AP Population Policy: आंध्र प्रदेश की नई जनसंख्या नीति, दो नहीं अब तीन बच्चों पर ज़ोर, मिलेगी भारी आर्थिक मदद

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने विधानसभा में 'जनसंख्या प्रबंधन नीति' पेश कर सबको हैरान कर दिया है। राज्य की प्रजनन दर 1.5 तक गिरने से डरी सरकार अब तीसरा बच्चा पैदा करने पर ₹25,000 की नकद मदद, 18 साल तक मुफ्त शिक्षा और माता-पिता को विशेष छुट्टियां दे रही है।

AP Population Policy

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 6, 2026

AP Population Policy: आंध्र प्रदेश की चंद्रबाबू नायडू सरकार ने दशकों से चली आ रही ‘हम दो, हमारे दो’ की नीति को पूरी तरह पलटने का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री का मानना है कि अब समय आ गया है जब परिवार नियोजन के पुराने पैमानों को छोड़कर भविष्य की जरूरतों पर ध्यान दिया जाए। जहाँ एक ओर देश के कई हिस्सों में बढ़ती आबादी चिंता का विषय है, वहीं आंध्र प्रदेश सरकार का तर्क है कि राज्य की डेमोग्राफी को संतुलित रखने के लिए परिवारों में कम से कम तीन बच्चों का होना आवश्यक है। यह कदम केवल एक सुझाव नहीं है, बल्कि इसे एक व्यापक सरकारी नीति के रूप में लागू करने की तैयारी की जा रही है, जो पूरे देश के लिए एक नई बहस का केंद्र बन गई है।

तीसरे बच्चे पर भारी प्रोत्साहन और 25,000 रुपये की नकद सहायता

प्रस्तावित नई जनसंख्या नीति के तहत, आंध्र प्रदेश सरकार उन दंपत्तियों को विशेष प्रोत्साहन देने जा रही है जो तीसरे बच्चे का विकल्प चुनते हैं। इस नीति का सबसे आकर्षक हिस्सा वित्तीय सहायता है। सरकार ने योजना बनाई है कि तीसरे बच्चे के जन्म के समय माता-पिता को 25,000 रुपये की एकमुश्त राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री नायडू का कहना है कि यह राशि जन्म के समय होने वाले खर्चों और परिवार की शुरुआती मदद के लिए एक ‘गेम-चेंजर’ साबित होगी। इस नकद प्रोत्साहन का उद्देश्य परिवारों को बिना किसी आर्थिक बोझ के जनसंख्या वृद्धि में योगदान देने के लिए प्रेरित करना है।

शिक्षा और स्वास्थ्य: सरकार उठाएगी 18 साल तक का खर्च

केवल नकद राशि ही नहीं, बल्कि सरकार ने तीसरे बच्चे के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भी पुख्ता योजना तैयार की है। नए ड्राफ्ट के अनुसार, तीसरे बच्चे की 18 वर्ष की आयु तक की पढ़ाई का पूरा खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, जिन परिवारों में तीन बच्चे होंगे, उन माता-पिता को विशेष अवकाश (Special Leave) की सुविधा भी दी जाएगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी रियायतें दी गई हैं; जो दंपत्ति गर्भधारण में समस्या महसूस कर रहे हैं, उन्हें IVF और अन्य चिकित्सा सहायता रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि पालन-पोषण की जिम्मेदारी सरकार और परिवार मिलकर उठाएं।

गिरती जन्म दर और दक्षिण भारत की जनसांख्यिकीय चुनौती

इस नीति के पीछे का मुख्य कारण राज्य की गिरती हुई प्रजनन दर (Total Fertility Rate) है। भारत में जनसंख्या स्थिरता के लिए आदर्श दर 2.1 मानी जाती है, जबकि आंध्र प्रदेश में यह गिरकर 1.5 पर पहुँच गई है। यह राष्ट्रीय औसत 2.11 से काफी नीचे है। दशकों तक चले प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों के कारण दक्षिण भारतीय राज्यों ने अपनी आबादी को तेज़ी से नियंत्रित किया, लेकिन अब इसका नकारात्मक पक्ष सामने आ रहा है। कम जन्म दर का अर्थ है भविष्य में युवाओं की कमी और बुजुर्गों की बढ़ती संख्या, जिससे आने वाले समय में कार्यबल (Labor Force) पर गहरा संकट मंडरा सकता है।

वैश्विक संकट से सीख: जापान और कोरिया जैसे हालात से बचने की कोशिश

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इस निर्णय के लिए जापान और दक्षिण कोरिया जैसे विकसित देशों के उदाहरण दिए हैं। इन देशों ने अतीत में सख्त जनसंख्या नियंत्रण किया था, जिसका परिणाम यह हुआ कि आज वहां युवाओं की भारी कमी है और अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ गई है। नायडू का मानना है कि यदि आंध्र प्रदेश ने अभी अपनी जन्म दर में सुधार नहीं किया, तो राज्य भी ‘एजिंग पॉपुलेशन’ (बूढ़ी होती आबादी) के जाल में फंस जाएगा। अप्रैल से लागू होने वाली यह नीति राज्य की आर्थिक मजबूती और युवा ऊर्जा को बनाए रखने की एक दूरगामी रणनीति है।

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