Assam Election Results 2026: असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए आज, 4 मई को हो रही मतगणना ने राज्य की सियासत में ‘भगवा लहर’ की पुष्टि कर दी है। सुबह से आ रहे शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन विपक्ष का सूपड़ा साफ करते हुए ऐतिहासिक जीत की ओर अग्रसर है। 126 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी गठबंधन 85 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जो सरकार बनाने के लिए आवश्यक 64 के जादुई आंकड़े से काफी अधिक है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बीजेपी असम में लगातार तीसरी बार सत्ता का स्वाद चखेगी।
हिमंता बिस्वा सरमा का जलवा बरकरार
असम के मतगणना के आंकड़ों (Counting Statistics) में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का दबदबा साफ दिखाई दे रहा है। जालुकबारी निर्वाचन क्षेत्र से हिमंता भारी मतों के अंतर से अपने प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ रहे हैं। दूसरी ओर, विपक्षी खेमे के लिए ये रुझान किसी बुरे सपने से कम नहीं हैं। कांग्रेस के कद्दावर नेता गौरव गोगोई जोरहाट सीट पर संघर्ष करते दिख रहे हैं और फिलहाल पीछे चल रहे हैं। इसके अतिरिक्त, अखिल गोगोई और लुरिनज्योति गोगोई जैसे प्रमुख क्षेत्रीय नेताओं की स्थिति (Status of Regional Leaders) भी चिंताजनक बनी हुई है, जिससे विपक्षी गठबंधन की रणनीति पूरी तरह विफल होती नजर आ रही है।
सत्ता विरोधी लहर को मात
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि बीजेपी की इस प्रचंड चुनावी सफलता (Grand Electoral Success) के पीछे मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का करिश्माई नेतृत्व सबसे बड़ा कारण है। हिमंता ने खुद को एक विकास पुरुष और सख्त प्रशासक के रूप में स्थापित किया है। इसके अलावा, राज्य में निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन (Delimitation of Constituencies) यानी परिसीमन का दांव भी बीजेपी के हक में गया है। निर्वाचन क्षेत्रों की नई सीमाओं ने एनडीए के पक्ष में ‘चुनावी गणित’ को बेहद सरल और मजबूत बना दिया है, जिससे प्रतिद्वंद्वी दलों का समीकरण बिगड़ गया।
महिला मतदाताओं का निर्णायक रुख
आपको बता दे कि, असम में बीजेपी की पैठ को मजबूत करने में लोक कल्याणकारी योजनाओं (Welfare Schemes) ने अहम भूमिका निभाई है। विशेष रूप से ‘ओरुनोडोई योजना’ के माध्यम से महिलाओं को मिलने वाली प्रत्यक्ष सहायता ने बीजेपी के लिए एक ठोस ‘साइलेंट वोटर’ बैंक तैयार किया है। सरकारी योजनाओं के डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT Policy) और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास ने मतदाताओं के मन में यह विश्वास पैदा किया कि ‘डबल इंजन’ की सरकार ही उनके हितों की रक्षा कर सकती है।
कड़े फैसले और विचारधारा
बीजेपी ने अपने चुनावी अभियान के दौरान ‘अवैध घुसपैठ’ और अतिक्रमण जैसे संवेदनशील मुद्दों (Sensitive Issues) पर बेहद आक्रामक रुख अपनाया। समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने का संकल्प और सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मुहिम ने बहुसंख्यक समुदाय को पार्टी के पक्ष में एकजुट किया। इस वैचारिक ध्रुवीकरण (Ideological Polarization) ने चुनाव को ‘अस्तित्व की लड़ाई’ में बदल दिया, जहां बीजेपी एक सुरक्षा कवच के रूप में उभरकर सामने आई।
कमजोर ‘INDIA’ गठबंधन
असम में कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी मोर्चे (Opposition Front) ‘ASOM’ की विफलता का मुख्य कारण आपसी तालमेल की भारी कमी रही। गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे और साझा एजेंडे के अभाव ने मतदाताओं को भ्रमित किया। ऊपरी असम की चाय बागान बेल्ट और मुस्लिम बहुल इलाकों में, जहाँ कांग्रेस को बड़ी उम्मीदें थीं, वहाँ भी बीजेपी ने सेंध लगा दी है। नेतृत्वहीन विपक्षी खेमे (Leaderless Opposition Camp) के पास हिमंता बिस्वा सरमा के कद का कोई विकल्प न होना बीजेपी की राह को और अधिक आसान बना गया। फिलहाल, गुवाहाटी से लेकर डिब्रूगढ़ तक बीजेपी समर्थकों ने जश्न की तैयारी शुरू कर दी है।










