Army Tender Scam : सेना में बड़े टेंडर घोटाले का भंडाफोड़, कर्नल हिमांशु बाली 50 लाख लेते रंगेहाथ गिरफ्तार!

भारतीय सेना के भीतर चल रहे एक बहुत बड़े टेंडर रैकेट का पर्दाफाश करते हुए सीबीआई ने कर्नल हिमांशु बाली को 50 लाख रुपये की भारी-भरकम रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। कर्नल के ठिकानों पर जारी छापेमारी में जो दस्तावेज और नगदी बरामद हुई है, उसने पूरे रक्षा मंत्रालय में हड़कंप मचा दिया है!

Army Tender Scam (1)

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 20, 2026

Army Tender Scam :  केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भारतीय सेना के टेंडरों में कथित रूप से चल रहे भ्रष्टाचार, हेरफेर और रिश्वतखोरी के एक बेहद गंभीर मामले में बहुत बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने आर्मी ऑर्डनेंस कॉर्प्स (AOC) में तैनात कर्नल हिमांशु बाली को 50 लाख रुपये की भारी-भरकम रिश्वत लेने के पुख्ता आरोपों के तहत रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी कर्नल हिमांशु बाली पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित फोर्ट विलियम में ईस्टर्न कमांड मुख्यालय में तैनात थे और महत्वपूर्ण टेंडर प्रक्रियाओं की देखरेख कर रहे थे। सीबीआई ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में पहले ही एक विस्तृत प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कर ली थी, जिसमें कर्नल हिमांशु बाली समेत रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़े कई प्रभावशाली लोगों और निजी ठेकेदारों को नामजद आरोपी बनाया गया था। कर्नल की इस गिरफ्तारी से सैन्य महकमे में हड़कंप मच गया है।

अवैध फायदा पहुंचाने और बिल पास करने का आरोप

सीबीआई द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, कर्नल हिमांशु बाली पर यह गंभीर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के कानपुर की एक प्राइवेट रक्षा सप्लायर कंपनी को अवैध रूप से अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए सेना के महत्वपूर्ण टेंडरों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और हेरफेर की। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि कर्नल बाली ने वित्तीय लाभ के चक्कर में न केवल कंपनी द्वारा भेजे गए घटिया और अमानक स्तर के सामानों के सैंपलों को अपनी मंजूरी दी, बल्कि सेना के नियमों को ताक पर रखकर कंपनी के लंबे समय से लंबित पड़े और मनमाने ढंग से बढ़ाए गए बिलों को भी धड़ल्ले से पास करवाया। इन तमाम अवैध प्रशासनिक और तकनीकी कार्यों को अंजाम देने के बदले में कर्नल पर भारी मात्रा में रिश्वत वसूलने के पुख्ता सबूत मिले हैं।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत इन आरोपियों और फर्म मालिकों पर केस दर्ज

इस बड़े रक्षा घोटाले को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो ने कर्नल हिमांशु बाली के अलावा कानपुर की संबंधित प्राइवेट कंपनी (ईजीएल) के प्रमोटर अक्षत अग्रवाल, उनके पिता मयंक अग्रवाल, दिल्ली में सक्रिय उनके मुख्य सहयोगी आशुतोष शुक्ला और नरेश पाल सहित कई अन्य अज्ञात मध्यस्थों और सरकारी मुलाजिमों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। सीबीआई ने इन सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ सख्त भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की विभिन्न धाराओं और आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) रचने के तहत एफआईआर दर्ज कर अपनी जांच को आगे बढ़ाया है। एजेंसी अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि इस सिंडिकेट में सेना के कुछ और अधिकारी तो शामिल नहीं हैं।

ईजीएल कंपनी और सैन्य अधिकारियों का आपराधिक गठजोड़ 

सीबीआई की एफआईआर से हुए सनसनीखेज खुलासे के अनुसार, ईजीएल नामक यह निजी कंपनी पिछले काफी लंबे समय से देश के विभिन्न संवेदनशील रक्षा प्रतिष्ठानों और छावनियों को सैन्य साजो-सामान की आपूर्ति करने का काम कर रही थी। जांच एजेंसी का स्पष्ट आरोप है कि इस कंपनी के मुख्य संचालक टेंडर हथियाने के उद्देश्य से कर्नल हिमांशु बाली के साथ नियमित रूप से फोन और गुप्त बैठकों के जरिए संपर्क में बने हुए थे। सरकारी टेंडर हासिल करने के लिए पूरी तरह से अवैध और अनैतिक तौर-तरीके अपनाए जाते थे। कर्नल बाली ने टेंडर मूल्यांकन की पूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया, जिससे योग्य कंपनियों को बाहर कर इस चहेती कंपनी को ठेका दिया जा सके और इसके एवज में रिश्वत की मलाई खाई जा सके।

पार्क स्ट्रीट की गुप्त मीटिंग

सीबीआई की गहन जांच में यह बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि मार्च और अप्रैल 2026 के महीनों के दौरान एक बहुत बड़े और रणनीतिक रक्षा टेंडर को लेकर दोनों पक्षों के बीच लगातार बातचीत और मोलतोल चल रहा था। एफआईआर के आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, 22 अप्रैल 2026 को कर्नल हिमांशु बाली और कंपनी के मालिक अक्षत अग्रवाल के बीच कोलकाता के बेहद व्यस्त और पॉश इलाके पार्क स्ट्रीट में एक गुप्त मुलाकात हुई थी। इस रणनीतिक मीटिंग के महज दो दिन बाद, यानी 24 अप्रैल 2026 को संबंधित सैन्य टेंडर को संदिग्ध रूप से नियमों को दरकिनार करते हुए अक्षत अग्रवाल की कंपनी को सौंप दिया गया, जिसने दाल में कुछ काला होने के दावों को सच साबित कर दिया।

दिल्ली-एनसीआर में पहुंचाई जानी थी घूस की रकम

जांच एजेंसी सीबीआई के अनुसार, 16 मई 2026 को कर्नल हिमांशु बाली ने अक्षत अग्रवाल से इस अवैध सौदेबाजी के तहत तय की गई कथित रिश्वत की बाकी बची हुई मोटी रकम का भुगतान करने की पुरजोर मांग की थी। केंद्रीय एजेंसी का आरोप है कि कर्नल द्वारा इस 50 लाख रुपये की घूस की राशि को सुरक्षित रूप से दिल्ली-एनसीआर के इलाके में डिलीवर करने का कड़ा निर्देश दिया गया था। सीबीआई के खुफिया विंग को जांच में पता चला कि रिश्वत की यह बहुत बड़ी रकम वैध बैंकिंग चैनलों से बचाकर, अवैध हवाला ऑपरेटरों के माध्यम से देश की राजधानी दिल्ली के पुरानी दिल्ली स्थित चांदनी चौक इलाके से ट्रांसफर की जानी थी, लेकिन इससे पहले ही सीबीआई ने जाल बिछाकर कर्नल को दबोच लिया।

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