ASI रिपोर्ट ने खोला भोजशाला का राज, मंदिर के अस्तित्व के सबूत मिले कमाल मौला मस्जिद में

धार  मध्य प्रदेश के धार जिला स्थित भोजशाला परिसर में मौजूद कमाल मौला मस्जिद को लेकर बड़ी खबर है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला है कि इस मस्जिद का निर्माण प्राचीन मंदिरों के अवशेषों का उपयोग करके किया गया था. एएसआई के अनुसार यह निष्कर्ष वैज्ञानिक जांच, सर्वेक्षण, खुदाई, प्राप्त अवशेषों के अध्ययन, स्थापत्य संरचनाओं, शिलालेखों, कला और मूर्तियों के विश्लेषण के आधार पर निकाला गया है. एएसआई की यह रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में सौंपी गई थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा ढांचा सदियों बाद बनाया

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Published On :

फ़रवरी 24, 2026

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धार 

मध्य प्रदेश के धार जिला स्थित भोजशाला परिसर में मौजूद कमाल मौला मस्जिद को लेकर बड़ी खबर है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला है कि इस मस्जिद का निर्माण प्राचीन मंदिरों के अवशेषों का उपयोग करके किया गया था. एएसआई के अनुसार यह निष्कर्ष वैज्ञानिक जांच, सर्वेक्षण, खुदाई, प्राप्त अवशेषों के अध्ययन, स्थापत्य संरचनाओं, शिलालेखों, कला और मूर्तियों के विश्लेषण के आधार पर निकाला गया है.

एएसआई की यह रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में सौंपी गई थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा ढांचा सदियों बाद बनाया गया, जिसमें समरूपता, डिजाइन और स्थापत्य संतुलन का विशेष ध्यान नहीं रखा गया. सोमवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने निर्देश दिया कि एएसआई की रिपोर्ट सभी पक्षों को उपलब्ध कराई जाए. साथ ही, सभी पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपनी आपत्तियां, सुझाव और राय दाखिल करने को कहा गया है. मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी.

ASI की रिपोर्ट में क्या-क्या?

करीब 2,000 पन्नों की यह रिपोर्ट 10 खंडों में तैयार की गई है, जिसका नेतृत्व एएसआई के अतिरिक्त महानिदेशक आलोक त्रिपाठी ने किया. 98 दिनों तक चले सर्वेक्षण में आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग किया गया. खुदाई के दौरान कुल 94 मूर्तियां और उनके अवशेष मिले, जिनमें से कई को क्षतिग्रस्त किया गया था. इनमें गणेश, ब्रह्मा, नरसिंह, भैरव सहित कई देवी-देवताओं, मानव और पशु आकृतियों की नक्काशी पाई गई. एएसआई ने संकेत दिया है कि यह स्थल संभवतः देवी सरस्वती को समर्पित एक प्राचीन मंदिर रहा होगा.

ASI के मुताबिक, यह स्थल देवी सरस्वती को समर्पित एक प्राचीन मंदिर रहा होगा.
‘हिंदू समाज के लिए उत्साहजनक यह रिपोर्ट’

 रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के प्रदेश उपाध्यक्ष आशीष गोयल ने कहा कि एएसआई का सर्वे स्पष्ट रूप से बताता है कि यह संपूर्ण संरचना परमार वंश काल की है और इसका निर्माण राजा भोज और उनके पूर्वजों द्वारा कराया गया था. उन्होंने दावा किया कि यह ढांचा लगभग 950 से 1,000 वर्ष पुराना है और यह रिपोर्ट हिंदू समाज के लिए उत्साहजनक है.

एक अन्य याचिकाकर्ता भोज उत्सव समिति के संयोजक अशोक जैन ने कहा कि उनकी मांग शुरू से स्पष्ट रही है. यदि यह स्थल मस्जिद है तो उसे मुस्लिम पक्ष को दिया जाए और यदि यह मंदिर है तो हिंदू पक्ष को. उन्होंने बताया कि रिपोर्ट से यह साबित होता है कि बाद में बने ढांचों में पुराने भोजशाला मंदिर के अवशेषों को तोड़कर इस्तेमाल किया गया.

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