UP Politics: सीएम योगी के बयान पर अखिलेश का पलटवार, कहा- ‘श्री राम ने मुझे माध्यम बनाया’

राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सीएम योगी के बयान को हथियार बनाते हुए बड़ी मांग की है। जन्मदिन के मौके पर अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि प्रभु राम ने उन्हें इस भ्रष्टाचार को उजागर करने का माध्यम बनाया है। उन्होंने मांग की है कि लूटा गया सोना-चांदी वापस आना चाहिए।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 1, 2026

UP Politics: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने जन्मदिन के अवसर पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सभी शुभचिंतकों का हृदय से आभार व्यक्त किया। हालांकि, उत्सव के इस माहौल में भी उनका राजनीतिक रुख बेहद आक्रामक रहा। अखिलेश यादव ने विशेष रूप से अयोध्या राम मंदिर में हुए कथित चढ़ावा चोरी और हेराफेरी के मामले को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘दूध का दूध, पानी का पानी’ करने वाले बयान का उल्लेख करते हुए चुनौती दी कि अब समय आ गया है कि सच्चाई सामने आए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मंदिर में अर्पित किया गया सोना और चांदी अपने वास्तविक स्थान पर वापस पहुंचना चाहिए।

सीसीटीवी बंद होने पर वापस आएगा रामधन?

बताते चले कि, राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्थाओं पर कटाक्ष करते हुए कन्नौज के सांसद ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “यदि कुछ दिनों के लिए आंखें बंद कर दी जाएं और सीसीटीवी कैमरों को बंद कर दिया जाए, तो गायब हुआ सारा चढ़ावा जादुई तरीके से वापस आ जाएगा।” उन्होंने इसे एक ईश्वरीय संकेत बताते हुए कहा कि शायद प्रभु श्रीराम ने उन्हें ही इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का जरिया बनाया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी इस सक्रियता के बाद ही चंदे में धांधली का यह मामला इतनी दूर तक पहुंचा है, और अब इसकी निष्पक्ष जांच अत्यंत आवश्यक है।

हल्के-फुल्के अंदाज में राजनीतिक कटाक्ष

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने मजाकिया अंदाज में पत्रकारों से आग्रह किया कि “आज जन्मदिन है, इसलिए कुछ कड़वा मत पूछना।” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि हालांकि हर राजनीतिक दल को अपना खर्च चलाने के लिए चंदे की आवश्यकता होती है, लेकिन आज के दिन ‘किसी और चंदे’ पर चर्चा न की जाए। इसी दौरान, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर हमला करते हुए कहा कि भाजपा का एकमात्र उद्देश्य भ्रष्टाचार के बल पर सत्ता हथियाना और फिर उसी भ्रष्टाचार के जरिए सरकार चलाना है। उन्होंने तंज कसते हुए सुझाव दिया कि भाजपा को अब अपना नाम बदलकर ‘भाचपा’ (भारतीय भ्रष्टाचार पार्टी) कर लेना चाहिए।

संविधान, आस्था और सुरक्षा पर भाजपा को घेरा

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल ने केवल संविधान के साथ ही नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की श्रद्धा और आस्था के साथ भी खिलवाड़ किया है। राम मंदिर के धन को उन्होंने ‘रामधन’ बताते हुए कहा कि जब तक श्रद्धालुओं को यह विश्वास नहीं होगा कि उनका दान सुरक्षित है और उसकी चोरी नहीं होगी, तब तक दान की गति प्रभावित होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि आस्था के केंद्रों में पारदर्शिता लाना सरकार की पहली जिम्मेदारी है, लेकिन भाजपा सरकार इस मामले में पूरी तरह विफल रही है। अखिलेश की यह टिप्पणी आने वाले दिनों में यूपी की सियासत में एक नया उबाल लाने के संकेत दे रही है।