Akhilesh Yadav PDA: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने चर्चित PDA नारे की एक नई व्याख्या सामने रखी है। उन्होंने कहा कि PDA केवल एक राजनीतिक नारा नहीं है, बल्कि इसमें समाज के अलग-अलग वर्गों और अपनी आवाज उठाने वाले लोगों की भागीदारी भी शामिल है। अखिलेश के मुताबिक, PDA में P का अर्थ प्रोटेस्ट, D का अर्थ डेमोंस्ट्रेशन और A का अर्थ एक्टिविस्ट से भी जोड़ा जा सकता है।
प्रोटेस्ट और डेमोंस्ट्रेशन करने वालों को बताया PDA का हिस्सा
अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग अपनी मांगों और अधिकारों के लिए प्रोटेस्ट करते हैं, वे भी PDA का हिस्सा हैं। इसी तरह शांतिपूर्ण तरीके से डेमोंस्ट्रेशन करने वाले और अपनी बात समाज के सामने रखने वाले एक्टिविस्ट भी इस अवधारणा में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अपनी आवाज बुलंद करने और लोकतांत्रिक तरीके से सवाल उठाने वाले लोगों को PDA के व्यापक दायरे में देखा जाना चाहिए।
पेशेंस और डिसिप्लिन से भी जोड़ा PDA
सपा प्रमुख ने PDA को पेशेंस यानी धैर्य और डिसिप्लिन यानी अनुशासन से भी जोड़कर देखा। उन्होंने एक साथी की बात का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि लोगों में धैर्य बना रहे, अनुशासन हो और उनके कार्य सकारात्मक दिशा में हों, तो PDA की सरकार बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने संगठन और सकारात्मक राजनीतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
विरोधियों पर भी अखिलेश ने साधा निशाना
अखिलेश यादव ने कहा कि PDA और उसके अलग-अलग अर्थों को लेकर विरोधी दलों में बेचैनी दिखाई दे रही है। उन्होंने दावा किया कि विरोधियों को PDA से परेशानी हो रही है। सपा प्रमुख ने PDA को प्रोग्रेसिव और विजनरी बताया। उनके मुताबिक, विजनरी सोच रखने वाले लोग समाज को जोड़ने का प्रयास करते हैं और बदलाव तथा विकास की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
रक्षाबंधन पर मुफ्त बस सेवा को लेकर सरकार पर आरोप
अखिलेश यादव ने रक्षाबंधन के दौरान महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने त्योहार के दौरान बहनों को मुफ्त बस सुविधा देने का दावा किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर कई जगह व्यवस्थाएं अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहीं। उन्होंने दावा किया कि भारी भीड़ और दबाव के बावजूद कई स्थानों पर पर्याप्त इंतजाम नहीं दिखाई दिए।
बस व्यवस्था को लेकर खबरों का किया जिक्र
सपा प्रमुख ने कहा कि रक्षाबंधन के दौरान बसों में भीड़ और व्यवस्थाओं को लेकर मीडिया में कई खबरें सामने आईं। उनके मुताबिक, कुछ स्थानों पर यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और मुफ्त बस सेवा को लेकर किए गए दावों तथा जमीनी स्थिति में अंतर दिखाई दिया। हालांकि, इन आरोपों पर सरकार का पक्ष इस बयान में सामने नहीं आया है।
सामंतवादी सोच वाले लोगों पर भी हमला
अखिलेश यादव ने कहा कि PDA को लेकर पुरातनपंथी, संकीर्ण सोच रखने वाले और सामंतवादी विचारधारा के लोग चिंतित हैं। उन्होंने दावा किया कि जैसे-जैसे नए लोग PDA से जुड़ते जा रहे हैं, विरोधियों की बेचैनी बढ़ रही है। उनके अनुसार, PDA को रोकने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए जा सकते हैं, लेकिन लोकतांत्रिक जागरूकता के कारण इसे रोकना आसान नहीं होगा।
तानाशाही को लेकर भी अखिलेश का बयान
सपा अध्यक्ष ने कहा कि देश और समाज में तानाशाही की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि न पहले तानाशाही चली थी और न आगे चलेगी, क्योंकि आम लोग लगातार जागरूक हो रहे हैं। अखिलेश के मुताबिक लोकतंत्र में जनता की भागीदारी और जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण है और लोगों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए।
बीजेपी के नैरेटिव से सावधान रहने की अपील
अखिलेश यादव ने कहा कि समाज ने हजारों वर्षों से कई तरह की सामाजिक समस्याओं का सामना किया है। उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सामाजिक असमानता को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए। अखिलेश ने दावा किया कि बीजेपी की ओर से आने वाले समय में कई तरह के राजनीतिक नैरेटिव सामने रखे जाएंगे, इसलिए लोगों को इनसे सावधान रहने की जरूरत है।
आरक्षण के मुद्दे पर पहले भी बीजेपी को घेर चुके हैं
अखिलेश यादव इससे पहले भी भारतीय जनता पार्टी पर आरक्षण को लेकर आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने दावा किया था कि बीजेपी आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करना चाहती है। हालांकि बीजेपी की ओर से ऐसे आरोपों पर अलग-अलग मौकों पर अपना पक्ष रखा गया है। PDA को लेकर अखिलेश का ताजा बयान समाजवादी पार्टी की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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