Assam Assembly Election 2026 : हिमंता बिस्वा सरमा बनाम गौरव गोगोई, क्या इस बार बदलेगा इतिहास?

असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए बिगुल बज चुका है। एक तरफ मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की विकास और हिंदुत्व की लहर है, तो दूसरी तरफ गौरव गोगोई का युवा जोश। क्या जनता भाजपा को लगातार तीसरी बार चुनेगी या कांग्रेस का 'असोम सनमिलितो मोर्चा' बाजी मार ले जाएगा?

Assam Assembly Election 2026

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 16, 2026

Assam Assembly Election 2026 : निर्वाचन आयोग ने असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए बिगुल फूंक दिया है। राज्य में इस बार चुनावी प्रक्रिया को काफी संक्षिप्त रखा गया है, जिसके तहत आगामी 9 अप्रैल को केवल एक चरण में मतदान संपन्न होगा। पूरे राज्य की जनता एक साथ अपने मताधिकार का प्रयोग करेगी और 4 मई को चुनावी परिणामों के साथ यह साफ हो जाएगा कि ब्रह्मपुत्र की गोद में बसे इस राज्य की कमान किसके हाथों में होगी। तारीखों के एलान के साथ ही असम में राजनीतिक पारा चढ़ गया है और मुख्य मुकाबला सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच सिमटता नजर आ रहा है।

भाजपा की हैट्रिक की तैयारी: हिमंता का नेतृत्व और ‘डबल इंजन’ का दम

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा इस बार सत्ता की हैट्रिक लगाने के इरादे से मैदान में है। पार्टी की सबसे बड़ी ताकत उनका मजबूत संगठनात्मक ढांचा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘डबल इंजन सरकार’ वाला नैरेटिव है। भाजपा सरकार राज्य में किए गए शांति समझौतों, सड़क बुनियादी ढांचे के विकास और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को अपनी मुख्य उपलब्धि बता रही है। हिमंता बिस्वा सरमा की छवि एक कड़क और निर्णय लेने वाले नेता की रही है, जो पार्टी के लिए हिंदू मतदाताओं और चाय बागान श्रमिकों के बीच एक बड़ा प्लस पॉइंट साबित हो रही है।

कांग्रेस की उम्मीद: गौरव गोगोई का बढ़ता कद और बदलाव की लहर

विपक्षी खेमे में कांग्रेस इस बार गौरव गोगोई के चेहरे पर बड़ा दांव खेल रही है। जोरहाट लोकसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने के बाद गौरव गोगोई का कद राज्य की राजनीति में काफी बढ़ा है। पार्टी उन्हें मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में पेश कर सत्ता-विरोधी लहर (Anti-incumbency) को भुनाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस को उम्मीद है कि अल्पसंख्यक मतदाता और एनडीए सरकार से असंतुष्ट वर्ग इस बार बदलाव के लिए उन्हें वोट देगा। गौरव की युवा और बेदाग छवि को कांग्रेस अपने प्रचार का मुख्य केंद्र बनाए हुए है।

चुनौतियां और दलबदल: दोनों दलों के सामने कांटों भरी राह

जीत की दावों के बीच दोनों पार्टियों के सामने बड़ी चुनौतियां भी हैं। भाजपा को उन क्षेत्रों में नाराजगी झेलनी पड़ सकती है जहाँ विकास कार्यों की गति धीमी रही है, साथ ही उन पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। वहीं कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द ‘दलबदल’ बना हुआ है। हाल ही में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा समेत कई दिग्गज नेताओं का भाजपा में जाना पार्टी के मनोबल को कमजोर कर सकता है। जमीनी स्तर पर संगठन को एकजुट रखना और चाय बागान मजदूरों के बीच खोई हुई पैठ वापस पाना कांग्रेस के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।

असम का जनादेश: विकास बनाम परिवर्तन की अंतिम जंग

असम का यह चुनाव महज एक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राज्य की भविष्य की दिशा तय करने वाला मोड़ है। एक तरफ भाजपा अपनी विकास योजनाओं और ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे के साथ सत्ता बचाने की कोशिश में है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं को मुद्दा बनाकर वापसी की राह देख रही है। 9 अप्रैल को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि असम की जनता हिमंता बिस्वा सरमा के ‘विकास’ पर मुहर लगाती है या गौरव गोगोई के ‘परिवर्तन’ के आह्वान को स्वीकार करती है।

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