Amit Shah Petition : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के गहमागहमी के बीच देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कानूनी पचड़े में फंसते नजर आ रहे हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट में उनके खिलाफ एक याचिका दायर की गई है, जिसमें उन पर एक विशिष्ट धर्म के विरुद्ध भड़काऊ टिप्पणी करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि शाह ने अपनी चुनावी सभाओं के दौरान न केवल समाज के एक वर्ग को निशाना बनाया, बल्कि चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) का भी स्पष्ट उल्लंघन किया है। इस मामले ने बंगाल की राजनीतिक फिजां में हलचल तेज कर दी है।
पुलिस द्वारा एफआईआर न होने पर कोर्ट की शरण
इस मामले के शिकायतकर्ता और पेशे से वकील सुभाषिश दासगुप्ता ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में अमित शाह के कथित विवादित बयानों के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने की कोशिश की थी। हालांकि, उनके अनुसार, स्थानीय पुलिस प्रशासन से उन्हें किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं मिला और मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया गया। पुलिस की इस निष्क्रियता से क्षुब्ध होकर उन्होंने न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाया। मंगलवार को कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति कृष्ण राव की पीठ के समक्ष इस मामले की त्वरित सुनवाई के लिए अनुरोध किया गया, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने केस फाइल करने की अनुमति दे दी है।
चुनाव प्रचार और विवादित टिप्पणियों का सिलसिला
उल्लेखनीय है कि गृह मंत्री अमित शाह पिछले कई दिनों से पश्चिम बंगाल के चुनावी दौरे पर हैं। वह राज्य के विभिन्न जिलों में जनसभाओं, रैलियों और रोड शो के जरिए भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन्हीं कार्यक्रमों के दौरान उन्होंने एक खास समुदाय को लेकर ऐसी टिप्पणियां कीं, जो सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ सकती हैं। इसके साथ ही, उनके भाषणों को चुनाव आचार संहिता के नियमों के खिलाफ बताया गया है। वकील दासगुप्ता का तर्क है कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह की भाषा का प्रयोग लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।
ममता बनर्जी का कड़ा रुख: वकीलों को दिया था केस का निर्देश
इस कानूनी लड़ाई के पीछे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कड़ा विरोध भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। हाल ही में ममता बनर्जी ने एक रैली के दौरान अमित शाह पर हमला बोलते हुए कहा था कि गृह मंत्री सार्वजनिक मंचों से धमकाने वाली भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। शाह ने अपनी एक सभा में कथित तौर पर कहा था कि “तृणमूल के लोगों को उल्टा लटका कर सीधा कर देंगे।” ममता बनर्जी ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए अपने पार्टी समर्थित वकीलों को निर्देश दिया था कि वे अमित शाह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि इस तरह की धमकियाँ और सांप्रदायिक कमेंट अपराध की श्रेणी में आते हैं।
30 अप्रैल को होगी सुनवाई: टिकी हैं सबकी निगाहें
न्यायमूर्ति कृष्ण राव की पीठ इस संवेदनशील मामले पर 30 अप्रैल को सुनवाई कर सकती है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोर्ट इस मामले में कड़ा रुख अपनाता है, तो चुनाव के अंतिम चरणों में भाजपा के प्रचार अभियान पर इसका असर पड़ सकता है। बंगाल चुनाव 2026 वैसे भी हिंसा और जुबानी जंग के लिए चर्चा में बना हुआ है, ऐसे में गृह मंत्री के खिलाफ कोर्ट का यह कदम राजनीति को एक नई दिशा दे सकता है। अब देखना यह होगा कि 30 अप्रैल को होने वाली इस सुनवाई में अदालत क्या आदेश पारित करती है और क्या पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया जाएगा।
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