Ayushman-Chirayu Scheme: हरियाणा में कार्ड धारकों का रिकॉर्ड, 1.38 करोड़ लोगों को मिला 5 लाख का गारंटी कार्ड

हरियाणा की लगभग 2.75 करोड़ की आबादी में से 1.38 करोड़ लोगों के आयुष्मान-चिरायु कार्ड बनाए जा चुके हैं।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अप्रैल 30, 2026

Ayushman-Chirayu Scheme: हरियाणा में आयुष्मान-चिरायु योजना लाखों लोगों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। राज्य की लगभग 2 करोड़ 75 लाख की आबादी में से करीब 1.38 करोड़ लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। इसका मतलब है कि प्रदेश की लगभग आधी आबादी इस योजना के तहत स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ उठा रही है।

इस योजना के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए प्रति परिवार सालाना 5 लाख रुपये तक का मुफ्त उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि पहले महंगे इलाज के कारण कई लोग चिकित्सा सेवाओं से वंचित रह जाते थे।

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2018 में शुरू हुई योजना, 2022 में बढ़ाया गया दायरा

आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत केंद्र सरकार ने वर्ष 2018 में की थी, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना था। इसके बाद हरियाणा सरकार ने नवंबर 2022 में ‘आयुष्मान चिरायु योजना’ शुरू कर इसका दायरा और बढ़ा दिया। नई व्यवस्था के तहत उन परिवारों को भी शामिल किया गया, जिनकी सालाना आय 3 लाख रुपये तक है। इससे पहले इस योजना का लाभ सीमित वर्ग तक ही था, लेकिन अब अधिक लोग इसके दायरे में आ गए हैं। इस विस्तार के बाद राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और भी व्यापक हो गई है।

1300 से अधिक अस्पतालों का नेटवर्क

योजना के सफल संचालन के लिए हरियाणा में अस्पतालों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया गया है। वर्तमान में 1,363 पैनल अस्पताल इस योजना से जुड़े हुए हैं, जिनमें 777 निजी और 586 सरकारी अस्पताल शामिल हैं। इन अस्पतालों के माध्यम से लाभार्थियों को पूरे राज्य में कहीं भी आसानी से इलाज की सुविधा मिल रही है। मरीजों को बड़ी सर्जरी, हार्ट और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज भी बिना किसी आर्थिक बोझ के मिल पा रहा है।

विशेषज्ञों की राय और चुनौतियां

आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अजय महाजन के अनुसार, यह योजना गरीबों के लिए बेहद उपयोगी है। उनका मानना है कि यदि इसे सही तरीके से लागू किया जाए तो यह समाज के कमजोर वर्ग के लिए बहुत बड़ा सहारा बन सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि पहले गरीब व्यक्ति के लिए दिल या किडनी जैसे जटिल इलाज कराना लगभग असंभव होता था, लेकिन अब यह योजना उनके लिए राहत लेकर आई है। हालांकि, उन्होंने यह चिंता भी जताई कि धीरे-धीरे निजी अस्पतालों को इस योजना से बाहर किया जा रहा है, जिससे भविष्य में मरीजों को परेशानी हो सकती है।

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