Ram Mandir Donation Case: अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में महाघोटाला? करपात्री महाराज के खुलासों से मची हलचल

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट एक बड़े विवाद के घेरे में है। संत करपात्री महाराज ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों, विशेषकर चंपत राय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मंदिर परिसर में संगठित चोरी, सीसीटीवी से छेड़छाड़ और वित्तीय अनियमितताओं के दावों ने ट्रस्ट की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिया है। जानिए, ट्रस्ट के किन दिग्गजों पर गाज गिर सकती है और क्या है इस पूरे मामले का सच।

Ram Mandir Donation Case

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 1, 2026

Ram Mandir Donation Case: रामलला की पावन नगरी अयोध्या में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर मचा घमासान अब अपने निर्णायक और विस्फोटक दौर में प्रवेश कर चुका है। प्रख्यात संत स्वामी करपात्री महाराज ने ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों पर सीधे निशाना साधते हुए ऐसे संगीन आरोप लगाए हैं, जिसने देश भर के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। स्वामी करपात्री महाराज ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि विवादों के केंद्र में आए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का इस्तीफा अंदरखाने स्वीकार किया जा चुका है और वे इस समय गहन जांच की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। यह बयान सीधे तौर पर मंदिर के प्रशासनिक ढांचे की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सीसीटीवी कैमरों की सुनियोजित साजिश का पर्दाफाश

बताते चले कि, करपात्री महाराज ने मंदिर परिसर की सुरक्षा और पवित्रता को लेकर अत्यंत गंभीर टिप्पणियां की हैं। उन्होंने मंदिर के भीतर ही संगठित रूप से की जा रही चोरी का खुलासा करते हुए कहा, “राम मंदिर के भीतर ‘टोटी चोर’ सक्रिय हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभु के धाम से चांदी की बहुमूल्य टोटी गायब होने की घटना कोई सामान्य चोरी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने तकनीकी मिलीभगत की ओर इशारा करते हुए दावा किया कि मंदिर परिसर में जिस स्थान पर भी वित्तीय अनियमितता या चोरी को अंजाम दिया जाता था, वहां के सीसीटीवी कैमरों को पूर्व-नियोजित तरीके से बंद कर दिया जाता था। इस पूरे प्रकरण में उन्होंने अर्जुन देव की तत्काल गिरफ्तारी और उनसे कड़ाई से पूछताछ किए जाने की मांग की है।

कारसेवक पुरम में तलाशी की मांग

मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने अयोध्या स्थित ‘कारसेवक पुरम’ परिसर की तुरंत सघन तलाशी लेने का आह्वान किया है। उन्होंने चंपत राय पर शिकंजा कसते हुए कहा है कि उन्हें किसी भी सूरत में अयोध्या से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि उन्होंने शुरुआती पूछताछ में कई रसूखदार और प्रभावशाली व्यक्तियों के नामों का खुलासा किया है। यह मांग स्पष्ट करती है कि जांच का दायरा केवल ट्रस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई अन्य बड़े चेहरे भी शामिल हो सकते हैं।

अन्य ट्रस्टियों की संदिग्ध कार्यप्रणाली पर उठते सवाल

विवाद का दायरा बढ़ता जा रहा है। करपात्री महाराज ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी की भूमिका को भी संदेह के दायरे में खड़ा किया है। उनके अनुसार, ट्रस्ट से जुड़े गोपाल राव द्वारा कर्नाटक में बड़े पैमाने पर जमीन की खरीद-फरोख्त की गई है, जिसकी निष्पक्ष जांच अनिवार्य है। साथ ही, स्थानीय ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा का नाम लेते हुए उन्होंने मांग की है कि उनके कार्यकाल के दौरान अर्जित की गई समस्त चल-अचल संपत्तियों की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। संतों द्वारा लगाए गए इन तीखे आरोपों ने राम मंदिर के प्रशासनिक कामकाज की पारदर्शिता और अखंडता पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है, जिससे अब जवाबदेही तय करने का दबाव सरकार और प्रशासन पर बढ़ गया है।