Assam CM Miya Controversy: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शनिवार को कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी को राज्य के मूल निवासियों के हितों से अधिक अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की चिंता है। गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेतृत्व, जिसमें गौरव गोगोई और राहुल गांधी शामिल हैं, उनके रुख को कमजोर नहीं कर पाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, असम इस समय बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहा है और यह स्थिति राज्य में रहने वाले लोगों के अस्तित्व से जुड़ी हुई है।
असम की जनसांख्यिकी को लेकर चिंता
सरमा ने कहा कि असम में अवैध प्रवास के कारण जनसांख्यिकीय संतुलन बिगड़ रहा है। उनका तर्क था कि यह बदलाव निचले असम के रणनीतिक रूप से अहम जिलों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने इसे केवल राजनीतिक बहस नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़ा विषय बताया।
‘मिया मुसलमान’ शब्द पर सफाई
‘मिया मुसलमान’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर उठे विवाद पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह शब्द उन्होंने नहीं गढ़ा है। उनके अनुसार, यह शब्द स्वयं वही समुदाय उपयोग करता है, जो बांग्लादेश से आकर असम में बस गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कुछ दस्तावेजों में भी इस शब्द का उल्लेख हुआ है, इसलिए इसे उनके बयान से जोड़कर देखना गलत है।
सोशल मीडिया पोस्ट और भू-रणनीतिक चेतावनी
मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा कि अवैध प्रवासियों की बढ़ती संख्या असम को भारत से अलग-थलग करने की साजिश का हिस्सा हो सकती है। उन्होंने चेताया कि निचले असम के मुस्लिम-बहुल बनने से भविष्य में बांग्लादेश के साथ विलय जैसी मांगें उठ सकती हैं, जिससे पूरे उत्तर-पूर्वी क्षेत्र का संपर्क शेष भारत से कट सकता है।
सांप्रदायिकता के आरोपों पर जवाब
सरमा ने कहा कि इन चिंताओं को सामने रखना न तो सांप्रदायिकता है और न ही नफरत फैलाना। उनके मुताबिक, यह मुद्दा असम के प्राकृतिक संसाधनों, जमीन और रोजगार की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह के विषयों पर खुलकर चर्चा जरूरी है।
गौरव गोगोई का पलटवार
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री के बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरमा अपने तर्कों को मजबूत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं। गोगोई के अनुसार, किसी कार्यकारी रिपोर्ट की भाषा को अदालत से जोड़ना न्यायपालिका की अवमानना के समान हो सकता है।
SIR और मतदाता सूची विवाद
पूरा विवाद तब और गहराया जब मुख्यमंत्री ने 27 जनवरी को कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत 4 से 5 लाख ‘मिया’ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि ये नाम अवैध रूप से शामिल किए गए हैं और राज्य में ‘वोट चोरी’ को रोकना जरूरी है।
ड्राफ्ट रोल के आंकड़े
27 दिसंबर को जारी SIR ड्राफ्ट रोल के अनुसार, असम में कुल 2.51 करोड़ मतदाता दर्ज हैं। इनमें 4.78 लाख नाम मृत पाए गए, 5.23 लाख नाम स्थानांतरित हुए और 53,619 डुप्लीकेट प्रविष्टियां मिलीं। चुनाव अधिकारियों ने बताया कि 61 लाख से अधिक घरों का सत्यापन कर शत-प्रतिशत कवरेज हासिल किया गया है।










