UP Politics: गोपीकृष्ण पांडेय का ‘गदर’ कनेक्शन क्या है? नरेंद्र मोदी से जुड़ा 2001 का किस्सा वायरल

भाजपा ने गोपीकृष्ण पांडेय को राज्यसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी बनाया है। टिकट मिलते ही नरेंद्र मोदी से जुड़ा उनका 2001 का ‘गदर’ कनेक्शन चर्चा में आ गया। बताया जाता है कि कानपुर में संघ के कार्यक्रम के दौरान मोदी गोपीकृष्ण के घर ठहरे थे और दोनों साथ में ‘गदर’ फिल्म देखने गए थे।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 6, 2026

UP Politics: लंबे समय से राजनीतिक चर्चाओं से दूर रहे और बीजेपी की ओर से राज्यसभा टिकट मिलने के बाद गोपीकृष्ण पांडेय अचानक से सुर्खियों में आ गए है. टिकट मिलने के बाद से ही उनका राजनीतिक सफर मभी चर्चा में आ गया है. बजरंग दल और हिंदू जागरण मंच जैसे संगठनों में उनकी सक्रियता के साथ एक पुराना ‘गदर’ कनेक्शन की खूब चर्चा हो रही है. यह किस्सा वर्ष 2001 का बताया जा रहा है, जब कानपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित हुआ था.

गोपीकृष्ण पांडेय और प्रधानमंत्री मोदी की पुरानी नजदीकी

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गोपीकृष्ण पांडेय और प्रधानमंत्री मोदी की पुरानी नजदीकी

उस दौर में संघ के उस बड़े प्रचारक (नरेंद्र मोदी) की गोपी पांडेय से काफी नजदीकी थी. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2001 में देशभर से संघ के प्रचारक कानपुर में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। उस समय गोपीकृष्ण पांडेय आचार्य नगर में रहते थे। संघ के वरिष्ठ प्रचारकों में शामिल नरेंद्र मोदी भी कार्यक्रम के सिलसिले में कानपुर पहुंचे और गोपीकृष्ण पांडेय के घर ठहरे। बताया जाता है कि उस समय मोदी के बाल काफी बढ़े हुए थे। गोपीकृष्ण के घर पर ही नाई बुलाकर उन्होंने बाल कटवाए और फिर नहाने-खाने के बाद कार्यक्रम की तैयारी की।

नरेंद्र मोदी और गोपीकृष्ण पांडेय का ‘गदर’ कनेक्शन कैसे बना?

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नरेंद्र मोदी और गोपीकृष्ण पांडेय का ‘गदर’ कनेक्शन कैसे बना?

बताते चले कि, कार्यक्रम अगले दिन होना था, इसलिए शाम का समय खाली था। इसी दौरान नरेंद्र मोदी गोपीकृष्ण पांडेय को अपने साथ लेकर बाहर निकले। बातचीत करते हुए दोनों आगे बढ़े। उस समय सनी देओल और अमीषा पटेल की फिल्म ‘गदर’ सिनेमाघरों में धूम मचा रही थी। बताया जाता है कि नरेंद्र मोदी और गोपीकृष्ण पांडेय साथ में फिल्म देखने पहुंच गए। यही पुराना किस्सा अब गोपीकृष्ण को राज्यसभा टिकट मिलने के बाद एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। खुद गोपीकृष्ण पांडेय ने भी इस घटना की पुष्टि की है।

राज्यसभा प्रत्याशी बनने पर क्या बोले गोपीकृष्ण पांडेय ?

राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद गोपीकृष्ण पांडेय ने कहा कि भाजपा में लंबे समय तक संघर्ष और सेवा करने वाले कार्यकर्ताओं को अवसर जरूर मिलता है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी है, उसे पूरी निष्ठा से निभाएंगे। उन्होंने कानपुर और उत्तर प्रदेश की जनता के लिए हमेशा उपलब्ध रहने और प्रदेश के विकास में योगदान देने की बात कही।

BJP ने घोषित किए आठ प्रत्याशियों के नाम

आपको बताते चले कि, इसी महीने होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने 10 में से आठ प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं। पार्टी ने कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की 52 विधानसभा सीटों को ध्यान में रखते हुए कानपुर से तीन नेताओं को मैदान में उतारा है। इनमें प्रकाश पाल और श्रुति गंगवार ओबीसी वर्ग से आते हैं, जबकि गोपीकृष्ण पांडेय सामान्य वर्ग से हैं। माना जा रहा है कि अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा ने क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखकर यह रणनीति तैयार की है।

राज्यसभा चुनाव में OBC और ब्राह्मण समीकरण पर भाजपा का दांव

केंद्रीय उत्तर प्रदेश के सामाजिक समीकरणों में ओबीसी और सामान्य वर्ग की बड़ी हिस्सेदारी मानी जाती है। सामान्य वर्ग में ब्राह्मण मतदाताओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में भाजपा की ओर से ओबीसी और ब्राह्मण पृष्ठभूमि वाले चेहरों को राज्यसभा के लिए आगे करना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। कानपुर से भाजपा के सिंबल पर पहली बार तीन प्रत्याशियों को राज्यसभा चुनाव में उतारे जाने को भी इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

प्रकाश पाल का संघ से भाजपा संगठन तक लंबा सफर

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प्रकाश पाल का संघ से भाजपा संगठन तक लंबा सफर

कानपुर दक्षिण के बर्रा निवासी 60 वर्षीय प्रकाश पाल ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के तौर पर की थी। वह करीब 36 वर्षों से संघ से जुड़े हैं। उन्होंने तीन वर्ष तक पूर्णकालिक तहसील प्रचारक के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद वह संघ से सीधे भाजपा संगठन में आए और पार्टी के संगठनात्मक काम में सक्रिय भूमिका निभाई।

गोपीकृष्ण पांडेय का संघ से काफी पुराना जुड़ाव

यही नहीं, गोपीकृष्ण पांडेय का संघ से जुड़ाव भी काफी पुराना है। बताया जाता है कि महज 12 वर्ष की उम्र में वह स्वयंसेवक के रूप में संघ से जुड़ गए थे। इसके बाद उन्होंने बजरंग दल और हिंदू जागरण मंच सहित विभिन्न संगठनों में काम किया। वर्ष 1998 में उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया। अब लंबे संगठनात्मक सफर के बाद भाजपा ने उन्हें राज्यसभा भेजने का फैसला किया है।

श्रुति गंगवार का भी कानपुर से पारिवारिक रिश्ता

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श्रुति गंगवार का भी कानपुर से पारिवारिक रिश्ता

भाजपा की राज्यसभा प्रत्याशियों की सूची में शामिल श्रुति गंगवार का भी कानपुर से पारिवारिक रिश्ता है। वह झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी हैं और कानपुर दक्षिण से उनका संबंध बताया जाता है। उनकी ससुराल बर्रा-2 में है। उनकी शादी सत्यनारायण सचान के बेटे सुबोध सचान से हुई है। राज्यसभा टिकट की घोषणा के बाद पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. वीना आर्या पटेल ने सत्यनारायण सचान के घर पहुंचकर उन्हें बधाई दी।