Al Falah University: दिल्ली पुलिस ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) की शिकायतों के आधार पर अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी कथित धोखाधड़ी और यूनिवर्सिटी में अनियमितताओं से जुड़े मामलों में हुई। क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में दो अलग-अलग FIR दर्ज की गई हैं। गिरफ्तारी के बाद सिद्दीकी को दिल्ली की अदालत में पेश किया गया, जिसने उन्हें चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
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गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि

अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई UGC की शिकायत और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा शुरू की गई जांच के बाद हुई। यूनिवर्सिटी के कामकाज में कथित गड़बड़ियों और धोखाधड़ी के आरोपों के चलते यह कदम उठाया गया। बताया गया कि यह मामला यूनिवर्सिटी के वित्तीय लेन-देन और मेडिकल स्टाफ से जुड़े फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की जांच से जुड़ा है।
NAAC की जांच और एक्रेडिटेशन विवाद
नवंबर 2024 में नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (NAAC) ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी को कथित गलत एक्रेडिटेशन के दावे पर शो-कॉज नोटिस जारी किया था। NAAC ने कहा कि यूनिवर्सिटी न तो मान्यता प्राप्त थी और न ही उसने एक्रेडिटेशन के लिए आवेदन किया था। बावजूद इसके यूनिवर्सिटी ने अपनी वेबसाइट पर गलत जानकारी दिखाई। इसके बाद यूनिवर्सिटी की वेबसाइट को ऑफलाइन कर दिया गया।
ED की कार्रवाई और फंड अटैचमेंट
16 जनवरी 2025 को ED ने यूनिवर्सिटी की 140 करोड़ रुपये की जमीन और बिल्डिंग अटैच कर ली। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई यूनिवर्सिटी के कथित फर्जीवाड़े और गलत एक्रेडिटेशन दावों की जांच के तहत की गई। पहली FIR धारा 12 के तहत उल्लंघन के लिए दर्ज की गई जबकि दूसरी FIR कथित गलत एक्रेडिटेशन के दावों से संबंधित है।
यूनिवर्सिटी का कनेक्शन लाल किले ब्लास्ट केस से
अल-फलाह यूनिवर्सिटी तब राष्ट्रीय सुर्खियों में आई थी जब पता चला कि लाल किले ब्लास्ट केस में दोषी डॉ. उमर नबी इसी संस्थान में काम करता था। इसके दो साथी डॉ. मुज़म्मिल शकील और डॉ. शाहीन शाहिद भी यूनिवर्सिटी में कार्यरत पाए गए थे। इस कनेक्शन ने यूनिवर्सिटी की निगरानी और जांच को और तेज कर दिया।
अगले कदम और जांच
क्राइम ब्रांच अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तारी और FIR के बाद आगे की पूछताछ जारी रहेगी। जांच में यूनिवर्सिटी के वित्तीय दस्तावेज, फंडिंग और स्टाफ से संबंधित लेन-देन की विस्तार से समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में और भी तथ्य सामने आ सकते हैं, जो यूनिवर्सिटी के कामकाज में संभावित गड़बड़ियों को उजागर करेंगे।
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