Assam Election 2026: असम में SIR लागू होने पर 4 लाख मियां वोटर हटेंगे, हिमंत बिस्वा विवादित बयान

असम की राजनीति में 'मियां' बनाम 'असमिया' जंग: क्या मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के ताज़ा बयान ने 2026 के चुनावों की दिशा तय कर दी है? जानिए SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न) के उस चक्रव्यूह के बारे में जिसके जरिए 5 लाख वोटर्स को हटाने का दावा किया जा रहा है और क्यों भड़क उठा है विपक्ष।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 30, 2026

Assam Election 2026:  असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा ने हाल ही में एक विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर असम में SIR लागू हुआ, तो कम से कम 4 लाख मियां वोटर वोटर लिस्ट से बाहर हो जाएंगे। उनके इस बयान ने असम के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। बीजेपी के इस नेता के इस कमेंट को विपक्ष ने तुरंत गंभीर बताया और इसे समुदाय विशेष के खिलाफ अपमानजनक करार दिया।

विपक्ष ने लगाई तीखी प्रतिक्रिया

विपक्ष का दावा है कि मुख्यमंत्री अपनी सत्ता बचाने के लिए इतने बेताब हो गए हैं कि उन्होंने न केवल मियां समुदाय बल्कि गरीब लोगों का भी अपमान शुरू कर दिया है। AIUDF चीफ़ बदरुद्दीन अजमल ने इसे “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए कहा कि यह बयान किसी भी प्रकार स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने हिमंत से अपील की कि अपने शब्द वापस लें, नहीं तो मियां उनके खिलाफ भारी प्रतिक्रिया देंगे।

हिमंत बिस्वा का बयान और चुनावी रणनीति

मुख्यमंत्री ने एक महीने बाद होने वाले असम विधानसभा चुनाव से पहले कहा कि उनके कदमों का उद्देश्य मियां समुदाय के वोटरों को सीमित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया, “हमने शुरुआती स्टेज में यह काम किया है। जब SIR लागू होगा, तो 4-5 लाख मियां वोटर वोटर लिस्ट से बाहर हो जाएंगे।” उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस उन्हें परेशान कर सकती है, लेकिन उनका फोकस मियां लोगों को मुश्किल में डालने पर है।हिमंत ने कहा कि कुछ क्षेत्रों में हिंदुओं की संपत्तियां मियां मुसलमानों द्वारा खरीदी जा रही हैं। उन्होंने तिनसुकिया और दुलियाजान का उदाहरण देते हुए चेताया कि अगर सरकार अभी कदम नहीं उठाती, तो यह प्रवृत्ति बढ़ती जाएगी। उनके इस बयान ने राजनीतिक और सामाजिक विवाद को और हवा दी।

विपक्ष का आरोप और चेतावनी

AIUDF चीफ़ बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि मुख्यमंत्री सत्ता के लालच में मियां मुसलमानों का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ये बयान वापस नहीं लिए गए, तो हिमंत बिस्वा सरमा असम विधानसभा चुनाव में हार सकते हैं। वहीं असम कांग्रेस के स्पोक्सपर्सन जेहरुल इस्लाम ने कहा कि मुख्यमंत्री ने किसी समुदाय का अपमान नहीं किया, बल्कि गरीब और जरूरतमंदों को लेकर टिप्पणी की।जेहरुल इस्लाम ने उल्लेख किया कि हिमंत ने एक मिया रिक्शा चालक को पांच रुपये की बजाय चार रुपये देने को कहा था। इसे उन्होंने गरीब और मेहनतकश लोगों के लिए किया गया सलाह माना, लेकिन विपक्ष इसे समुदाय विशेष के खिलाफ अपमान के रूप में पेश कर रहा है। इस घटना ने सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया।

असम में चुनावी माहौल और विवाद

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद असम में राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। SIR और वोटर सूची के मुद्दे पर सभी दलों ने अपनी प्रतिक्रिया दी। चुनावी माहौल में यह बयान विपक्ष के लिए हथियार बन गया है और मुख्यमंत्री के लिए चुनौती। अब देखना होगा कि आने वाले चुनाव में यह बयान हिमंत बिस्वा शर्मा की स्थिति पर क्या असर डालता है।हिमंत बिस्वा शर्मा के बयान ने असम में मतदाताओं और राजनीतिक दलों के बीच विवाद खड़ा कर दिया है। AIUDF और कांग्रेस ने इसे गंभीरता से लिया है, जबकि बीजेपी इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा बता रही है। SIR लागू होने के संभावित प्रभावों और वोटर सूची पर चर्चा अभी और तेज होने की संभावना है।

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