Azam Khan: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान ने जेल की सलाखों के पीछे से मुस्लिम समाज के लिए एक बेहद भावुक और गंभीर संदेश भेजा है। हाल ही में उनके बेहद करीबी सहयोगी और सपा नेता यूसुफ मलिक ने जेल में उनसे मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद जब यूसुफ मलिक बाहर आए, तो उन्होंने मीडिया को आजम खान के उस संदेश के बारे में बताया जो उन्होंने विशेष रूप से आगामी ईद के त्योहार को लेकर दिया है। आजम खान का यह संदेश वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और उनके निजी संघर्षों के बीच एक गहरा अर्थ रखता है।
ईद पर काले कपड़े और सादगी की अपील
यूसुफ मलिक के अनुसार, आजम खान ने मुस्लिम समुदाय से अपील की है कि इस बार ईद का त्योहार पारंपरिक उल्लास के बजाय सादगी और शोक के प्रतीक के रूप में मनाया जाए। उन्होंने संदेश दिया है कि इस बार ईद पर लोग नए कपड़े पहनने से परहेज करें और यदि संभव हो तो एकजुटता दिखाने के लिए काले कपड़े पहनें। इसके अलावा, उन्होंने विरोध और संवेदना के प्रतीक के रूप में बांह पर काली पट्टी बांधने का भी सुझाव दिया है। आजम खान ने यह भी कहा कि इस बार लोग जोर से हंसने या जश्न मनाने से बचें, ताकि एक गंभीर संदेश समाज और दुनिया तक पहुंच सके।
इजरायल-ईरान संघर्ष और मानवीय संवेदना
आजम खान के इस संदेश के पीछे का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी मानवीय संकट है। यूसुफ मलिक ने बताया कि आजम खान ईरान में बच्चों की मौतों और इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष से बेहद व्यथित हैं। उन्होंने कहा कि जो निर्दोष बच्चे इस युद्ध की बलि चढ़ गए, उनके प्रति सहानुभूति प्रकट करने के लिए यह फैसला लिया गया है। आजम खान चाहते हैं कि भारतीय मुसलमान उन पीड़ित परिवारों के गम में शरीक हों और यह दिखाएं कि मानवता की कोई सीमा नहीं होती। उनका यह पैगाम वैश्विक भाईचारे और युद्ध के खिलाफ एक मूक प्रदर्शन की तरह देखा जा रहा है।
जेल में मुलाकातों का सिलसिला और कानूनी स्थिति
सीतापुर जेल में आजम खान से मिलने वालों में केवल यूसुफ मलिक ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी डॉक्टर तंजीन फातिमा भी शामिल थीं। दोनों ने करीब एक घंटे तक आजम खान से बातचीत की और उनके स्वास्थ्य व कानूनी मामलों पर चर्चा की। गौरतलब है कि आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम फिलहाल जेल में सजा काट रहे हैं। 23 सितंबर 2025 को एक संक्षिप्त रिहाई के बाद, उन्हें दो पैन कार्ड रखने के पुराने मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा सात साल की कड़ी सजा सुनाई गई है। इस कानूनी लड़ाई ने उनके राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन को पूरी तरह प्रभावित किया है।
राजनीतिक रसूख से जेल की सलाखों तक का सफर
एक दौर वह था जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में आजम खान का नाम बड़े सम्मान और खौफ के साथ लिया जाता था। समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के वे सबसे भरोसेमंद साथियों में से एक थे और पार्टी में उनका कद किसी से छिपा नहीं था। हालांकि, 2017 में प्रदेश की सत्ता परिवर्तन के बाद आजम खान की मुश्किलें लगातार बढ़ती गईं। बीजेपी नेता आकाश सक्सेना द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमों और प्रशासन की सख्त कार्रवाई के बाद, आजम खान पर केसों की एक लंबी फेहरिस्त तैयार हो गई। आज वही कद्दावर नेता जेल के अंदर से अपने समाज को एकजुट रहने और सादगी अपनाने का संदेश दे रहा है।
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