Assam Flood News: शिलांग में सब्जियों की कीमतों में उछाल, मटर 400 रुपये किलो; असम बाढ़ में 98 मौतें

असम में बाढ़ से हालात गंभीर बने हुए हैं और इसका असर अब मेघालय की राजधानी शिलांग के बाजारों पर भी दिख रहा है। सब्जियों की सप्लाई घटने से कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। हरी मटर 400 रुपये किलो तक पहुंच गई है। आखिर बाढ़ ने सब्जियों की कीमतों को इतना क्यों बढ़ा दिया?

शिलांग में सब्जियों की कीमतों में उछाल

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अगस्त 8, 2026

Assam Flood News: आमतौर पर साइबर हमलों से बचने के लिए कंप्यूटर और दूसरे डिवाइस में सॉफ्टवेयर को समय-समय पर अपडेट करने की सलाह दी जाती है। लेकिन अब साइबर अपराधी इसी आदत को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। हैकर्स फर्जी सॉफ्टवेयर अपडेट का लालच देकर यूजर्स को ऐसे लिंक या फाइल पर क्लिक करने के लिए उकसा रहे हैं, जो देखने में बिल्कुल असली लगती हैं।

साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने ऐसे अभियानों की पहचान की है, जिनमें Zoom और Adobe जैसे लोकप्रिय सॉफ्टवेयर के नाम का इस्तेमाल करके फर्जी अपडेट दिखाए जाते हैं। इन पर भरोसा करके डाउनलोड या इंस्टॉल करने पर डिवाइस में अनधिकृत रिमोट-एक्सेस सॉफ्टवेयर पहुंच सकता है।

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फर्जी अपडेट पेज से शुरू होता है पूरा खेल

इस तरह के हमले में सबसे पहले यूजर को एक नकली वेबसाइट या पॉप-अप दिखाई देता है। इसका डिजाइन वास्तविक सॉफ्टवेयर की वेबसाइट जैसा रखा जाता है, ताकि यूजर को किसी तरह का शक न हो। कई मामलों में पेज पर यह चेतावनी दिखाई जाती है कि सॉफ्टवेयर पुराना हो चुका है और उसे अपडेट किए बिना मीटिंग या जरूरी काम जारी नहीं रखा जा सकता। इसके बाद डाउनलोड या अपडेट का विकल्प सामने आता है।

कुछ अभियानों में नकली मीटिंग पेज के जरिए यूजर को यह महसूस कराया जाता है कि तकनीकी समस्या दूर करने के लिए तत्काल अपडेट जरूरी है। इसके बाद बैकग्राउंड में संदिग्ध इंस्टॉलर डाउनलोड कराया जा सकता है।

असली सॉफ्टवेयर के नाम का उठाया जा रहा फायदा

इस साइबर ठगी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अपराधी हर बार खुद कोई नया रिमोट-एक्सेस प्रोग्राम तैयार नहीं करते। इसके बजाय वे वैध और सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाले Remote Monitoring and Management यानी RMM टूल्स का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। रिपोर्टों में ConnectWise ScreenConnect जैसे टूल्स के दुरुपयोग का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे टूल सामान्य परिस्थितियों में आईटी सपोर्ट और सिस्टम मैनेजमेंट के लिए इस्तेमाल होते हैं। लेकिन अगर इन्हें यूजर की अनुमति के बिना इंस्टॉल कराया जाए, तो हमलावर डिवाइस तक अनधिकृत पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं।

Windows के साथ Mac यूजर्स भी निशाने पर

यह खतरा केवल Windows कंप्यूटर तक सीमित नहीं है। सुरक्षा शोधकर्ताओं ने ऐसे अभियानों में Windows और macOS दोनों प्लेटफॉर्म को निशाना बनाए जाने की जानकारी दी है। हमलावर फर्जी मीटिंग इनवाइट, दस्तावेजों और अपडेट नोटिफिकेशन जैसे अलग-अलग बहानों का इस्तेमाल कर सकते हैं। एक बार संदिग्ध सॉफ्टवेयर इंस्टॉल होने के बाद निजी जानकारी, संवेदनशील फाइलों और अकाउंट क्रेडेंशियल्स के दुरुपयोग का खतरा बढ़ सकता है। कुछ अभियानों में अतिरिक्त मैलवेयर इंस्टॉल करने या नेटवर्क में आगे बढ़ने की कोशिश भी देखी गई है।

कैसे बचें इस Software Update Scam से?

सबसे जरूरी बात यह है कि किसी ईमेल, मैसेज या अनजान वेबसाइट से मिलने वाले अपडेट लिंक पर तुरंत क्लिक न करें। सॉफ्टवेयर अपडेट हमेशा संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप के अंदर दिए गए अपडेट विकल्प से ही करें। अगर Zoom, Adobe या किसी अन्य ऐप के नाम से अचानक अपडेट पॉप-अप आए, तो पहले उसकी प्रामाणिकता जांचें। अनजान MSI, EXE या स्क्रिप्ट फाइलों को डाउनलोड और रन करने से बचें। कंप्यूटर में सुरक्षा सॉफ्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम को अपडेट रखें। ऑफिस सिस्टम इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को संदिग्ध इंस्टॉलेशन या असामान्य रिमोट-एक्सेस गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत IT टीम को सूचित करना चाहिए।

एक छोटी सी लापरवाही पड़ सकती है भारी

साइबर अपराधी अब तकनीकी खामियों के साथ-साथ लोगों के भरोसे और रोजमर्रा की आदतों का भी फायदा उठा रहे हैं। इसलिए किसी भी “Critical Update” या “Mandatory Update” संदेश को देखकर घबराने के बजाय पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है। एक गलत क्लिक से डिवाइस की सुरक्षा और निजी डेटा दोनों खतरे में पड़ सकते हैं।

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