
Akhilesh Yadav Journalist Clash : उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और मीडिया के बीच रिश्ते कई बार सुर्खियों में रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस हो या चुनावी सभा, पत्रकारों के सवालों पर अखिलेश यादव की प्रतिक्रियाएं अक्सर राजनीतिक बहस का विषय बनी हैं। कई मौकों पर उन्होंने सवाल पूछने वाले पत्रकारों पर तीखी टिप्पणी की, तो कभी उनकी पत्रकारिता और निष्पक्षता पर ही सवाल खड़े कर दिए। झांसी, मुरादाबाद और चुनाव प्रचार के दौरान सामने आए ऐसे कुछ बयानों को लेकर बीजेपी ने भी सपा प्रमुख पर निशाना साधा। आइए जानते हैं उन चर्चित घटनाओं के बारे में, जब अखिलेश यादव और पत्रकारों के बीच कैमरे के सामने तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
झांसी में पत्रकार से भिड़े अखिलेश यादव
दिसंबर 2022 में झांसी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव और एक पत्रकार के बीच तीखी बहस का मामला चर्चा में आया था। बताया गया कि पत्रकार के सवाल से नाराज होकर सपा प्रमुख ने पहले उसका नाम पूछा और फिर कैमरे के सामने ही उसे निशाने पर लिया। अखिलेश ने पत्रकार से कैमरा बंद करने और कहीं दूसरी जगह ले जाने की बात कही। इसके बाद उन्होंने टिप्पणी की, ‘मिश्रा जी, कुछ तो शर्म करो, थोड़ी तो पत्रकारिता कर लो, वरना तुम्हारी नौकरी चली जाएगी।’ इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक और मीडिया जगत में बहस शुरू हो गई।

टीवी इंटरव्यू में अखिलेश यादव ने पत्रकार को दी नसीहत
जून 2021 के एक टीवी इंटरव्यू या प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव की एक पत्रकार से बहस भी चर्चा में रही थी। पत्रकार ने जब समाजवादी पार्टी के आंदोलनों और जमीनी सक्रियता को लेकर सवाल किया, तो अखिलेश ने सवाल पूछने के तरीके पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पत्रकार को सवाल पूछने से पहले पूरी तैयारी करनी चाहिए। साथ ही टिप्पणी की कि पत्रकार बीजेपी की भाषा बोल रहे हैं। इस बयान को लेकर विपक्षी राजनीति और मीडिया की निष्पक्षता पर बहस हुई।
चुनाव प्रचार के दौरान पत्रकारों के बजट पर उठाया सवाल
दिसंबर 2021 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले प्रचार के दौरान अखिलेश यादव का एक और बयान चर्चा में आया था। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, पत्रकारों के सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पत्रकार विशेष राजनीतिक एजेंडे के तहत सवाल पूछते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे पत्रकारों के कागज निकलवाने पड़ेंगे और सवाल नहीं पूछने पर उनका प्रचार बजट बंद हो सकता है। इस टिप्पणी को लेकर मीडिया की स्वतंत्रता और राजनीतिक दलों के साथ पत्रकारों के संबंधों पर सवाल उठे।

मुरादाबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों से हुई तीखी बहस
मार्च 2021 में मुरादाबाद के एक होटल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी अखिलेश यादव और पत्रकारों के बीच विवाद सामने आया था। बताया गया कि पत्रकारों के लगातार सवालों के बाद माहौल गर्म हो गया और सपा समर्थकों तथा पत्रकारों के बीच भी तीखी नोकझोंक हुई। इसी दौरान अखिलेश यादव ने पत्रकारों को बिके हुए बताते हुए सवाल किया कि वे केवल उनसे ही सवाल क्यों करते हैं और बीजेपी नेताओं से सवाल पूछने की हिम्मत क्यों नहीं दिखाते। इस घटना ने मीडिया और विपक्षी नेताओं के रिश्तों को लेकर नई बहस छेड़ दी।

बीजेपी ने उठाए सवाल, सपा ने मीडिया पर लगाए आरोप
अखिलेश यादव की इन टिप्पणियों को लेकर बीजेपी नेताओं और समर्थकों ने कई बार सवाल उठाए हैं। भाजपा की ओर से इसे पत्रकारों के सम्मान और मीडिया की स्वतंत्रता से जोड़कर आलोचना की जाती रही है। वहीं समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव का पक्ष रहा है कि मीडिया का एक वर्ग विपक्षी नेताओं से लगातार सवाल करता है, जबकि सत्ताधारी दल से जुड़े मुद्दों पर वैसी सक्रियता नहीं दिखाता।
पत्रकारिता और राजनीति के रिश्तों पर फिर छिड़ी बहस
अखिलेश यादव के इन बयानों ने एक बार फिर राजनीतिक नेताओं और मीडिया के बीच संबंधों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। लोकतंत्र में पत्रकारों की भूमिका सरकार और विपक्ष दोनों से सवाल पूछने की होती है। वहीं राजनीतिक नेताओं को भी आलोचनात्मक सवालों का जवाब देने का अवसर मिलता है। ऐसे में सार्वजनिक मंचों पर होने वाली तीखी बहस केवल किसी एक नेता या पत्रकार तक सीमित नहीं रहती, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता, जवाबदेही और राजनीतिक संवाद जैसे बड़े सवाल भी सामने लाती है।











