Ashok Gehlot News: PM मोदी के संबोधन पर बरसे गहलोत “ये महिला आरक्षण नहीं, सत्ता हथियाने का गुप्त एजेंडा है”

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को लोकतंत्र के खिलाफ एक गहरी साजिश करार दिया है। गहलोत ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी चीन और रूस की तर्ज पर भारत में स्थायी सत्ता चाहते हैं। उन्होंने महिला आरक्षण का श्रेय राजीव गांधी को देते हुए भाजपा पर चुनावी लाभ के लिए संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाया।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 19, 2026

Ashok Gehlot News: कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन की कड़ी निंदा की है। अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने संवैधानिक गरिमा को दरकिनार कर राष्ट्र के संबोधन का इस्तेमाल विपक्षी दलों की आलोचना के लिए किया। उन्होंने इसे एक विशाल राजनीतिक षड्यंत्र और लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन बताते हुए कहा कि कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों ने समय रहते इस साजिश का पर्दाफाश कर देश को बचा लिया है।

PM मोदी की रूस और चीन के शासकों से की तुलना

बताते चले कि, अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री मोदी की तुलना रूस और चीन के शासकों से करते हुए कहा कि भाजपा नेतृत्व का असली इरादा लोकतंत्र को खत्म कर स्थायी रूप से सत्ता पर काबिज होना है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज देश में चुनाव आयोग और न्यायपालिका जैसी संस्थाएं दबाव में हैं और सभी जांच एजेंसियां सरकार के इशारे पर काम कर रही हैं। गहलोत के अनुसार, ‘कांग्रेस-मुक्त’ और ‘विपक्ष-मुक्त’ भारत का सपना देखने वाले मोदी अपनी साजिश में इसलिए नाकाम रहे क्योंकि देश का विपक्ष मजबूती से खड़ा है।

राजीव गांधी का महिला सशक्तिकरण विजन

महिला आरक्षण के मुद्दे पर स्पष्टीकरण देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को राजनीति में लाने का असली प्लान पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और सोनिया गांधी का था। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज पंचायतों में जो लाखों महिलाएं नेतृत्व कर रही हैं, वह कांग्रेस की नीतियों का ही परिणाम है। गहलोत ने कहा, “यह हमारा एजेंडा था, इसीलिए हमने 2023 में संसद में इसका साथ दिया था।” उन्होंने भाजपा पर ‘क्रेडिट’ चुराने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह योजना यूपीए काल से ही पाइपलाइन में थी, जिसे भाजपा अब अपना बताकर पेश कर रही है।

अशोक गहलोत ने उठए सवाल

अशोक गहलोत ने सवाल उठाया कि अगर प्रधानमंत्री की नीयत साफ थी, तो उन्होंने सर्वदलीय बैठक और दक्षिणी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ संवाद क्यों नहीं किया? उन्होंने 16-18 अप्रैल के बीच बुलाए गए विशेष सत्र की टाइमिंग पर भी आपत्ति जताई। गहलोत के मुताबिक, चुनाव के बीच सत्र बुलाना केवल बंगाल चुनाव जीतने के लिए एक सोची-समझी चुनावी रणनीति और राजनीतिक स्टंट था। उन्हें पहले से पता था कि चुनाव के कारण विधेयक पारित नहीं होगा, फिर भी उन्होंने देश को गुमराह करने के लिए यह स्वांग रचा।

PM मोदी और अमित शाह पर साधा निशाना

अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि उनका एकमात्र एजेंडा चुनाव जीतना और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकारों को गिराना है। उन्होंने भ्रष्टाचार और खरीद-फरोख्त की राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा केवल सत्ता के केंद्रीकरण में विश्वास रखती है। गहलोत ने स्पष्ट किया कि विपक्ष की एकता ने उस बड़े ‘खेल’ को बिगाड़ दिया है जो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को स्थायी रूप से बदलने के लिए खेला जा रहा था।