Anil Ambani SC: अनिल अंबानी ने सुप्रीम कोर्ट में दिया हलफनामा, नहीं छोड़ेंगे देश, जांच में करेंगे सहयोग

40,000 करोड़ रुपये के बैंक लोन फ्रॉड मामले में घिरे अनिल अंबानी ने सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण हलफनामा दाखिल किया है। अंबानी ने स्पष्ट किया कि वह जुलाई 2025 से भारत में ही हैं और बिना कोर्ट की अनुमति के देश नहीं छोड़ेंगे। 26 फरवरी को वह ईडी के सामने भी पेश होंगे।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 19, 2026

Anil Ambani SC: रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) के चेयरमैन अनिल अंबानी ने गुरुवार, 19 फरवरी को देश की सर्वोच्च अदालत में एक महत्वपूर्ण हलफनामा दाखिल किया है। इस कानूनी दस्तावेज में अंबानी ने औपचारिक रूप से वचन दिया है कि वे अदालत की पूर्व अनुमति के बिना भारत छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब उनके व्यापारिक समूह पर 40,000 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं और देश की शीर्ष जांच एजेंसियां इस मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। अंबानी ने अदालत को यह भी भरोसा दिलाया है कि वे प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच में हर संभव सहयोग करेंगे।

मुकुल रोहतगी के मौखिक वादे पर लगी कानूनी मुहर

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हलफनामा उस मौखिक आश्वासन की पुष्टि है जो 4 फरवरी को अंबानी के वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत को दिया था। उस समय रोहतगी ने पीठ को मौखिक रूप से आश्वस्त किया था कि उनके मुवक्किल देश से बाहर नहीं जाएंगे। अब लिखित हलफनामा दाखिल होने के बाद, यह एक कानूनी रूप से बाध्यकारी ‘अंडरटेकिंग’ बन गई है। इससे पहले अदालतों ने कई बड़े आर्थिक अपराधियों के देश छोड़कर भागने की घटनाओं को देखते हुए इस मामले में कड़ा रुख अपनाया था।

क्या है 40,000 करोड़ रुपए का बैंक धोखाधड़ी मामला?

यह पूरी कानूनी कार्यवाही पूर्व नौकरशाह ईएएस सरमा द्वारा दायर एक जनहित याचिका के आधार पर शुरू हुई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अनिल अंबानी की ADAG ग्रुप की कंपनियों ने विभिन्न बैंकों के साथ मिलीभगत कर 40,000 करोड़ रुपए से अधिक का ऋण घोटाला किया है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में होनी चाहिए। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वे न केवल कंपनियों की भूमिका, बल्कि बैंक अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की भी त्वरित जांच करें।

जांच में बड़ा खुलासा: रिलायंस की कंपनियों में हुआ फंड डायवर्जन

ईडी की अब तक की जांच में यह सामने आया है कि रिलायंस होम फाइनेंस (RHFL) और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस (RCFL) के फंड्स का दुरुपयोग किया गया था। जांच के अनुसार, 2017 से 2019 के बीच यस बैंक ने इन कंपनियों में लगभग 5,000 करोड़ रुपए का निवेश किया था, जो दिसंबर 2019 तक आते-आते एनपीए (NPA) बन गया। ईडी का दावा है कि इस निवेश का एक बड़ा हिस्सा रिलायंस ग्रुप की अन्य सहायक कंपनियों में डायवर्ट कर दिया गया था। यस बैंक को इस पूरी प्रक्रिया में 2,700 करोड़ रुपए से अधिक का प्रत्यक्ष नुकसान हुआ है।

लोन प्रक्रिया में गंभीर खामियां और ‘इंटेंशनल कंट्रोल फेल्योर’

जांच एजेंसियों को लोन अप्रूवल प्रक्रिया में चौंकाने वाली गड़बड़ियां मिली हैं। ईडी के अनुसार, कई मामलों में ऋण के लिए आवेदन, उसकी मंजूरी और वितरण (Disbursement) एक ही दिन के भीतर कर दिया गया। इसके अलावा, अनिवार्य फील्ड चेक और क्रेडिट मीटिंग्स को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया। कई महत्वपूर्ण दस्तावेज खाली या बिना तारीख के पाए गए हैं। ईडी ने इसे ‘जानबूझकर किया गया नियंत्रण विफलता’ (Intentional Control Failure) करार दिया है। वर्तमान में यह जांच प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत चल रही है और संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है।

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