Ram Mandir Donation Case: महाकुंभ की भीड़ का फायदा उठाकर हुआ बड़ा गबन, अब ED करेगी जांच

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे के कथित गबन का मामला गहरा गया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि महाकुंभ के दौरान रिकॉर्ड भीड़ का फायदा उठाकर एक सुनियोजित साजिश रची गई थी। अब इस मामले की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग की एंट्री होने जा रही है। जांच में बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।

Ram Mandir Donation Case

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 1, 2026

Ram Mandir Donation Case: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे के कथित गबन का मामला अब और अधिक गंभीर होता जा रहा है। पुलिस की हालिया जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस घोटाले की सबसे बड़ी कड़ी प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ (जनवरी-फरवरी 2025) से जुड़ी है। जांच में सामने आया है कि महाकुंभ के दौरान जब रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे और दान-पात्रों में चढ़ावे की झड़ी लग गई, तब आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से इस भारी-भरकम राशि में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की। पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपी इसी अवसर की तलाश में थे और भीड़ के भारी दबाव का लाभ उठाकर उन्होंने मंदिर के कोष को चूना लगाया।

‘आपरेशन चोरी’ और बेनामी संपत्तियों का जंजाल

पुलिस जांच के घेरे में आए 8 आरोपियों में से जीजा-साले की जोड़ी—लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा—सबसे मुख्य संदिग्ध बनकर उभरे हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि मंदिर के चढ़ावे की सबसे बड़ी रकम इसी जोड़ी ने हड़पी है। इतना ही नहीं, चोरी किए गए पैसों से इन दोनों ने न केवल विलासितापूर्ण जीवन जिया, बल्कि आधा दर्जन से अधिक संपत्तियां भी खरीदी हैं। अब पुलिस इन संपत्तियों के वास्तविक स्रोत और उनके खरीद-फरोख्त में इस्तेमाल किए गए धन की गहन जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह काली कमाई कहां-कहां खपाई गई।

वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए ED की एंट्री

मामले की भयावहता को देखते हुए अयोध्या पुलिस ने अब केंद्रीय जांच एजेंसियों की मदद लेने का फैसला किया है। पुलिस जल्द ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग को औपचारिक पत्र भेजकर इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच का आग्रह करेगी। अधिकारियों का मानना है कि चोरी की गई रकम की मनी ट्रेल, संदिग्ध बैंक खातों और संपत्तियों के जटिल नेटवर्क को सुलझाने के लिए ED की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। वित्तीय अनियमितताओं की यह जांच न केवल आरोपियों को बेनकाब करेगी, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगी कि इस पूरे खेल में और कौन-कौन से रसूखदार चेहरे शामिल हैं।

बैंक ट्रांजेक्शन की हो रही पड़ताल

इस घोटाले में केवल बाहर के लोग ही नहीं, बल्कि बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े लोगों की संलिप्तता की भी आशंका जताई जा रही है। जांच के दौरान कुछ ऐसे बैंकिंग लेन-देन सामने आए हैं, जिन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कुछ कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि अभी तक किसी बैंक अधिकारी के खिलाफ कोई आधिकारिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुलिस इस पहलू को अत्यंत संवेदनशील मानकर आगे बढ़ रही है।

60 करोड़ श्रद्धालुओं के दान पर डाका

स्मरण रहे कि 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक चले महाकुंभ के दौरान लगभग 60 करोड़ श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई थी। इस दौरान राम मंदिर में दान और चढ़ावे में रिकॉर्ड वृद्धि हुई थी। आरोपियों ने उसी आस्था के प्रतीक ‘रामधन’ को अपनी लालच का जरिया बनाया। फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, और उम्मीद जताई जा रही है कि जांच पूरी होने के बाद वित्तीय गबन के इस बड़े घोटाले का पूरा कच्चा-चिट्ठा सार्वजनिक होगा।