UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक बैठकों का दौर जारी है, लेकिन इस बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तंज कसते हुए इसे महज एक ‘तमाशा’ करार दिया है। अखिलेश ने स्पष्ट किया कि भाजपा चाहे अपनी कैबिनेट का विस्तार करे या उसे छोटा करे, जनता का विश्वास वह खो चुकी है और अब प्रदेश में बदलाव की लहर है।
मंत्रिमंडल विस्तार बनाम चुनावी स्टंट
उत्तर प्रदेश सरकार में संभावित नए चेहरों को शामिल किए जाने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने शनिवार को भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह सब ‘भाजपा का ड्रामा’ है और इससे सूबे की जमीनी हकीकत नहीं बदलने वाली। सपा अध्यक्ष ने हुंकार भरते हुए कहा कि भाजपा का असली और बड़ा शपथ ग्रहण समारोह अब सीधे 2027 में होगा, जब समाजवादी पार्टी और ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठबंधन की पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी। उनके अनुसार, भाजपा अब चाहे जितना भी विस्तार कर ले, वह अंदरूनी तौर पर सिकुड़ चुकी है और जनता अब उन्हें हटाने का मन बना चुकी है।
प्रशासनिक नियुक्तियों पर उठाए सवाल
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हालिया बयानों का समर्थन करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने भाजपा के बारे में जो कुछ भी कहा है, वह कम है। उन्होंने ममता बनर्जी की राजनीतिक शक्ति पर भरोसा जताते हुए कहा कि वे अकेले चुनाव लड़कर भी जीतने का माद्दा रखती हैं।
इसके साथ ही अखिलेश ने यूपी की प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारियों की पोस्टिंग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बंगाल में चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में अफसरों को हटाया गया, लेकिन उत्तर प्रदेश में भाजपा ने कभी निष्पक्षता नहीं दिखाई। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपी में अधिकारियों की तैनाती इस आधार पर की जाती है कि उनके जरिए सत्ताधारी दल के रिश्तेदारों को चुनाव में कैसे लाभ पहुँचाया जा सके।
अगले सप्ताह संभावित ‘यूपी कैबिनेट रिशफल’
सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि अगले सप्ताह की शुरुआत में योगी सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार (UP Ministry Expansion) संभव है। इसे लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा संगठन के बीच गहन विचार-विमर्श हो चुका है। चर्चा है कि चौधरी भूपेंद्र सिंह, अशोक कटारिया और पूजा पाल जैसे प्रमुख चेहरों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है।
इसके अलावा, वर्तमान राज्यमंत्री बलदेव औलख की तरक्की (प्रमोशन) होने की संभावना है और एमएलसी व प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ला को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। इस फेरबदल का मुख्य उद्देश्य 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधना माना जा रहा है।
2027 का चुनावी रोडमैप और पीडीए की रणनीति
अखिलेश यादव ने अपनी पूरी रणनीति अब 2027 के विधानसभा चुनावों पर केंद्रित कर दी है। उनका कहना है कि भाजपा के विस्तार कार्यक्रमों से जनता का ध्यान बुनियादी मुद्दों से नहीं भटकाया जा सकता। सपा अब ‘पीडीए’ (PDA Strategy) के फॉर्मूले पर काम कर रही है, जिसके जरिए वे दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। अखिलेश के मुताबिक, यूपी की जनता अब भाजपा के ‘तमाशों’ से ऊब चुकी है और एक ऐसी सरकार चाहती है जो वास्तव में विकास और न्याय की बात करे।









