Uttarakhand News: अल्मोड़ा के रवि टम्टा ने बनाई उड़ने वाली कार, सफल टेस्ट से चाचा चौधरी की कल्पना को दी नई उड़ान

उत्तराखंड के अल्मोड़ा के युवा इनोवेटर रवि टम्टा ने फ्लाइंग व्हीकल प्रोटोटाइप का सफल उड़ान परीक्षण कर नई उम्मीद जगाई है। काफलीखान गांव के रवि का लक्ष्य सुरक्षित इलेक्ट्रिक पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल विकसित करना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी रवि के इस इनोवेशन की तारीफ करते हुए इसे देश के युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अगस्त 9, 2026

Uttarakhand News: बचपन में मशहूर कॉमिक्स ‘चाचा चौधरी और उड़ने वाली कार’ पढ़ते समय आसमान में उड़ने वाली कार की कल्पना रोमांचित करती थी। उस दौर में ऐसी तकनीक किसी सपने से कम नहीं लगती थी। लेकिन अब उत्तराखंड के अल्मोड़ा के एक युवा ने इसी कल्पना को हकीकत की दिशा में ले जाने की कोशिश की है। अल्मोड़ा की जागेश्वर विधानसभा क्षेत्र के काफलीखान गांव के रहने वाले रवि टम्टा ने फ्लाइंग व्हीकल का प्रोटोटाइप तैयार कर अपनी तकनीकी प्रतिभा का परिचय दिया है।

रवि टम्टा फ्लाइंग व्हीकल का सफल परीक्षण

बताते चले कि, रवि टम्टा ने अपने तैयार किए गए फ्लाइंग व्हीकल प्रोटोटाइप का अल्मोड़ा के एक मैदान में परीक्षण किया। परीक्षण के दौरान मशीन ने उड़ान भरी, जिसके बाद रवि का यह इनोवेशन सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। अल्मोड़ा जैसे पहाड़ी क्षेत्र से निकलकर फ्लाइंग व्हीकल तैयार करने वाले इस युवा की उपलब्धि की लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं।

रवि के इस प्रोटोटाइप को केवल एक मशीन नहीं, बल्कि भविष्य की पर्सनल एयर मोबिलिटी की दिशा में एक प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है। कई वर्षों की मेहनत, डिजाइनिंग और लगातार टेस्टिंग के बाद प्रोटोटाइप का सफल उड़ान परीक्षण उनके प्रोजेक्ट के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

उत्तराखंड की उड़ने वाली कार के पीछे रवि की मेहनत

जानकारी के मुताबिक, रवि टम्टा ने देहरादून स्थित पेट्रोलियम विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है। तकनीकी शिक्षा और अपने इनोवेशन के जुनून को साथ लेकर उन्होंने फ्लाइंग व्हीकल तैयार करने की दिशा में काम शुरू किया। रवि HAPIDA SKYNEX से जुड़े हैं और इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।रवि का लक्ष्य एक ऐसा सुरक्षित इलेक्ट्रिक पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल विकसित करना है, जिसका इस्तेमाल भविष्य में व्यक्तिगत हवाई परिवहन के लिए किया जा सके। उनका प्रयास भारत में पर्सनल स्काई मोबिलिटी की संभावनाओं को विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फ्लाइंग व्हीकल प्रोटोटाइप को लेकर क्या है भविष्य की योजना?

रवि टम्टा का फ्लाइंग व्हीकल प्रोजेक्ट अभी प्रोटोटाइप और परीक्षण के चरण में है। ऐसे किसी भी पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल को व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल करने से पहले सुरक्षा, तकनीकी विश्वसनीयता, नियामकीय मंजूरी और कई स्तरों के परीक्षण जरूरी होंगे।इसके बावजूद शुरुआती उड़ान परीक्षण ने यह जरूर दिखाया है कि देश के छोटे शहरों और पहाड़ी इलाकों से आने वाले युवा भी अत्याधुनिक तकनीक और इनोवेशन के क्षेत्र में बड़े सपने देख सकते हैं। रवि की कोशिश आने वाले समय में भारत में नई तरह की मोबिलिटी तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में एक उदाहरण बन सकती है।

सीएम धामी ने रवि टम्टा को दी बधाई

रवि टम्टा के इस इनोवेशन की चर्चा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक भी पहुंची। सीएम धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रवि को उनके प्रोटोटाइप के सफल उड़ान परीक्षण के लिए बधाई दी।मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के अल्मोड़ा के युवा इनोवेटर रवि टम्टा ने ड्रोन तकनीक में नवाचार करते हुए HAPIDA SKYNEX प्रोटोटाइप का सफल उड़ान परीक्षण किया है। उन्होंने इसे युवाओं की प्रतिभा, वैज्ञानिक सोच और नवाचार क्षमता का उदाहरण बताया।

रवि टम्टा का प्रयास पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा

सीएम धामी ने अपने संदेश में कहा कि रवि टम्टा का यह अभिनव प्रयास केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि रवि भविष्य में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपने नवाचारों के जरिए नई ऊंचाइयां हासिल करेंगे।

अल्मोड़ा के एक छोटे से गांव से निकलकर फ्लाइंग व्हीकल जैसी महत्वाकांक्षी तकनीक पर काम करना यह बताता है कि सही सोच, तकनीकी ज्ञान और लगातार मेहनत के दम पर युवा नई संभावनाओं को जन्म दे सकते हैं। रवि टम्टा का यह प्रोटोटाइप आने वाले समय में भारत की पर्सनल स्काई मोबिलिटी की दिशा में एक अहम कदम साबित होता है या नहीं, यह आगे होने वाले परीक्षणों और तकनीकी विकास पर निर्भर करेगा।