Bakrid 2026: कब मनाई जाएगी ईद-उल-अजहा? एक क्लिक में जानें सही तारीख

ईद के बाद मुसलमानों को ईद-उल-अजहा (बकरीद) का बेसब्री से इंतजार रहता है। यह त्योहार जिलहिज्जा की 10वीं तारीख को कुर्बानी के रूप में मनाया जाता है, जो त्याग और आस्था का प्रतीक है।

Bakrid 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 6, 2026

Bakrid 2026: बकरीद, जिसे ईद-उल-अजहा या बकरा ईद के नाम से भी जाना जाता है, इस्लाम धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। रमजान के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा पर्व माना जाता है, जिसका मुसलमानों को पूरे साल इंतजार रहता है। यह त्योहार कुर्बानी और त्याग की भावना को दर्शाता है।

Aaj Ka Rashifal: बुधवार को इन राशियों की चमकेगी किस्मत, पढ़ें पूरा राशिफल

बकरीद कब मनाई जाएगी?

इस्लामी कैलेंडर के अनुसार बकरीद जिलहिज्जा (Dhul Hijjah) महीने की 10वीं तारीख को मनाई जाती है। लेकिन इसकी सही तारीख चांद देखने के बाद ही तय की जाती है। इसी कारण हर साल इसकी तारीख में थोड़ा बदलाव देखने को मिलता है। जानकारों के अनुसार, वर्ष 2026 में बकरीद 27 या 28 मई को मनाए जाने की संभावना है। हालांकि अंतिम निर्णय चांद दिखाई देने के बाद ही घोषित किया जाएगा।

मौलाना समीरुद्दीन कासमी की राय

इस्लामिक विद्वान मौलाना समीरुद्दीन कासमी ने चांद देखने के आधार पर बकरीद की संभावित तारीख को लेकर जानकारी साझा की है। उनके अनुसार 17 मई 2026 को भारत में चांद की स्थिति कमजोर रहेगी, जिससे जुलहिज्जा महीने की शुरुआत उस दिन होने की संभावना कम है। उन्होंने बताया कि 18 मई को चांद की स्थिति काफी बेहतर होगी और भारत में जुलहिज्जा महीने की पहली तारीख 19 मई 2026 को मानी जा सकती है।

अलग-अलग देशों में अलग तारीख की संभावना

मौलाना के अनुसार, चांद देखने की स्थिति अलग-अलग देशों में अलग होने के कारण बकरीद की तारीख भी भिन्न हो सकती है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान में बकरीद 27 मई 2026 को मनाए जाने की संभावना है। वहीं भारत, बांग्लादेश, नेपाल और बर्मा में यह त्योहार 28 मई 2026 को मनाया जा सकता है। इस तरह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में ईद-उल-अजहा एक दिन के अंतर से मनाई जा सकती है।

बकरीद का महत्व और परंपरा

बकरीद को कुर्बानी का त्योहार कहा जाता है। इस दिन मुसलमान अल्लाह की राह में बकरे, भेड़ या अन्य हलाल जानवरों की कुर्बानी देते हैं। यह परंपरा पैगंबर इब्राहिम की आस्था और बलिदान की याद में निभाई जाती है। कुर्बानी के बाद मांस को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। एक हिस्सा रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए,
दूसरा हिस्सा गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए, तीसरा हिस्सा अपने परिवार के लिए रखते हैं।

2 अगस्त 2027: इस सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण? जानिए पूरी सच्चाई