Assam Politics: कांग्रेस की असम इकाई के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। यह जानकारी कांग्रेस के असम प्रभारी जितेंद्र सिंह ने 16 फरवरी को दी। भूपेन बोरा के इस्तीफा देने के बाद कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें उनके आवास पर जाकर मनाया और उन्हें इस्तीफा वापस लेने के लिए राजी किया।
इस्तीफे के बाद नेताओं की पहल
भूपेन बोरा के इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, जिनमें असम इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई भी शामिल थे, उन्होंने बोरा से उनके आवास पर मुलाकात की। बोरा ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कांग्रेस आलाकमान से समय मांगा था। गौरव गोगोई ने बताया कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी भूपेन बोरा से बात की। उनका इस्तीफा पार्टी आलाकमान ने स्वीकार नहीं किया है। गोगोई ने कहा, “अगर पार्टी में किसी कारण से भूपेन बोरा को ठेस पहुंची है तो हम उनसे माफी मांगते हैं।”
पार्टी ने की अपील
कांग्रेस के असम प्रभारी जितेंद्र सिंह ने कहा कि भूपेन बोरा पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और कभी-कभी परिवार या संगठन में मतभेद होना सामान्य है। उन्होंने कहा, “भूपेन बोरा ने अपनी युवा पीढ़ी में कांग्रेस के लिए असम में लंबे समय तक संघर्ष किया है। हमने उनसे आग्रह किया कि वे अपना इस्तीफा वापस लें।”
सिंह ने आगे बताया कि भूपेन बोरा ने अपना इस्तीफा राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजा था, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष ने इसे स्वीकार नहीं किया। राहुल गांधी समेत पार्टी नेतृत्व ने लंबी बातचीत के बाद इसे सुलझा लिया। सिंह ने कहा कि बोरा पिछले 30 साल से कांग्रेस में हैं और उनका योगदान बहुत महत्वपूर्ण है।
इस्तीफे के पीछे कारण
भूपेन बोरा ने 16 फरवरी को असम कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा। बोरा ने अपने त्यागपत्र में दावा किया कि उन्हें पार्टी नेतृत्व द्वारा उपेक्षित किया जा रहा है और राज्य इकाई में उनका उचित योगदान नहीं माना जा रहा। भूपेन बोरा असम कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष 2021 से 2025 तक रहे और उन्हें दो बार विधायक का अनुभव भी है। इस्तीफा देने के समय उन्होंने पार्टी के भविष्य और संगठन के हित को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया। बोरा ने बताया कि यह कोई व्यक्तिगत निर्णय नहीं है।
इस्तीफे और राजनीतिक परिदृश्य
भूपेन बोरा का इस्तीफा ऐसे समय पर आया जब कांग्रेस विपक्षी दलों के साथ गठबंधन बनाने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने ANI को बताया कि कई दलों ने उन्हें पार्टी छोड़कर जाने के लिए बुलाया था, लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें मनाया और पार्टी में बनाए रखने का भरोसा दिया। बोरा के इस यू-टर्न से कांग्रेस असम इकाई को निश्चित रूप से राहत मिली है। पार्टी अब विधानसभा चुनाव से पहले एकजुट होकर रणनीति बनाने में सक्षम होगी।









