Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या के भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान और चढ़ावे की राशि में कथित गबन व वित्तीय हेराफेरी के आरोपों ने देश-दुनिया के राम भक्तों को झकझोर कर रख दिया है। मंदिर ट्रस्ट के भीतर उजागर हुई विसंगतियों और इस मामले की विशेष जांच दल (SIT) द्वारा की जा रही छानबीन के बीच श्रद्धालुओं की आस्था को गहरा आघात पहुंचा है। मंदिर प्रबंधन और अंदरूनी सूत्रों से मिल रही खबरों के अनुसार, इस पूरे विवाद का सीधा और बेहद गंभीर असर अब अयोध्या आने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या और राम लला के दरबार में होने वाली आय पर दिखने लगा है। पिछले कुछ दिनों में श्रद्धालुओं की आमद में अप्रत्याशित कमी आई है, जिससे गुप्त दान और काउंटर चढ़ावे का ग्राफ तेजी से नीचे गिरा है।
भक्तों का बढ़ा अविश्वास, दान पेटियों से बनाई दूरी
राम मंदिर से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों द्वारा साझा किए गए वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें तो दान राशि में आई गिरावट का यह ग्राफ बेहद चौंकाने वाला है। पिछले कई महीनों से मंदिर में हर महीने औसतन लगभग 7 करोड़ रुपये का चढ़ावा (दान) आ रहा था। लेकिन जब से राम लला की दान पेटी से पैसे चोरी होने, सुरक्षा व्यवस्था और भोग-प्रसाद के नाम पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी के आरोप मुख्यधारा की मीडिया की सुर्खियों में आए हैं, तब से भक्तों के बीच पारदर्शिता को लेकर गंभीर अविश्वास पैदा हो गया है। नतीजतन, आम श्रद्धालुओं ने खुले दिल से दान देने में भारी संकोच दिखाना शुरू कर दिया है और दान पेटियों से दूरी बना ली है।
मात्र 15 दिनों में 7 करोड़ से घटकर 1.5 करोड़ रह गई मंदिर की आय
कथित वित्तीय विसंगतियों और पारदर्शिता की कमी का खामियाजा अब सीधे तौर पर राम लला के खजाने को भुगतना पड़ रहा है। विवाद सामने आने के बाद पिछले महज 15 दिनों के भीतर मंदिर की कुल चढ़ावा राशि घटकर केवल डेढ़ (1.5) करोड़ रुपये रह गई है। आंकड़ों का यह विश्लेषण सीधे तौर पर मंदिर की मासिक आय में लगभग 80% की भारी और ऐतिहासिक गिरावट को दर्शाता है। देश के कोने-कोने से आ रहे भक्तों का स्पष्ट कहना है कि वे प्रभु श्री राम के दर्शन तो पूरी श्रद्धा के साथ कर रहे हैं, लेकिन जब तक दान के एक-एक रुपये का हिसाब सार्वजनिक और पारदर्शी नहीं हो जाता, तब तक वे काउंटरों पर अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा चढ़ाने से बचेंगे।
ट्रस्ट भंग करने और चंपत राय की गिरफ्तारी की मांग तेज
इस संवेदनशील मामले ने अब राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। मुख्य विपक्षी दलों और आम आदमी पार्टी (AAP) समेत कई राजनीतिक संगठनों ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तुरंत भंग करने की मांग की है। साथ ही, ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों जैसे चंपत राय और अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी को लेकर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। चौतरफा राजनीतिक हमलों, एसआईटी (SIT) की जांच और श्रद्धालुओं की संख्या व चढ़ावे में आई इस ऐतिहासिक गिरावट ने मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधकों और व्यवस्थापकों की रातों की नींद उड़ा दी है। मंदिर प्रशासन के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती वित्तीय व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के साथ-साथ आम जनता के बीच खोए हुए भरोसे को वापस बहाल करने की है।










