Amalaki Ekadashi 2026: आमलकी एकादशी फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जिसे आमलकी या आंवला एकादशी कहा जाता है। यह हिंदी कैलेंडर की आखिरी एकादशी होती है और इस दिन भगवान विष्णु के साथ आंवले के पेड़ की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। इस वर्ष आमलकी एकादशी 27 फरवरी 2026 को तड़के 12:33 बजे से प्रारंभ होकर रात 10:32 बजे तक रहेगी।
आमलकी एकादशी पर व्रत, पूजा और आंवले का दान करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है, कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और व्यक्ति को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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आमलकी एकादशी पर करने योग्य 7 प्रमुख काम

तुलसी के पास दीपक जलाना – शाम के समय तुलसी के पास दीपक अवश्य जलाना चाहिए। तुलसी के बिना भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते।
भगवान विष्णु की पूजा और मंत्र जप – “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करते रहें।
श्रीकृष्ण का अभिषेक – “कृं कृष्णाय नम:” मंत्र का जप करते हुए श्रीकृष्ण का अभिषेक करें।
गौ माता की पूजा और दान – किसी गौशाला में गायों की देखभाल के लिए दान-पुण्य करें।
मंदिर में पूजन सामग्री का दान – कुमकुम, चंदन, मिठाई, तेल-घी, हार-फूल या भगवान के वस्त्र मंदिर में दान करें।
आंवले का सेवन और दान – दिन में आंवला खाएं या उसका रस पिएं। बचे हुए आंवले का दान करें।
माता अन्नपूर्णा की पूजा – जरूरतमंदों को अन्न दान करें और देवी की विशेष पूजा करें।
शुभ योग और समय
इस एकादशी के दिन कई शुभ योग बन रहे हैं, जैसे सर्वार्थ सिद्धि, रवि, आयुष्मान और सौभाग्य योग। आंवले के पेड़ की पूजा के लिए शुभ समय सुबह 6:48 से 11:08 तक रहेगा। होली से चार दिन पहले आने के कारण इसे रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है। बनारस में बाबा विश्वनाथ की होली इसी दिन शुरू होती है।
यज्ञों का पुण्य और धार्मिक महत्व
पद्म और विष्णु धर्मोत्तर पुराण के अनुसार, आंवले का पेड़ भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इसमें देवी लक्ष्मी का भी वास होता है। इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर पूजा करने और आंवले का दान करने से सभी यज्ञों और 1,000 गायों के दान के बराबर पुण्य मिलता है। आमलकी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को मोक्ष भी प्राप्त होता है।
तिल, गंगाजल और आंवले से स्नान
सूर्योदय से पहले उठकर गंगाजल की सात बूंद, एक चुटकी तिल और आंवला डालकर स्नान करना चाहिए। इसे पवित्र या तीर्थ स्नान कहा जाता है। इससे पाप समाप्त होते हैं और दिनभर व्रत और पूजा का पूर्ण फल मिलता है।
जानें पूजा की सरल विधि

सुबह उठकर भगवान विष्णु का ध्यान और व्रत का संकल्प लें। स्नान के बाद दीपक जलाकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। आंवले के पेड़ के नीचे धूप, दीप, चंदन, रोली, फूल और अक्षत से पूजन करें। किसी गरीब या ब्राह्मण को भोजन कराएं। अगले दिन कलश, वस्त्र और आंवला का दान कर व्रत खोलें। आमलकी एकादशी का व्रत, पूजा और दान करने से न केवल घर में सुख-समृद्धि आती है, बल्कि कार्यों में सफलता और बाधाओं से मुक्ति भी मिलती है। यह दिन भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
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