UP Politics: 50 किलो सोना और बेशकीमती हीरे कहां गए? राम मंदिर ट्रस्ट पर रामगोपाल यादव का बड़ा हमला

अयोध्या राम मंदिर के चंदे और चढ़ावे को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उन्होंने मंदिर निर्माण के दान में 20 हजार करोड़ रुपये के घपले का दावा किया है। यादव ने मंदिर ट्रस्ट की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए सोने और हीरों के दान का हिसाब मांगा है। यह मामला अब तूल पकड़ रहा है।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 1, 2026

UP Politics: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चंदे और चढ़ावे को लेकर छिड़ा विवाद अब और गहरा गया है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रो. रामगोपाल यादव ने इस मामले में एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज दावा पेश किया है। इटावा में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे और भक्तों द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे में व्यापक स्तर पर हेराफेरी हुई है। उनके अनुसार, यह राशि छोटी-मोटी नहीं, बल्कि कम से कम 20 हजार करोड़ रुपये के आसपास है, जिसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।

“बड़े रसूखदार लोग शामिल”

बताते चले कि, प्रो. रामगोपाल यादव ने इस घोटाले को एक संगठित और बड़ा ‘खेल’ करार दिया है। उन्होंने अपने बयान में स्पष्ट संकेत दिए कि इस गबन के तार सत्ता के गलियारों तक जुड़े हो सकते हैं। उन्होंने कहा, “यह कोई साधारण मामला नहीं है। राम मंदिर के धन के दुरुपयोग में बहुत बड़े-बड़े लोग शामिल हैं।” सपा सांसद के इस दावे ने न केवल मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि विपक्ष अब इस मामले को एक बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में तूल देने की तैयारी में है। उन्होंने इशारों-इशारों में यह भी स्पष्ट किया कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए, तो कई रसूखदार चेहरों का पर्दाफाश हो सकता है।

रामगोपाल यादव ने ट्रस्ट की पारदर्शिता पर तीखी टिप्पणी की

चढ़ावे के प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए रामगोपाल यादव ने ट्रस्ट की पारदर्शिता पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा के अनुसार जो बेशकीमती उपहार दिए, उनका कोई अता-पता नहीं है। यादव ने कहा, “भक्तों ने भगवान के चरणों में 50-50 किलो सोना समर्पित किया, लेकिन उसका आज कहीं कोई रिकॉर्ड या हिसाब नहीं है। इसी तरह, लाखों-करोड़ों रुपये मूल्य के हीरे के हारों का भी कोई अता-पता नहीं है कि वे कहां गए और किसके पास पहुंचे।” उनके इस बयान ने राम मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन और लेखा-जोखा रखने की प्रक्रिया पर गंभीर संदेह पैदा कर दिया है।

पुलिस की जांच और विपक्ष का आक्रामक रुख

वर्तमान में अयोध्या पुलिस मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ल को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है और उसकी अवैध संपत्तियों को कुर्क करने की कार्रवाई चल रही है। ऐसे में रामगोपाल यादव का यह बयान इस जांच को एक नई दिशा में मोड़ता दिख रहा है। विपक्ष अब सरकार और मंदिर प्रशासन को कटघरे में खड़ा करने के लिए तैयार है। यह घटनाक्रम न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार इस दावे पर क्या रुख अपनाती है और क्या इस 20 हजार करोड़ के कथित गबन की जांच किसी बड़ी एजेंसी को सौंपी जाएगी।