UP Politics: अखिलेश के ‘चवन्नी’ बयान पर घिरे, केशव मौर्य ने जयंत चौधरी से माफी मांगने को कहा

अखिलेश यादव के ‘चवन्नी’ वाले बयान पर यूपी की सियासत गरमा गई है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश पर जयंत चौधरी और जाट समाज के अपमान का आरोप लगाते हुए माफी की मांग की। मायावती ने भी बयान की आलोचना की। केशव मौर्य ने 2027 चुनाव में सपा को हराने का दावा किया।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अगस्त 22, 2026

UP Politics: उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी और बीजेपी के बीच जुबानी जंग तेज होती जा रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के ‘चवन्नी’ वाले बयान को लेकर अब यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने उन पर जोरदार हमला बोला है। केशव मौर्य ने अखिलेश यादव के बयान को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया और उन पर जाट समाज तथा केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के अपमान का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को अपने बयान के लिए जयंत चौधरी से तत्काल माफी मांगनी चाहिए।

‘चवन्नी’ बयान पर सपा और बीजेपी के बीच बढ़ी सियासी तकरार

बताते चले कि, केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के मुखिया राजनीतिक बेचैनी में अगड़ा, पिछड़ा और दलित किसी भी वर्ग पर टिप्पणी करने से नहीं चूक रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ‘नेताजी की कमाई, सपा बहादुर ने गंवाई’ वाली बात सोलह आने सच साबित हो रही है। डिप्टी सीएम ने दावा किया कि अखिलेश यादव की राजनीतिक हताशा उनके बयानों में साफ दिखाई दे रही है।

जयंत चौधरी के अपमान पर केशव मौर्य ने मांगी माफी

केशव मौर्य ने अपने बयान में केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी को लेकर जिस तरह की टिप्पणी की है, वह राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ है। केशव मौर्य ने चौधरी चरण सिंह और सैफई परिवार के पुराने राजनीतिक संबंधों का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न चौधरी चरण सिंह के सैफई परिवार पर कई एहसान रहे हैं। ऐसे में अखिलेश यादव को जयंत चौधरी से तुरंत माफी मांगनी चाहिए।

चौधरी चरण सिंह के नाम पर सियासत

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने चौधरी चरण सिंह के योगदान को याद करते हुए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा प्रमुख जिस तरह जयंत चौधरी पर टिप्पणी कर रहे हैं, उससे उनकी राजनीतिक सोच और बेचैनी सामने आती है। केशव मौर्य ने कहा कि चौधरी चरण सिंह का राजनीतिक योगदान देश और किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा है और उनके परिवार से जुड़े नेताओं के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी उचित नहीं है।

अगड़ा-पिछड़ा-दलित की ‘त्रिवेणी’ पर बीजेपी का दावा

केशव प्रसाद मौर्य ने अपने बयान में बीजेपी के सामाजिक समीकरण को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में अगड़ा, पिछड़ा और दलित वर्ग बीजेपी के साथ खड़ा है। उन्होंने इसे ‘त्रिवेणी’ बताते हुए कहा कि यही सामाजिक समीकरण आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए मजबूत आधार बनेगा। डिप्टी सीएम ने दावा किया कि सपा जातिवाद और मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति में उलझी हुई है।

2027 चुनाव को लेकर केशव मौर्य ने सपा पर साधा निशाना

केशव मौर्य ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की जनता आगामी चुनाव में सपा का ‘बोरिया-बिस्तर’ समेट देगी और पार्टी को दोबारा सैफई भेज देगी। बीजेपी नेता के इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच बढ़ती राजनीतिक तल्खी के तौर पर देखा जा रहा है।

मायावती ने भी अखिलेश यादव के ‘चवन्नी’ बयान की आलोचना की

अखिलेश यादव के ‘चवन्नी से रुपया’ वाले बयान को लेकर सिर्फ बीजेपी ही नहीं, बल्कि बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी निशाना साधा है। मायावती ने इस बयान को जाट समाज के अपमान से जोड़ते हुए इसकी आलोचना की। उन्होंने अखिलेश यादव को अहंकारी और अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि सपा प्रमुख को अपने बयान के लिए पूरे जाट समाज से माफी मांगनी चाहिए।

जाट समाज और जयंत चौधरी को लेकर सियासत गरमाई

अखिलेश यादव के बयान पर केशव मौर्य और मायावती की प्रतिक्रिया के बाद यूपी की सियासत में जाट समाज और जयंत चौधरी का मुद्दा चर्चा में आ गया है। बीजेपी जहां इस बयान को लेकर सपा पर हमलावर है, वहीं मायावती ने भी अखिलेश यादव से माफी की मांग कर दी है। ऐसे में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले जातीय और सामाजिक समीकरणों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के संकेत हैं।

2027 से पहले अखिलेश यादव के बयान पर बढ़ी राजनीतिक हलचल

कुल मिलाकर अखिलेश यादव के ‘चवन्नी’ वाले बयान ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। केशव प्रसाद मौर्य ने इसे जयंत चौधरी और जाट समाज के अपमान से जोड़ते हुए अखिलेश यादव से माफी की मांग की है, जबकि मायावती ने भी इसी मुद्दे पर सपा प्रमुख को घेरा है। अब देखना होगा कि अखिलेश यादव इस हमले का क्या जवाब देते हैं और 2027 के चुनावी मैदान में यह मुद्दा कितना बड़ा राजनीतिक रूप लेता है।