Alwar CJP Protest: राजस्थान के अलवर जिले में शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलती एक गंभीर घटना सामने आई है, जिसके बाद सियासी और सामाजिक पारा चढ़ गया है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था, जर्जर इमारतों और पक्की सड़कों के अभाव के खिलाफ अब कड़ा मोर्चा खोल दिया है। सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका के नेतृत्व में पार्टी के समर्थक और स्थानीय ग्रामीण अलवर के थानागाजी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जोधावास में धरने पर बैठ गए हैं।
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जोधावास स्कूल में टला बड़ा हादसा, गिरी जर्जर छत की पट्टी
विवाद की मुख्य जड़ थानागाजी क्षेत्र के जोधावास स्थित राजकीय स्कूल की जर्जर इमारत है। गत गुरुवार (13 अगस्त) को इस स्कूल भवन की जर्जर छत की एक पट्टी अचानक भरभराकर नीचे आ गिरी। गनीमत यह रही कि जिस समय यह हादसा हुआ, उस वक्त कमरे में कोई छात्र मौजूद नहीं था, अन्यथा एक बहुत बड़ा हादसा हो सकता था।
ग्रामीणों का कहना है कि इस स्कूल भवन को प्रशासन द्वारा पहले ही जर्जर घोषित किया जा चुका है, इसके बावजूद न तो इसे ध्वस्त किया गया और न ही नए निर्माण की कोई सुध ली गई। सबसे विडंबना यह है कि इसी जर्जर और खतरनाक भवन के एक कमरे में ग्राम पंचायत का कार्यालय भी संचालित हो रहा है। स्कूल परिसर में इन जर्जर कमरों के बीच ही एक हैंडपंप भी है, जहां बच्चे पानी पीने जाते हैं, जिससे हर पल खतरे की तलवार लटकी रहती है।
आशुतोष रांका और सीजेपी का तीखा हमला
धरने का नेतृत्व कर रहे सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए जिला प्रशासन और सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा, “जोधावास, थानागाजी स्थित सरकारी स्कूल की कल छत गिर गई। चार साल से स्कूल जर्जर हालत में है। बच्चियां नदी पार करके स्कूल आती हैं क्योंकि सड़क नहीं है।”
उन्होंने आगे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए लिखा, “अलवर की डीएम मैडम कह रही हैं कि कमरा बनने में छह महीने लगेंगे और सड़क बनने में साल भर लगेगा। परसों रैली करने अमित शाह जी पास ही अलवर आ रहे हैं। अगर रैली यहां होती तो भी क्या डीएम मैडम एक साल ही बोलती? मैं अपनी टीम के साथ धरने पर हूं। सरकार बताए कब तक स्कूल ठीक करेगी और सड़क कब तक बनाएगी। हमारे बच्चों का भविष्य ऐसे बर्बाद नहीं होने देंगे।”
मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव और बदहाल पढ़ाई
स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल की हालत लंबे समय से दयनीय है। चार साल पहले इस स्कूल को सीनियर सेकेंडरी का दर्जा तो दे दिया गया, लेकिन आज तक यहां एक भी लेक्चरर का पद स्वीकृत नहीं किया गया है और न ही कोई प्रिंसिपल तैनात है। स्कूल में द्वितीय श्रेणी शिक्षकों के पांच पद खाली पड़े हैं और केवल एक शिक्षक के भरोसे पूरी व्यवस्था चल रही है। हालात यह हैं कि तृतीय श्रेणी शिक्षक ही 12वीं तक के छात्रों को पढ़ाने की मजबूरी झेल रहे हैं।
पूरे स्कूल में बैठने के लिए केवल तीन कमरे हैं, जो बरसात के मौसम में टपकते हैं। इसके अलावा, स्कूल तक पहुंचने वाले रास्ते में रूपारेल नदी पड़ती है, जिस पर पुलिया न होने के कारण बारिश के दिनों में बच्चों का स्कूल जाना दूभर हो जाता है। ग्रामीणों का दावा है कि चार महीने के बरसात के सीजन में बच्चे बमुश्किल 20 दिन ही स्कूल जा पाते हैं। इस संबंध में कई बार कलेक्टर, एसडीएम और स्थानीय विधायकों को ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन आश्वासनों के अलावा कुछ हाथ नहीं लगा। सीजेपी के इस विरोध प्रदर्शन ने अब सरकार और शिक्षा विभाग की नींद उड़ा दी है।
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