Ram Mandir Donation Theft: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में मचे सियासी घमासान के बीच विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने सख्त रुख अपनाते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। जब उनसे यह सवाल किया गया कि क्या वीएचपी आरोपियों को कानूनी सहायता प्रदान करेगी, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। आलोक कुमार ने कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है और ये आरोपी संगठन के कार्यकर्ता नहीं, बल्कि कर्मचारी थे। उन्होंने इसे एक ‘काल्पनिक सवाल’ करार देते हुए स्पष्ट किया कि संगठन का इनसे कोई सरोकार नहीं है।
निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया और कानूनी मर्यादा की पैरवी
बताते चले कि, आलोक कुमार ने साफ किया कि मामले में अंतिम फैसला लेने का अधिकार पूरी तरह से न्यायालय के पास है। उन्होंने कहा कि CCTV फुटेज और आरोपियों द्वारा जुर्म कबूलने जैसे साक्ष्य मौजूद हैं, लेकिन भारतीय कानूनी व्यवस्था में फैसला कोर्ट ही करती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चुनाव नजदीक होने के कारण किसी का मीडिया ट्रायल और चरित्र हनन किया जाना उचित है? उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें कानून की मर्यादाओं का सम्मान करना चाहिए और न्यायपालिका पर विश्वास रखना चाहिए।
BNS की धारा के तहत कार्रवाई की मांग
न्यूज एजेंसी आईएनएस को दिए साक्षात्कार में आलोक कुमार ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि मर्यादा की सीमाएं तोड़ी जा रही हैं। मंदिर में 2,000 करोड़ रुपये की चोरी जैसे निराधार दावे करने वाले बड़े नेताओं को पुलिस द्वारा तलब किया जाना चाहिए। उन्होंने कड़ी चेतावनी दी कि बिना सबूत के ऐसे भ्रामक बयान देना, जिनसे समाज में सनसनी, असंतोष और हिंसा फैलने का खतरा हो, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353 के तहत दंडनीय अपराध है।
अयोध्या बार एसोसिएशन के फैसले पर असहमति
अयोध्या बार एसोसिएशन द्वारा आरोपियों का केस न लड़ने के निर्णय पर वीएचपी अध्यक्ष ने असहमति जताई। उन्होंने कहा कि चंदा चोरी के आरोपियों के प्रति उनके मन में तनिक भी सहानुभूति नहीं है और वे उन्हें जेल में ही देखना चाहते हैं, लेकिन संवैधानिक सच्चाई यह है कि संविधान का अनुच्छेद 22 हर आरोपी को कानूनी सहायता पाने का मौलिक अधिकार देता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के हवाले से कहा कि बार एसोसिएशन ऐसा प्रस्ताव पास नहीं कर सकती और न ही किसी वकील को केस लेने से रोका जा सकता है।
चंपत राय के इस्तीफे की प्रशंसा
राम मंदिर के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे पर उन्होंने कहा कि यह एक सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि जब जांच को निष्पक्ष रखने के लिए इस्तीफा देने की बात उठी, तो चंपत राय ने FIR के दो दिन के भीतर ही पद छोड़ दिया, जिसकी प्रशंसा होनी चाहिए। SIT जांच की समय सीमा बढ़ाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह जांच केवल अपराध तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाना भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने यूपी पुलिस और अपनी जांच एजेंसियों पर पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा कि मीडिया और पूरा हिंदू समाज इस मामले पर बारीकी से नजर रखे हुए है, इसलिए कुछ भी गलत होने की संभावना नहीं है।










