Mission Punjab 2027: ड्रग्स के खिलाफ अमित शाह खोलेंगे मोर्चा, AAP सरकार को घेरने की बड़ी तैयारी

भाजपा ने 'मिशन पंजाब' के तहत राज्य में अपनी पैठ मजबूत करने की रणनीति तैयार की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मई से हर महीने पंजाब का दौरा करेंगे। इस अभियान का मुख्य केंद्र ड्रग्स के खिलाफ जन-जागरूकता फैलाना और सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को सीमा सुरक्षा और नशे के मुद्दे पर घेरना है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 30, 2026

Mission Punjab 2027: पांच राज्यों के चुनावों के संपन्न होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अब अपनी पूरी ताकत पंजाब की सियासी जमीन को फतह करने में झोंक दी है। पार्टी ने इसे ‘मिशन पंजाब’ का नाम दिया है, जिसकी कमान खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संभाली है। इस रणनीति के तहत अमित शाह अब हर महीने पंजाब का दौरा करेंगे, ताकि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी की स्थिति को अभेद्य बनाया जा सके।

नशामुक्त पंजाब का संकल्प

बताते चले कि, अमित शाह का यह विशेष मिशन मई महीने से औपचारिक रूप से शुरू होने जा रहा है। इस अभियान का मुख्य केंद्र नशे के विरुद्ध जन-जागरूकता फैलाना होगा। बीजेपी पूरे राज्य में ड्रग्स के खिलाफ बड़ी यात्राएं निकालने वाली है, जिसमें केंद्र और राज्य स्तर के दिग्गज नेता शिरकत करेंगे। पार्टी का मानना है कि पंजाब में नशे की गंभीर समस्या ने लाखों परिवारों को तबाह किया है, और इसे एक निर्णायक मुद्दा बनाकर जनता का भावनात्मक समर्थन हासिल किया जा सकता है।

तस्करी पर नकेल कसने का वादा

बीजेपी इस यात्रा के माध्यम से जनता के बीच यह संदेश ले जाएगी कि पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है, जिसकी सुरक्षा सर्वोपरि है। पार्टी नेताओं के अनुसार, केंद्र और राज्य में ‘डबल इंजन की सरकार’ होने से नशीले पदार्थों की सीमा पार से होने वाली तस्करी को पूरी तरह खत्म करने में मदद मिलेगी। अमित शाह, जो पहले से ही राष्ट्रव्यापी स्तर पर ड्रग्स के खिलाफ मुहिम चला रहे हैं, अब पंजाब को विशेष रूप से नशामुक्त करने के लिए केंद्र की सख्त नीतियों का रोडमैप पेश करेंगे।

चुनावी वादों पर उठेंगे सवाल

इस मिशन का एक प्रमुख उद्देश्य वर्तमान AAP सरकार को एक्सपोज करना है। बीजेपी का आरोप है कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले नशे को खत्म करने का जो वादा किया था, उसमें वह पूरी तरह विफल रही है। 2022 के चुनावों में जिस मुद्दे ने ‘आप’ को प्रचंड जीत दिलाई थी, अब उसी मुद्दे पर बीजेपी उन्हें जनता की अदालत में घेरने की तैयारी में है। पार्टी पंजाब सरकार की प्रशासनिक विफलता और कानून-व्यवस्था की स्थिति को इस यात्रा के जरिए उजागर करेगी।

अकाली दल से दूरी और अकेले चुनाव लड़ने का साहसिक फैसला

सियासी समीकरणों की बात करें तो बीजेपी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी पुरानी सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी। पंजाब में कमल खिलाने के लिए पार्टी ने अकेले दम पर मैदान में उतरने का फैसला किया है। प्रकाश सिंह बादल के निधन के बाद अकाली दल के भीतर मचे घमासान और कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी का फायदा उठाने के लिए बीजेपी अब ‘पिंड-पिंड’ (गांव-गांव) तक अपनी पहुंच बनाने की जुगत में है।

मोगा रैली से हुई चुनावी शंखनाद की शुरुआत

अमित शाह ने इस साल मार्च में मोगा की ‘बदलाव रैली’ से चुनावी अभियान का आगाज पहले ही कर दिया है। बीजेपी का आकलन है कि पंजाब की मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति उनके लिए अत्यधिक उपजाऊ है। विपक्षी दलों की कमजोरी और सत्ताधारी दल के प्रति बढ़ती एंटी-इंकंबेंसी को देखते हुए, बीजेपी को उम्मीद है कि ‘मिशन पंजाब’ के जरिए वे राज्य की राजनीति में एक नया इतिहास रचने में सफल होंगे।