Sheikh Hasina Allegations: बांग्लादेश चुनाव विवाद, शेख हसीना ने अंतरिम सरकार को बताया ‘देशद्रोही’, अवामी लीग पर पाबंदी को दी चुनौती

फरवरी 2026 के चुनावों से पहले शेख हसीना ने अंतरिम सरकार को 'गैर-कानूनी' करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी अवामी लीग को रोकना लोकतंत्र की हत्या है। क्या हसीना के इन गंभीर आरोपों से बांग्लादेश में फिर से विद्रोह भड़केगा या यूनुस सरकार इन चुनौतियों को पार कर पाएगी?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 29, 2026

Sheikh Hasina Allegations: बांग्लादेश में आगामी आम चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव में भाग लेने से रोक दिया है। इस फैसले ने देश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया की समावेशिता पर सवाल खड़े करता है।

शेख हसीना का अंतरिम सरकार पर तीखा हमला

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अवामी लीग को बाहर कर लाखों नागरिकों के मताधिकार को छीन लिया गया है। हसीना के अनुसार, यह निर्णय लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है और इससे देश में असंतोष बढ़ना तय है।

अस्थिरता की चेतावनी और समावेशी चुनावों की मांग

शेख हसीना ने एसोसिएटेड प्रेस को भेजे एक ईमेल में चेतावनी दी कि यदि बांग्लादेश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव नहीं हुए तो देश लंबे समय तक राजनीतिक अस्थिरता झेलेगा। उन्होंने कहा कि किसी बड़ी आबादी को राजनीतिक प्रक्रिया से बाहर रखना संस्थानों की वैधता को कमजोर करता है और भविष्य में गंभीर संकट पैदा कर सकता है।बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव प्रस्तावित हैं, जिनमें 127 मिलियन से अधिक मतदाता वोट डालने के पात्र होंगे। यह चुनाव 2024 के बड़े जनविद्रोह के बाद पहला राष्ट्रीय चुनाव है, जिसमें शेख हसीना को सत्ता से हटना पड़ा था। इस दौरान मतदाता संवैधानिक सुधारों से जुड़े जनमत संग्रह में भी अपनी राय देंगे।

मोहम्मद यूनुस की वापसी और अंतरिम सरकार की भूमिका

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस अगस्त 2024 में बांग्लादेश लौटे थे और शेख हसीना के भारत जाने के कुछ दिन बाद उन्होंने सत्ता संभाली। यूनुस ने निष्पक्ष चुनाव कराने का वादा किया है, लेकिन अवामी लीग पर प्रतिबंध के बाद उनकी सरकार की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था और संवैधानिक बदलावों को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।यूनुस के कार्यालय ने दावा किया है कि सुरक्षा बल शांतिपूर्ण और व्यवस्थित चुनाव सुनिश्चित करेंगे। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों और मानवाधिकार संगठनों को चुनाव प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए आमंत्रित किया गया है। चुनाव आयोग के अनुसार, यूरोपीय संघ और कॉमनवेल्थ सहित करीब 500 विदेशी पर्यवेक्षक मतदान प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।

मानवाधिकार, अल्पसंख्यक और प्रेस स्वतंत्रता पर चिंता

शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में मानवाधिकार और सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। अल्पसंख्यक समूहों, खासकर हिंदू समुदाय पर हमलों और इस्लामी संगठनों के बढ़ते प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसके अलावा, पत्रकारों पर दर्ज मामलों और मीडिया संस्थानों पर हमलों से प्रेस स्वतंत्रता पर भी गंभीर बहस छिड़ गई है।इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) मुख्य दावेदार के रूप में उभरी है। तारिक रहमान के नेतृत्व में पार्टी देश में स्थिरता और विकास का वादा कर रही है। BNP के सामने जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला गठबंधन बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है, जिससे चुनावी मुकाबला और भी रोचक हो गया है।