Bharat Tiwari Encounter: भरत तिवारी एनकाउंटर पर अनिरुद्धाचार्य का बयान, पुलिस प्रशासन और सरकार की कार्यशैली पर सवालिया निशान

मथुरा के प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने बिहार के भरत तिवारी एनकाउंटर पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को 'पापी राजा' का रवैया करार दिया है। अनिरुद्धाचार्य ने सवाल उठाया है कि जब सिस्टम जनता की नहीं सुनता, तब मजबूरन लोग बंदूक उठाते हैं। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

Bharat Tiwari Encounter

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 23, 2026

Bharat Tiwari Encounter: मथुरा के प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक धार्मिक कथा के दौरान उन्होंने पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार के रवैये की कड़ी आलोचना की। अनिरुद्धाचार्य ने साफ शब्दों में कहा कि जब प्रशासनिक तंत्र आम जनता की सुनवाई बंद कर देता है, तो मजबूरन किसी न किसी को अपने हक के लिए खड़ा होना ही पड़ता है। उन्होंने सरकार के एनकाउंटर आधारित मॉडल पर सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह अनुचित बताया।

व्यवस्था की विफलता

कथावाचक ने इस पूरे घटनाक्रम को व्यवस्था की विफलता से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि “जब सरकारें और अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहते हैं, तो आम आदमी हताश हो जाता है।” अनिरुद्धाचार्य के अनुसार, भरत तिवारी ने जब सिस्टम से अपनी बात मनवाने की कोशिश की और उन्हें कहीं से मदद नहीं मिली, तब उन्होंने रास्ता भटककर बंदूक उठाई। उन्होंने दावा किया कि भरत का उद्देश्य किसी की हत्या करना नहीं था, लेकिन पुलिस ने उसे मार गिराया, जो कि पूरी तरह से गलत और अमानवीय है।

प्रशासन के लिए चेतावनी

अनिरुद्धाचार्य ने इस एनकाउंटर को “निर्दोष की हत्या” करार देते हुए इसे एक राजा के लिए ‘महापाप’ बताया है। उन्होंने कहा कि एक राजा का कर्तव्य अपनी प्रजा की रक्षा करना है, न कि उनका अंत करना। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि सरकारें इसी तरह जनता को मारना शुरू कर देंगी, तो आने वाले समय में उन्हें ‘पापी राजा’ के रूप में याद किया जाएगा। उनका मानना है कि पुलिस का यह एक्शन न केवल संवैधानिक मानदंडों का उल्लंघन है, बल्कि नैतिक रूप से भी पूरी तरह पतन है।

सिस्टम को ‘बहरा’ करार दिया

कथा के माध्यम से उन्होंने ‘शरण में आए हुए’ व्यक्ति को न मारने के धार्मिक सिद्धांत को दोहराया। अनिरुद्धाचार्य ने स्पष्ट किया कि यदि कोई बड़ा अपराधी या आतंकवादी होता तो पुलिस की कार्रवाई समझ में आती, लेकिन जो व्यक्ति अपने गांव और समाज के हक के लिए खड़ा हुआ, उसे सिस्टम ने कुचल दिया। उन्होंने सिस्टम को ‘बहरा’ करार देते हुए कहा कि जो लोग समाज की भलाई के लिए खड़े होते हैं, पुलिस उन्हें ही अपना निशाना बना लेती है।

पुलिस बल को संस्कारों का पाठ पढ़ाने की सलाह दी

अंत में, अनिरुद्धाचार्य ने नेताओं और पुलिस बल को संस्कारों का पाठ पढ़ाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सत्ता हासिल करने के बाद नेताओं का अपनी ही जनता को मरवाना शर्मनाक है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि काश पुलिस और प्रशासन को केवल किताबी शिक्षा ही नहीं, बल्कि ‘रामचरितमानस’ जैसे ग्रंथों से मानवीय संवेदनाओं और संस्कारों का ज्ञान भी दिया गया होता। उन्होंने जोर देकर कहा कि एनकाउंटर से समस्याओं का समाधान नहीं होगा, क्योंकि आज एक को मारोगे तो कल दूसरा खड़ा होगा।