Assam Election 2026 : AIUDF का दबदबा, कांग्रेस और BJP की चुनौती

असम चुनाव 2026 से पहले बदरुद्दीन अजमल की AIUDF ने कांग्रेस और भाजपा दोनों को चुनौती देते हुए अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। गौरव गोगोई की अगुवाई में कांग्रेस भी किसी गठबंधन के मूड में नहीं दिख रही। क्या विपक्ष का यह बिखराव सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की राह आसान कर देगा?

Assam Election 2026

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 24, 2026

Assam Election 2026: असम में 126 विधानसभा सीटों पर अप्रैल और मई 2026 में चुनाव होने हैं। वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार राज्य में सत्ता में है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस है, जबकि तृणमूल कांग्रेस भी इस चुनाव में हिस्सा ले रही है। इसके अलावा असम गण परिषद और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल जैसे राजनीतिक दलों की भी राज्य में मजबूत मौजूदगी है।बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) असम की राजनीति में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। AIUDF ने 2021 के विधानसभा चुनावों में शानदार जीत हासिल की थी। पार्टी का जनाधार विशेष रूप से अल्पसंख्यक बाहुल्य जिलों में बेहद मजबूत है। इन जिलों में कांग्रेस भी AIUDF का वोट शेयर कम नहीं कर पाती।

AIMIM के साथ गठबंधन की अटकलें

अटकलें लगाई जा रही हैं कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) भी इस चुनाव में AIUDF के साथ उतर सकती है। असदुद्दीन ओवैसी और बदरुद्दीन अजमल के मिलन से असम में 34 फीसदी मुस्लिम आबादी के बीच ध्रुवीकरण और बढ़ सकता है। AIMIM ने मुंबई नगर निगम चुनावों में 100 से अधिक सीटें जीतकर अपनी ताकत दिखा दी है, और अब असम में उनकी नजरें हैं।कांग्रेस ने बदरुद्दीन अजमल को सांप्रदायिक करार दिया है, लेकिन BJP के खिलाफ AIUDF की व्यापक लोकप्रियता उनकी सफलता की वजह बनी है। पार्टी का जनाधार बढ़ता जा रहा है, और बांग्लाभाषी मुसलमानों को एकजुट करने में AJमल हर बार सफल होते हैं। AIUDF असम में बांग्लाभाषी मुसलमानों की सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है।

अल्पसंख्यक वोटों पर AIUDF की पकड़

असम में मुस्लिम आबादी अब 34 फीसदी तक पहुँच चुकी है। कुल 126 विधानसभा सीटों में बहुमत का आंकड़ा 64 है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा भी मान चुके हैं कि राज्य में 22 ऐसी सीटें हैं, जहाँ BJP की स्थिति कमजोर है। विपक्ष के अनुसार परिसीमन के पहले यह संख्या 29 थी। मुस्लिम मतदाता बढ़ रहे हैं, जो AIUDF की ताकत का आधार हैं।इन 22 मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर कांग्रेस के लिए चुनौती सबसे बड़ी है। पिछली बार का गठबंधन टूट चुका है। AIUDF अपने अस्तित्व के बाद से लगातार मजबूत स्थिति में रही है। 2006 में पार्टी के पास केवल 10 सीटें थीं, जो 2011 में बढ़कर 18 हो गईं। 2016 में 13 और 2021 में 16 सीटें जीतकर पार्टी ने लगातार जनाधार बढ़ाया।

AIUDF कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती

बदरुद्दीन अजमल अब कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं। असम में कभी अल्पसंख्यक वोटर कांग्रेस के कोर वोट बैंक थे, लेकिन अब यह वोट AIUDF की ओर शिफ्ट हो गए हैं। कांग्रेस का जनाधार लगातार गिर रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में BJP के मोदी फैक्टर के कारण AIUDF को कोई सीट नहीं मिली थी, लेकिन विधानसभा चुनावों के समीकरण अलग हैं।AIUDF के मजबूत जनाधार और अल्पसंख्यक वोट पर पकड़ के कारण पार्टी विधानसभा चुनाव में अपना असर दिखा सकती है। बदरुद्दीन अजमल की पार्टी कांग्रेस और BJP दोनों के लिए चुनौती बनी हुई है। आगामी चुनाव असम की राजनीतिक तस्वीर बदल सकते हैं, और यह देखना होगा कि कांग्रेस अपने खोए हुए वोट बैंक को पुनः प्राप्त कर पाती है या AIUDF और AIMIM के गठबंधन से नई राजनीतिक धारा बनती है।

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