Asaduddin Owaisi : देश की विपक्षी राजनीति में इन दिनों उथल-पुथल का दौर जारी है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बाद अब महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के भीतर भी बड़ी टूट देखने को मिली है। चर्चा है कि शिवसेना (UBT) के नौ में से छह सांसदों ने एक अलग गुट बना लिया है और वे भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर सरकार चला रहे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट में विलय के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंप चुके हैं। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने विपक्षी दलों के समीकरणों को हिलाकर रख दिया है, जहाँ एक के बाद एक पार्टियाँ अपने ही नेताओं की बगावत का सामना कर रही हैं।
असदुद्दीन ओवैसी का तीखा प्रहार: ‘शिकारी नया है, जाल पुराना है’
इस बगावत के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कटाक्ष करते हुए कहा है कि “शिकारी नया है, लेकिन जाल पुराना है।” ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि आखिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में नेताओं का शामिल होना इतना सरल कैसे हो गया है? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विपक्षी दलों के नेता आखिर क्यों भाग रहे हैं और अपनी विफलताओं का ठीकरा किसी एक नेता पर फोड़ना सही नहीं है। उन्होंने कुरान की आयतों का हवाला देते हुए चुगलखोरों और बुराई करने वालों के लिए विनाश की बात कही और कटाक्ष किया कि जनता को वास्तविकता समझने की आवश्यकता है।
शिवसेना (UBT) में बगावत: किन सांसदों ने छोड़ा उद्धव का साथ?
शिवसेना (UBT) के जिन छह सांसदों ने अलग गुट बनाने का दावा किया है, उनमें भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल, संजय दीना पाटिल, संजय हरिभाऊ जाधव, ओमप्रकाश राजे निंबालकर और संजय देशमुख शामिल हैं। इन नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर आधिकारिक रूप से अपनी मंशा जाहिर कर दी है। यह उद्धव ठाकरे के लिए एक बहुत बड़ा राजनीतिक आघात है, क्योंकि वे पहले ही अपनी पार्टी के विभाजन से जूझ रहे हैं। सांसदों का यह दल अब एकनाथ शिंदे गुट के साथ अपने विलय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में जुटा है, जिससे लोकसभा में ठाकरे का प्रभाव काफी कम हो सकता है।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) का बिखराव: NDA की ओर कदम
इससे पहले, तृणमूल कांग्रेस के 28 में से 20 सांसदों ने पार्टी से बगावत कर एक नया गुट बनाने का ऐलान किया है। काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में इन बागी सांसदों ने त्रिपुरा की ‘नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी’ (NCPI) के साथ विलय की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) का हिस्सा बनकर काम करेंगे। इन सांसदों ने इस बड़े कदम से पहले केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ बैठक की थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष के इन दो बड़े दलों में हुई टूट आगामी लोकसभा सत्र और क्षेत्रीय राजनीति में सत्ता के नए समीकरणों को जन्म देगी।
Read More : देशभर में बदलेगा मौसम का मिजाज, 17 राज्यों में बारिश और तूफान का खतरा; आगे बढ़ा मॉनसून










