदू समुदाय को डराने की कोशिश है।

असुरक्षा का माहौल और अंतरराष्ट्रीय चिंता

हालिया हमलों ने बांग्लादेश के सामाजिक और व्यापारिक ढांचे को बुरी तरह प्रभावित किया है। हिंदू व्यापारियों का कहना है कि वे अब अपने प्रतिष्ठान खोलने या सड़क पर चलने में भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। पुलिस की सुस्त जांच और कट्टरपंथियों को मिल रहे कथित मौन समर्थन ने अपराधियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं। मानवाधिकार संगठनों ने भी इन घटनाओं पर चिंता जताई है और बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कानून लागू करने की मांग की है।

न्याय की मांग और प्रशासन की विफलता

स्थानीय हिंदू नेताओं का आरोप है कि प्रशासन केवल जांच का आश्वासन देता है, लेकिन जमीनी स्तर पर दोषियों को सजा नहीं मिल रही है। कट्टरपंथी ताकतों द्वारा फैलाई जा रही नफरत ने आम नागरिक के मन में दरार पैदा कर दी है। अब समय आ गया है कि बांग्लादेशी हुकूमत इन नृशंस हत्याओं के पीछे छिपी साजिश का पर्दाफाश करे और अल्पसंख्यकों को उनके अपने ही देश में सुरक्षित होने का अहसास दिलाए। यदि स्थिति पर तुरंत काबू नहीं पाया गया, तो यह न केवल आंतरिक सुरक्षा बल्कि पड़ोसी देशों के साथ कूटनीतिक संबंधों के लिए भी चुनौती बन सकता है।

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