Ram Mandir Ayodhya : अयोध्या में बड़ी चूक, रामलला का हार और पादुका गायब, कौन है इसके पीछे?

अयोध्या के राम मंदिर से जुड़ी एक खबर ने श्रद्धालुओं और स्थानीय प्रशासन का ध्यान खींचा है। रामलला का हार और चरण पादुका कथित रूप से गायब होने की बात सामने आई है। आखिर यह सुरक्षा में चूक है, चोरी है या कोई और वजह? जांच पूरी होने तक कई सवाल अनुत्तरित बने हुए हैं।

Ram Mandir Ayodhya

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 19, 2026

Ram Mandir Ayodhya : अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले ने गंभीर मोड़ ले लिया है। इस मामले में गठित एसआईटी (SIT) की जांच अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। जांच टीम ने मंदिर के कामकाज, दानपात्रों के प्रबंधन, नकदी की गिनती और उसे बैंक में जमा करने की पूरी प्रक्रिया की गहन समीक्षा शुरू कर दी है। SIT न केवल नकदी, बल्कि सोने, चांदी और कीमती रत्नों के संग्रहण केंद्रों की व्यवस्था को भी खंगाल रही है। इस जांच के दायरे में मंदिर ट्रस्ट से जुड़े अधिकारी और मंदिर परिसर में कार्यरत कर्मचारी भी शामिल हैं। अधिकारियों का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि क्या संग्रह और बैंकिंग प्रक्रिया के बीच कहीं कोई वित्तीय अनियमितता हुई है।

हीरों से जड़ित हार और चरण पादुकाओं का पता लगा रही SIT

जांच के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि रामलला के बेशकीमती हीरे जड़ित हार और चरण पादुकाएं गायब हैं, जिनकी चोरी की आशंका जताई जा रही है। मामले में SIT ने गोपाल राव और टिन्नू यादव से दोबारा पूछताछ की है। पूछताछ के दौरान पुजारी ने खुलासा किया कि आभूषण भगवान को अर्पित करने के बाद टिन्नू यादव को लौटा दिए गए थे। टिन्नू यादव का दावा है कि इन आभूषणों को गलाकर सोने की ईंटें बनाने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, जब आभूषणों के कस्टोडियन कृष्ण देव तिवारी से पूछताछ की गई, तो न तो सोने की ईंटें मिलीं और न ही इससे संबंधित कोई रसीद बरामद हुई। इस विसंगति ने मामले में चोरी और गबन के संदेह को और गहरा कर दिया है।

तकनीकी साक्ष्य और पूछताछ का दायरा बढ़ा

जांच एजेंसियों ने अब तक मामले से जुड़े 5 दर्जन से अधिक कर्मचारियों, सेवादारों और गणना प्रक्रिया में शामिल लोगों के बयान दर्ज किए हैं। कई संदिग्धों से बार-बार पूछताछ की जा रही है ताकि बयानों में विरोधाभास को पकड़ा जा सके। SIT ने ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा को चेन्नई से तलब कर कई घंटों तक विस्तृत पूछताछ की है। हालांकि, जांच में सबसे बड़ी बाधा सीसीटीवी फुटेज का उपलब्ध न होना है। इस कमी को पूरा करने के लिए SIT अब पूरी तरह से बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल डेटा और अन्य तकनीकी साक्ष्यों पर निर्भर है। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्य ही इस जटिल घटनाक्रम की असल सच्चाई सामने लाने में सक्षम होंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या दौरा और कड़ा संदेश

इस बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आज का अयोध्या दौरा अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीएम के हनुमानगढ़ी और रामजन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन के साथ-साथ SIT अधिकारियों से भी मामले की प्रगति पर चर्चा करने की प्रबल संभावना है। प्रोटोकॉल के तहत, इस दौरान ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों जैसे चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को कार्यक्रम से दूर रखा गया है। यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार मामले को लेकर पूरी पारदर्शिता बरत रही है। विपक्ष लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, जबकि सरकार ने आश्वासन दिया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। करोड़ों भक्तों की आस्था के प्रतीक राम मंदिर में हुई यह घटना अत्यंत संवेदनशील है, और SIT की अंतिम रिपोर्ट पर ही भविष्य की दिशा तय होगी।

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