Aligarh Lock City: 150 साल पुराना ताला उद्योग, 30 ग्राम से 400 किलो तक के ताले होते हैं तैयार

लखनऊ  जब घरों की सुरक्षा की बात हो तो सबसे पहले अलीगढ़ के तालों का ख्याल मन में आता है। उत्तर प्रदेश का अलीगढ़ जिला दुनियाभर में अपने तालों के लिए जाना जाता है। इसे ताला नगरी भी कहा जाता है। देश में बनने वाले कुल तालों का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा अकेले अलीगढ़ से आता है, जो इसे 'लॉक कैपिटल ऑफ इंडिया' बनाता है। अलीगढ़ में धातु शिल्प और हथियार बनाने का काम मुगल काल से ही चला आ रहा है। आधुनिक ताला उद्योग की नींव अलीगढ़ में 1870 में ब्रिटिश शासन के दौरान पड़ी। उस समय इंग्लैंड की

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Published On :

अगस्त 22, 2026

लखनऊ
 जब घरों की सुरक्षा की बात हो तो सबसे पहले अलीगढ़ के तालों का ख्याल मन में आता है। उत्तर प्रदेश का अलीगढ़ जिला दुनियाभर में अपने तालों के लिए जाना जाता है। इसे ताला नगरी भी कहा जाता है। देश में बनने वाले कुल तालों का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा अकेले अलीगढ़ से आता है, जो इसे 'लॉक कैपिटल ऑफ इंडिया' बनाता है।

अलीगढ़ में धातु शिल्प और हथियार बनाने का काम मुगल काल से ही चला आ रहा है। आधुनिक ताला उद्योग की नींव अलीगढ़ में 1870 में ब्रिटिश शासन के दौरान पड़ी। उस समय इंग्लैंड की कंपनी ने यहां ताले का आयात और बाद में स्थानीय कारीगरों की मदद से छोटे पैमाने पर उत्पादन शुरू किया। Tala Nagari Aligarh, Lock Capital of India,

यहां के कारीगरों का हुनर दुनिया भर में मशहूर हो गया। अलीगढ़ के तालों की सबसे बड़ी खासियत उनकी मजबूती और टिकाऊपन है। इनको इतना मजबूत बनाया जाता है कि बड़े से बड़े चोर भी इन्हें तोड़ने में पसीना छोड़ देते हैं। यहां सामान्य से दिखने वाले ताले को लगभग 40 अलग-अलग भागों को जोड़कर बनाया जाता है। अलीगढ़ में जहां 30 ग्राम से लेकर 400 किलोग्राम तक के ताले तैयार किए जाते हैं।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
अलीगढ़ के तालों का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि मथुरा में भगवान कृष्ण के जन्मस्थान वाली जेल में आज भी अलीगढ़ के ही विशेष सुरक्षा ताले इस्तेमाल होते हैं। इसके अलावा, अलीगढ़ के ही एक बुजुर्ग दंपत्ति ने अयोध्या के भव्य राम मंदिर के लिए 400 किलो का विशालकाय ताला अपने हाथों से तैयार कर उपहार में दिया था, जो इस कला की पराकाष्ठा को दर्शाता है।

एक जिला एक उत्पाद और जीआई टैग
भारतीय बाजार में अपनी प्रामाणिकता बनाए रखने और नकली उत्पादों से बचने के लिए, अलीगढ़ के ताला उद्योग को भारत सरकार ने भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग प्रदान किया गया है। इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश सरकार की 'एक जिला एक उत्पाद' योजना के तहत इस उद्योग को आधुनिक तकनीक, लोन और वैश्विक बाजार से जोड़ा जा रहा है।

विदेशों तक है डिमांड
अलीगढ़ में ताला और उससे जुड़े हार्डवेयर की 5000 से अधिक छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं। यह उद्योग सीधे तौर पर 2 लाख से ज्यादा स्थानीय कारीगरों और मजदूरों को रोजगार देता है। आज यहां का सालाना ताला कारोबार 35000 करोड़ से अधिक का है और यहां निर्मित ताले अमेरिका, यूरोप, और मध्य पूर्व के देशों में बड़े पैमाने पर निर्यात किए जाते हैं।