Assam Congress Crisis: असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा के एक हालिया बयान ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। बोरा ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी के साथ हुई अपनी बातचीत का एक बेहद निजी और भावुक हिस्सा साझा किया है। उन्होंने बताया, “जब मैंने राहुल गांधी से कहा कि सर, मुझे बहुत अपमान महसूस हो रहा है, तो उन्होंने जवाब दिया कि उन्हें भी अपने जीवन में बहुत अपमान सहना पड़ रहा है।”
बोरा ने आगे कहा कि राहुल गांधी की बात सुनकर उन्हें लगा कि उनके व्यक्तिगत अपमान का शायद कोई बड़ा महत्व नहीं है, लेकिन साथ ही उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए यह भी स्वीकार किया कि अब उनमें और अधिक सहन करने की क्षमता नहीं बची है। यह बयान पार्टी के भीतर चल रहे आंतरिक कलह और नेताओं के बीच बढ़ते मानसिक दबाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
प्रियंका गांधी का असम दौरा और गठबंधन की अधूरी कहानी
भूपेन बोरा ने असम में विपक्षी गठबंधन की संभावनाओं और उसके विफल होने के पीछे की इनसाइड स्टोरी भी उजागर की है। उन्होंने प्रियंका गांधी के असम कार्यक्रम का जिक्र करते हुए बताया कि 9 तारीख को एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। इस बैठक का मुख्य एजेंडा यह था कि असम में जल्द से जल्द एक मजबूत गठबंधन सरकार बनाई जाए। योजना यह तैयार की गई थी कि जैसे ही प्रियंका गांधी असम पहुंचेंगी, सभी विपक्षी दलों के नेता एक साथ आकर हाथ उठाकर एकजुटता दिखाएंगे और गठबंधन का औपचारिक ऐलान कर देंगे। बोराह इस ऐतिहासिक अवसर का हिस्सा बनकर बेहद खुश थे और उन्हें उम्मीद थी कि राज्य में सत्ता परिवर्तन की नींव रखी जाएगी।
गौरव गोगोई पर तीखा हमला: मुख्यमंत्री बनने की चाहत ने तोड़ा गठबंधन?
गठबंधन टूटने के पीछे भूपेन बोरा ने सीधे तौर पर सांसद गौरव गोगोई को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने एक बड़ा राजनीतिक बम फोड़ते हुए कहा कि गौरव गोगोई ने गठबंधन इसलिए तोड़ा क्योंकि उन्हें डर था कि अगर गठबंधन की सरकार बनी, तो वे मुख्यमंत्री नहीं बन पाएंगे। बोराह के अनुसार, गोगोई को इस बात का डर सता रहा था कि गठबंधन के सहयोगियों के साथ मिलकर सरकार चलाने से उनकी व्यक्तिगत शक्ति कम हो जाएगी और उनका राजनीतिक अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। यह आरोप न केवल गंभीर है, बल्कि यह भी बताता है कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और पद की लड़ाई कितनी गहरी हो चुकी है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का अपमान: पार्टी के स्तंभों की अनदेखी
भूपेन बोरा ने पार्टी के उन वरिष्ठ नेताओं की स्थिति पर भी चिंता जताई है जो दशकों से असम कांग्रेस के स्तंभ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के भीतर कई अनुभवी और समर्पित नेताओं को बार-बार अपमानित होना पड़ा है। अपमान का यह सिलसिला अब उस स्तर पर पहुंच गया है जहाँ पार्टी का ढांचा कमजोर होने लगा है। बोराह ने संकेत दिया कि वे अब उन बचे हुए नेताओं और सहयोगियों को एकजुट करने की कोशिश करेंगे जो पार्टी की वर्तमान कार्यप्रणाली से असंतुष्ट हैं। उनका यह रुख साफ करता है कि वे अब पार्टी के भीतर एक नई रणनीति के तहत काम करने के मूड में हैं।
गठबंधन का भविष्य: “अब भी होगा असम में विपक्षी मेल”
तमाम विवादों और गौरव गोगोई के साथ खींचतान के बावजूद, भूपेन बोरा अब भी असम में गठबंधन की संभावनाओं को लेकर आशान्वित हैं। उन्होंने दृढ़ता के साथ कहा कि गठबंधन अब भी होगा और इसे कोई नहीं रोक सकता। उनके अनुसार, असम की जनता भाजपा के विकल्प के रूप में एक एकजुट विपक्ष को देखना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को दरकिनार कर अगर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को साथ लाया जाए, तो राज्य में एक बार फिर गठबंधन की सरकार बन सकती है। बोराह का यह बयान आने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर असम की राजनीति में एक नए ध्रुवीकरण की शुरुआत माना जा रहा है।









