Live-in रिलेशनशिप पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी, कहा- ‘रिश्ते टूटने पर पुरुष दुष्कर्म के आरोपों में फंस रहे’

इलाहाबाद  इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) और दुष्कर्म कानूनों को लेकर गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि पश्चिमी विचारधारा के प्रभाव में युवाओं के बीच बिना विवाह किए साथ रहने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। जब ऐसे संबंध समाप्त होते हैं, तो कई मामलों में दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज करा दी जाती है। पुराने कानूनों में फंस रहे पुरुष: कोर्ट न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा (प्रथम) की बेंच ने कहा कि चूंकि कानून महिलाओं के पक्ष में बनाए गए हैं, इसलिए पुरुषों को उन प्रावधानों

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Published On :

जनवरी 26, 2026

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इलाहाबाद 

इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) और दुष्कर्म कानूनों को लेकर गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि पश्चिमी विचारधारा के प्रभाव में युवाओं के बीच बिना विवाह किए साथ रहने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। जब ऐसे संबंध समाप्त होते हैं, तो कई मामलों में दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज करा दी जाती है।
पुराने कानूनों में फंस रहे पुरुष: कोर्ट

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा (प्रथम) की बेंच ने कहा कि चूंकि कानून महिलाओं के पक्ष में बनाए गए हैं, इसलिए पुरुषों को उन प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया जा रहा है, जो उस समय बने थे जब लिव-इन रिलेशनशिप की अवधारणा अस्तित्व में ही नहीं थी।

आजीवन कारावास की सजा रद्द

कोर्ट ने विशेष न्यायाधीश (POSCO Act), महाराजगंज की ओर से मार्च 2024 में अपीलकर्ता चंद्रेश को दी गई आजीवन कारावास की सजा और दोषसिद्धि आदेश को रद्द कर दिया। अपीलकर्ता को IPC की विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया गया था।
पीड़िता बालिग पाई गई

अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आरोपी ने शिकायतकर्ता की नाबालिग बेटी को शादी का झांसा देकर बहला-फुसलाकर बेंगलुरु ले जाकर शारीरिक संबंध बनाए। हालांकि, हाई कोर्ट ने पाया कि पीड़िता बालिग थी। अस्थि परीक्षण रिपोर्ट में उसकी उम्र लगभग 20 वर्ष पाई गई, जिस पर ट्रायल कोर्ट ने उचित विचार नहीं किया था।
सबूतों में पाई गईं गंभीर खामियां

कोर्ट ने यह भी कहा कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत विद्यालय रिकॉर्ड किशोर न्याय नियमों के अनुसार वैध दस्तावेज नहीं थे। पीड़िता की मां (गवाह-1) की ओर से बताई गई उम्र में भी विरोधाभास पाया गया। एफआईआर में उम्र 18½ वर्ष बताई गई थी। पीड़िता ने अपने बयान में स्वीकार किया कि वह स्वेच्छा से घर छोड़कर पहले गोरखपुर और फिर बेंगलुरु गई थी।

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