Anna Hazare on CJP Protest: अन्ना हजारे का बड़ा कदम! PM मोदी को पत्र, छात्रों के समर्थन में करेंगे आंदोलन

नीट (NEET) पेपर लीक मामले में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए पुलिसिया लाठीचार्ज से आहत होकर वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है।

Anna Hazare on CJP Protest

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 22, 2026

Anna Hazare on CJP Protest: देश में नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर मचा देशव्यापी बवाल अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़े छात्रों और विपक्षी दलों के आंदोलन को अब देश के वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे का भी बड़ा समर्थन मिल गया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के ‘संसद चलो मार्च’ के दौरान छात्रों पर हुए बर्बर पुलिसिया लाठीचार्ज से आहत होकर अन्ना हजारे ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। इसके साथ ही उन्होंने सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ एक नए आंदोलन का शंखनाद कर दिया है।

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प्रधानमंत्री को अन्ना हजारे की दो टूक

वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने दिल्ली में छात्रों के साथ हुए दुर्व्यवहार और लाठीचार्ज की घटना पर गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं:

गांधी स्मारक पर मौन आंदोलन: छात्रों के समर्थन में अन्ना हजारे कल सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक अहिल्यानगर (अहमदनगर) के वाडिया पार्क स्थित गांधी स्मारक पर दो घंटे का ‘मौन आंदोलन’ करेंगे। इस आंदोलन स्थल को प्रतीकात्मक रूप से ‘नगर का जंतर-मंतर’ नाम दिया गया है, जिस पर अब पूरे देश की नजरें टिक गई हैं।

दमन के बजाय समाधान का रास्ता: अन्ना हजारे ने अपने पत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि लोकतंत्र में संवाद के बजाय दमन का रास्ता अपनाना बेहद चिंताजनक है। सरकार को छात्रों को लाठियों से हांकने के बजाय उनसे मेज पर बैठकर बात करनी चाहिए और उनकी जायज समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए।

कानून-व्यवस्था नहीं, जनभावना का मुद्दा: उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले पेपर लीक, बढ़ती बेरोजगारी और सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में हो रही भारी देरी देश के नौजवानों के भविष्य को अंधकार में धकेल रही है। सरकार को छात्रों के इस शांतिपूर्ण गुस्से को कानून-व्यवस्था की समस्या मानने के बजाय ‘जनभावना’ का मुद्दा समझना चाहिए और महात्मा गांधी के सत्याग्रह के मार्ग का सम्मान करना चाहिए।

CJP का रुख कड़ा

दूसरी तरफ, दिल्ली के जंतर-मंतर पर डटे प्रदर्शनकारी और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तेवर भी सरकार के खिलाफ लगातार तीखे होते जा रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा द्वारा संगठन को दूसरी बार बातचीत के लिए आमंत्रित किए जाने पर CJP ने सख्त रुख अपनाया है:

वार्ता का प्रस्ताव ठुकराया: सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बुधवार को साफ कर दिया कि संगठन के नेताओं का समय बेहद कीमती है और वे केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मिलने उनके घर या दफ्तर तभी जाएंगे, जब सरकार उनकी मांगों को पूरा करने का लिखित आश्वासन देगी।

पिछली मुलाकात का कड़वा अनुभव: सौरव दास ने सरकार पर समय काटने का आरोप लगाते हुए कहा, “पहली मुलाकात के दौरान हमें लगभग चार घंटे तक बेवजह रोके रखा गया था, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। हमने अब स्पष्ट संदेश भेज दिया है कि यदि आप हमारी चार प्रमुख शर्तें (जिसमें शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और पीड़ित परिवारों को ₹1 करोड़ मुआवजा शामिल है) मानने को तैयार हैं, तभी हमें अगली बातचीत के लिए बुलाएं।”

अन्ना हजारे के इस आंदोलन में कूदने और छात्र संगठनों के अड़ियल रुख के बाद अब यह पूरा विवाद केंद्र सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती बनता जा रहा है।

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