Uttarakhand Tourism: उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने के साथ ही तीर्थयात्रा ने एक बार फिर गति पकड़ ली है। बारिश कम होने के बाद बदरीनाथ पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। मौजूदा समय में प्रतिदिन करीब चार से पांच हजार तीर्थ यात्री भगवान बदरी विशाल के दर्शन के लिए धाम पहुंच रहे हैं। यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन, पुलिस और बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने व्यवस्थाओं को भी सक्रिय कर दिया है।
बदरीनाथ धाम में अब तक 17 लाख 70 हजार से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। दूसरे चरण की यात्रा में तेजी आने के साथ मंदिर परिसर के अलावा आसपास के इलाकों में भी तीर्थ यात्रियों की आवाजाही बढ़ गई है। मंदिर मार्ग से लेकर तप्तकुंड तक श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड़ दिखाई दे रही है। इसके साथ ही ब्रह्मकपाल में पिंडदान और तर्पण के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
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बारिश कम होते ही बढ़ने लगी यात्रियों की संख्या

इस बार मानसून के दौरान भी बदरीनाथ धाम की यात्रा पूरी तरह थमी नहीं। खराब मौसम और बारिश के बीच भी श्रद्धालु लगातार धाम पहुंचते रहे। अब मौसम में सुधार आने और बारिश की गति कम होने के बाद यात्रा में और तेजी देखी जा रही है।
यात्रियों की वर्तमान रफ्तार को देखते हुए इस वर्ष बदरीनाथ धाम में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या नया रिकॉर्ड बना सकती है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ के मुताबिक धाम में यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं को लगातार दुरुस्त किया जा रहा है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस वर्ष बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या नया रिकॉर्ड बना सकती है। अब तक मंदिर समिति को करीब 40 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हो चुकी है।
बढ़ती भीड़ को देखते हुए बदली आवाजाही की व्यवस्था

बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ प्रशासन ने मंदिर तक आने-जाने के लिए आवाजाही की व्यवस्था में भी बदलाव किया है। अब दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को नए पुल से मंदिर की ओर भेजा जा रहा है, जबकि दर्शन के बाद वापसी पुराने पुल के रास्ते कराई जा रही है।
यात्रा के शुरुआती दौर में भी श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए इसी तरह की व्यवस्था लागू की गई थी। हालांकि मानसून के दौरान जब यात्रियों की संख्या अपेक्षाकृत कम हो गई थी, तब पुराने पुल से ही दोनों दिशाओं में आवाजाही कराई जा रही थी।
अब यात्रा के दूसरे चरण में एक बार फिर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के बाद पुरानी व्यवस्था को बहाल कर दिया गया है। प्रशासन और मंदिर समिति का फोकस भीड़ को व्यवस्थित रखने के साथ श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन और सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराने पर है।
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