Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित मणिकर्णिका घाट पर चल रहे विकास कार्य और कथित मंदिरों के तोड़े जाने को लेकर सियासत गरमाई हुई है। समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच इस मुद्दे पर जुबानी जंग लगातार तेज होती जा रही है। हाल ही में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मामले पर बीजेपी पर निशाना साधा।
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अखिलेश यादव ने किया BJP पर हमला
मणिकर्णिका घाट विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया में अखिलेश यादव ने कहा कि, ‘एआई या सच्चाई… सपा का डेलीगेशन बस यही जानने के लिए काशी गया था, लेकिन उन्हें रोक दिया गया। इसे उन्होंने ‘चोर की दाढ़ी में तिनका’ बताते हुए बीजेपी को ‘विनाश का दूसरा नाम’ करार दिया। उनका यह बयान सोशल मीडिया और स्थानीय राजनीति में तेजी से चर्चा में आया। सपा की तरफ़ से यह साफ किया गया है कि उनका उद्देश्य केवल मणिकर्णिका घाट पर चल रहे विकास कार्यों और कथित मंदिर तोड़ने की घटनाओं की जांच करना था।
सीएम योगी का बयान
- वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस विवाद पर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वाराणसी में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्राचीन विरासत की सुरक्षा का काम कर रही है।
- सीएम योगी ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इस विकास कार्य को पसंद नहीं कर रहे हैं और अपने भ्रामक प्रचार से जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।
- योगी ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस द्वारा एआई जनरेटेड वीडियो के जरिए मंदिर तोड़े जाने का झूठा प्रचार किया जा रहा है, जबकि मणिकर्णिका घाट पर मंदिर वैसे ही मौजूद हैं।
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सियासत गरमाई, सपा ने अपनाया आक्रामक रुख
मणिकर्णिका घाट विवाद के बीच सपा लगातार प्रदेश सरकार पर हमलावर रुख अपना रही है। सपा का कहना है कि घाट पर कथित रूप से प्राचीन मंदिरों को तोड़ने की कार्रवाई का मामला गंभीर है और इसे सार्वजनिक जांच की जरूरत है। सियासत के जानकार मानते हैं कि यह मुद्दा केवल धार्मिक या ऐतिहासिक विवाद नहीं है, बल्कि आगामी चुनावों के लिए राजनीतिक मोड़ भी बन सकता है।
लोकप्रिय प्रतिक्रिया और भविष्य की दिशा
स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर इस विवाद को लेकर कई प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोग विकास कार्यों का स्वागत कर रहे हैं, तो कई लोग इसे प्राचीन धार्मिक धरोहर पर हमला मानते हैं। इस बीच, राजनीतिक विश्लेषक बता रहे हैं कि जैसे-जैसे यह मामला मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर चर्चा में रहेगा, सपा और बीजेपी के बीच जुबानी जंग और बढ़ सकती है।
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