Chinmoy Krishna Das bail : चिन्मय कृष्ण दास को एक केस में मिली जमानत, पर अभी जेल में ही कटेगी रातें

बांग्लादेश के चटगांव की एक अदालत ने हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को 2023 के एक पुराने मामले में जमानत दे दी है। हालांकि, वकील सैफुल इस्लाम की हत्या और देशद्रोह जैसे 6 अन्य गंभीर आरोपों के कारण वह फिलहाल जेल में ही रहेंगे। क्या यह जमानत उनकी पूरी रिहाई का रास्ता साफ कर पाएगी?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 17, 2026

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Chinmoy Krishna Das bail : सनातन जागरण जोत के प्रवक्ता और पुंडरिक धाम के पूर्व प्रिंसिपल चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी को लेकर एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। गुरुवार (16 अप्रैल, 2026) को चटगांव के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मोहम्मद शखावत हुसैन ने उन्हें एक पुराने मामले में जमानत दे दी है। हालांकि, इस जमानत के बावजूद हिंदू साधु की जेल से रिहाई संभव नहीं हो पाएगी। प्रशासन और कानूनी जानकारों के अनुसार, चिन्मय दास के खिलाफ अभी भी छह अन्य आपराधिक मामले लंबित हैं, जिसके कारण उन्हें सलाखों के पीछे ही रहना होगा। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान वे लंबे समय से हिरासत में हैं।

जमीन हड़पने और डराने-धमकाने का पुराना मामला

चिन्मय दास के वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने विस्तार से बताया कि जिस विशिष्ट मामले में उन्हें जमानत मिली है, वह 2023 में दर्ज किया गया था। यह मामला पूर्व मंत्री मीर मोहम्मद नासिर उद्दीन द्वारा दायर किया गया था। इसमें चिन्मय कृष्ण दास और पांच अन्य लोगों पर चटगांव के हाथज़ारी ज़िले के मेखल क्षेत्र में जमीन हड़पने, लोगों को डराने-धमकाने और मारपीट करने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसी मामले की सुनवाई करते हुए मजिस्ट्रेट ने उन्हें राहत प्रदान की है, लेकिन यह राहत उनकी पूर्ण स्वतंत्रता के लिए पर्याप्त नहीं है।

सनातन जागरण जोत का उदय और देशद्रोह का मुकदमा

बांग्लादेश के बदलते राजनीतिक परिदृश्य के बीच चिन्मय कृष्ण दास एक प्रमुख हिंदू चेहरे के रूप में उभरे। उन्होंने सनातन धर्म के अनुयायियों की सुरक्षा और उनके अधिकारों के लिए ‘सनातन जागरण जोत’ नामक संगठन बनाया और इसके प्रवक्ता बने। उनकी अगुवाई में चटगांव सहित देश के विभिन्न हिस्सों में विशाल रैलियां आयोजित की गईं। इसी सक्रियता के बीच, 31 अक्टूबर 2024 को उन पर संकट गहरा गया। चटगांव के कोतवली पुलिस स्टेशन में उनके और 19 अन्य लोगों के खिलाफ देशद्रोह (Sedition) का मामला दर्ज किया गया। यह केस बीएनपी (BNP) नेता फिरोज खान ने दर्ज कराया था, जिसके बाद उन्हें ढाका से गिरफ्तार कर चटगांव स्थानांतरित कर दिया गया था।

राष्ट्रीय ध्वज का अपमान और वकील सैफुल इस्लाम की हत्या

चिन्मय दास की गिरफ्तारी का मामला उस समय और अधिक हिंसक हो गया जब 26 नवंबर 2024 को उनकी जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान अदालत परिसर में झड़पें हुईं। उन पर राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का भी आरोप लगा। उस हिंसा के दौरान वकील सैफुल इस्लाम अलिफ की दुखद मृत्यु हो गई थी। इस हत्या के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। मृतक वकील के पिता जमाल उद्दीन ने चिन्मय दास सहित 31 लोगों को नामजद करते हुए हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट पहले ही अदालत में दाखिल कर दी है और वर्तमान में गवाही की प्रक्रिया चल रही है।

छह अन्य मामलों के कारण जेल में ही बीतेगी रात

अदालती दस्तावेजों के अनुसार, चिन्मय कृष्ण दास केवल हत्या और देशद्रोह के मामलों में ही नहीं, बल्कि पुलिस पर हमले, वकीलों को निशाना बनाने और कॉकटेल धमाके करने जैसे कई अन्य आरोपों का भी सामना कर रहे हैं। उनके खिलाफ कुल छह सक्रिय मुकदमे हैं जिनमें अभी तक जमानत नहीं मिल पाई है। वकील भट्टाचार्य ने पुष्टि की है कि जब तक इन सभी मामलों में कानूनी सुरक्षा या जमानत नहीं मिल जाती, तब तक उनका जेल से बाहर आना मुश्किल है। फिलहाल, हिंदू समुदाय और उनके समर्थक इस कानूनी लड़ाई पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

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