UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तारीखों का भले ही ऐलान ना हुआ हो, लेकिन सभी राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीति पर काम करना शुरु कर दिया है. चुनाव से पहले सियासी दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. इसी बीच एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने श्रावस्ती के भिनगा में जनसभा को संबोधित करते हुए बीजेपी और समाजवादी पार्टी पर जमकर निशाना साधा.ओवैसी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच राजनीतिक मुकाबले को ‘फिक्स्ड मैच’ करार देते हुए दोनों दलों की राजनीति पर सवाल खड़े किए. उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार मदरसों और मुस्लिम धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में कार्रवाई कर रही है, जबकि दूसरी ओर समाजवादी पार्टी इन मुद्दों को लेकर उतनी मजबूती से आवाज नहीं उठाती.
मदरसे और मुस्लिम धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई को लेकर ओवैसी का बड़ा दावा

बताते चले कि, श्रावस्ती में अपने संबोधन के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने मदरसों, कब्रिस्तानों और मजारों से जुड़े मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने दावा किया कि जिले में बड़ी संख्या में मदरसों को बंद किया गया और कुछ स्थानों पर बुलडोजर कार्रवाई भी की गई। ओवैसी के मुताबिक करीब 18 मदरसे और 37 कब्रिस्तान या मजारें तोड़ी गईं। हालांकि, ये आंकड़े ओवैसी द्वारा किए गए राजनीतिक दावे हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में प्रभावित लोगों की आवाज उठाना विपक्षी दलों की जिम्मेदारी होनी चाहिए।
ओवैसी ने सपा से पूछा- कार्रवाई के समय नेता कहां थे?
आपको बता दे कि, एआईएमआईएम प्रमुख ने समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए सवाल किया कि जब मदरसों, कब्रिस्तानों और मजारों पर कार्रवाई की जा रही थी, तब सपा के नेता मौके पर क्यों नहीं पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी मुस्लिम समुदाय को केवल चुनावी वोट बैंक के तौर पर देखती है और उनके वास्तविक मुद्दों पर उतनी मजबूती से खड़ी नहीं होती, जितनी उससे अपेक्षा की जाती है। ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम किसी भी राजनीतिक दल की जागीर नहीं हैं और उन्हें केवल वोटर के रूप में देखने के बजाय राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व का अधिकार मिलना चाहिए।
सीएम योगी-अखिलेश पर ओवैसी का ‘नूरा कुश्ती’ वाला हमला

श्रावस्ती की सभा में ओवैसी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच कथित राजनीतिक टकराव को भी निशाने पर लिया। उन्होंने दोनों नेताओं के बीच ‘नूरा कुश्ती’ यानी दिखावटी राजनीतिक लड़ाई होने का आरोप लगाया। ओवैसी का कहना था कि अगर मदरसों, मस्जिदों, कब्रिस्तानों और मजारों से जुड़े मामलों में कार्रवाई हो रही है तो विपक्षी दलों को खुलकर विरोध करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तो होती है, लेकिन मुस्लिम समुदाय से जुड़े कई मुद्दों पर विपक्ष की भूमिका उतनी प्रभावी नहीं दिखाई देती। ये आरोप राजनीतिक बयान हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
2027 विधानसभा चुनाव के लिए AIMIM का बड़ा सियासी संदेश
असदुद्दीन ओवैसी ने भिनगा विधानसभा सीट को लेकर भी बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। जनसभा के दौरान उन्होंने हाजी दद्दन खान को भिनगा सीट से एआईएमआईएम का संभावित उम्मीदवार घोषित करते हुए पार्टी के समर्थन में माहौल बनाने की अपील की। इस घोषणा के साथ पार्टी ने संकेत दिया कि वह 2027 विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश करेगी। ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी मुस्लिमों को केवल वोट बैंक मानने वाली राजनीति को स्वीकार नहीं करती और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी।
सपा-AIMIM गठबंधन पर ओवैसी ने साफ किया रुख
ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के साथ संभावित गठबंधन को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा को सत्ता में लौटने से रोकने के उद्देश्य से गठबंधन की बातचीत होती है और उसका मकसद स्पष्ट रहता है, तो एआईएमआईएम बातचीत के लिए तैयार है। हालांकि, प्रस्ताव ठुकराए जाने की स्थिति में पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ने का विकल्प भी खुला रखेगी। इससे संकेत मिलता है कि 2027 चुनाव से पहले एआईएमआईएम गठबंधन की संभावनाओं के साथ-साथ स्वतंत्र रूप से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी भी कर रही है।
ओवैसी ने भाजपा-सपा दोनों पर साधा निशाना

भिनगा की जनसभा में असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा सरकार की नीतियों, समाजवादी पार्टी की मुस्लिम राजनीति और आगामी विधानसभा चुनाव के संभावित गठबंधन समीकरणों को एक साथ निशाने पर लिया। उन्होंने मुस्लिमों के साथ-साथ दलितों और अन्य कमजोर वर्गों के अधिकारों की बात करते हुए एआईएमआईएम की अलग राजनीतिक पहचान को सामने रखा। भिनगा से हाजी दद्दन खान के नाम को आगे बढ़ाने के साथ पार्टी ने यह संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव के दौरान वह अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए सक्रिय अभियान चला सकती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि ओवैसी की यह रणनीति सपा के वोट समीकरण और यूपी के आगामी चुनावी गठबंधन पर कितना असर डालती है।










