Asansol News: पश्चिम बंगाल के आसनसोल में पुलिस चौकी पर हुए हिंसक हमले के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले तत्वों के खिलाफ राज्य सरकार ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 15 उपद्रवियों को हिरासत में ले लिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई के संकेत दिए हैं जो भविष्य के लिए एक नजीर बनेगी।
उपद्रवियों से होगी नुकसान की वसूली
बताते चले कि, आसनसोल नॉर्थ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली पुलिस चौकी पर बीती रात हुई हिंसक झड़प के बाद पुलिस प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साफ किया कि कानून हाथ में लेने वालों के साथ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। उन्होंने कहा: “पुलिसकर्मियों पर हमला करने वाले और कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले तत्वों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। आरोपियों के खिलाफ न केवल सख्त कानूनी धाराओं में मुकदमा चलाया जाएगा, बल्कि हिंसा के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को जो भी नुकसान पहुंचा है, उसकी पाई-पाई की भरपाई भी इन्हीं दंगाइयों और उपद्रवियों से कराई जाएगी।”
रेलपार के कसाई मोहल्ला में तनाव के बाद भारी बवाल
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, इस पूरे विवाद की शुरुआत शुक्रवार रात को हुई, जब आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट की टीम रेलपार इलाके में ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण अभियान चला रही थी। प्रशासन की टीम उच्च न्यायालय के आदेशानुसार लाउडस्पीकर की आवाज को निर्धारित सीमा में रखने के लिए स्थानीय लोगों और धार्मिक स्थलों को जागरूक कर रही थी।
शुरुआत में शांतिपूर्ण दिख रहा यह अभियान शाम होते-होते अचानक हिंसक विरोध में बदल गया। कसाई मोहल्ला इलाके में लाउडस्पीकर की आवाज कम कराने को लेकर कुछ लोग पुलिस दल से उलझ गए। देखते ही देखते अफवाहों के बाजार ने जोर पकड़ा और कसाई मोहल्ला पुलिस चौकी के बाहर सैकड़ों की संख्या में उग्र भीड़ जमा हो गई। भीड़ ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चौकी को घेर लिया।
पथराव, वाहनों में तोड़फोड़ और सुरक्षा बलों का एक्शन
पुलिस चौकी के बाहर जमा हुई अनियंत्रित भीड़ ने अचानक हिंसक रूप अख्तियार कर लिया और पुलिसकर्मियों पर पथराव शुरू कर दिया। इस पथराव में ड्यूटी पर तैनात कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। उपद्रवियों ने चौकी परिसर और बाहर खड़ी सरकारी गाड़ियों, वज्र वाहनों और कई मोटरसाइकिलों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया और उनमें तोड़फोड़ की।
हालात को हाथ से निकलता देख जिला प्रशासन ने तुरंत अतिरिक्त बल मंगवाया। अनियंत्रित दंगाइयों को खदेड़ने के लिए पुलिस को मजबूरन लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले दागने पड़े। इलाके में शांति बहाली और दोबारा हिंसा भड़कने से रोकने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और भारी तादाद में सशस्त्र पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है। फिलहाल पूरे क्षेत्र में फ्लैग मार्च जारी है और स्थिति नियंत्रण में है।
अग्निमित्रा पॉल का कड़ा संदेश
इस संवेदनशील घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल सरकार की कैबिनेट मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कानून के शासन को सर्वोपरि बताते हुए कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों के दायरे से बाहर जाकर किसी को भी काम करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। अग्निमित्रा पॉल ने अपने बयान में कहा, “देश का संविधान और कानून सर्वोपरि है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) के नियम और धाराएं सभी धर्मों के लोगों पर समान रूप से लागू होती हैं, इसमें किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा। नियम तो सबको मानना ही पड़ेगा।”
इससे पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी लाउडस्पीकर विवाद पर नीति साफ करते हुए कहा था कि राज्य में ध्वनि प्रदूषण के नियमों का पालन कड़ाई से कराया जाएगा। चाहे मंदिर हो, मस्जिद हो या गुरुद्वारा— निर्धारित डेसिबल से अधिक तेज आवाज में और बिना अनुमति के लाउडस्पीकर बजाने की इजाजत किसी भी धार्मिक स्थल को नहीं दी जा सकती।










