एम्स का नया कदम: CAPE सेंटर शुरू, कैंसर मरीजों को मिलेगा मानसिक और वैज्ञानिक सहयोग

भोपाल  एम्स भोपाल ने कैंसर मरीजों और उनके परिजनों के लिए एक बड़ी और संवेदनशील पहल की है। संस्थान में कैंसर जागरूकता एवं रोगी सशक्तिकरण (CAPE) सुविधा केंद्र की शुरुआत की गई है, जिसका मकसद कैंसर से जुड़े डर, भ्रम और गलतफहमियों को तोड़कर मरीजों को सही जानकारी से सशक्त बनाना है।यह CAPE सेंटर कैंसर के तकनीकी इलाज और मरीज की सामान्य समझ के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में काम करेगा। यहां मरीजों को उनकी बीमारी, इलाज के विकल्प, दवाओं के दुष्प्रभाव और जीवनशैली में जरूरी बदलावों की जानकारी सरल और संवेदनशील भाषा में दी जाएगी। डर और

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Published On :

जनवरी 26, 2026

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भोपाल 

एम्स भोपाल ने कैंसर मरीजों और उनके परिजनों के लिए एक बड़ी और संवेदनशील पहल की है। संस्थान में कैंसर जागरूकता एवं रोगी सशक्तिकरण (CAPE) सुविधा केंद्र की शुरुआत की गई है, जिसका मकसद कैंसर से जुड़े डर, भ्रम और गलतफहमियों को तोड़कर मरीजों को सही जानकारी से सशक्त बनाना है।यह CAPE सेंटर कैंसर के तकनीकी इलाज और मरीज की सामान्य समझ के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में काम करेगा। यहां मरीजों को उनकी बीमारी, इलाज के विकल्प, दवाओं के दुष्प्रभाव और जीवनशैली में जरूरी बदलावों की जानकारी सरल और संवेदनशील भाषा में दी जाएगी।

डर और तनाव कम करेगा CAPE सेंटर
कैंसर का नाम सुनते ही मरीज और उनके परिजन मानसिक दबाव में आ जाते हैं। CAPE सेंटर का मुख्य लक्ष्य इसी डर को खत्म करना है। यहां इलाज की पूरी प्रक्रिया विस्तार से समझाई जाएगी, ताकि मरीज बिना घबराए सही और समय पर निर्णय ले सकें। यह पहल राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के उस सिद्धांत को भी मजबूत करती है, जिसमें मरीज को इलाज की प्रक्रिया का केंद्र माना गया है।

समय पर जांच से बचेंगी जानें
केंद्र का एक अहम उद्देश्य लोगों को समय पर जांच और इलाज के लिए प्रेरित करना है। जानकारी के अभाव में होने वाली देरी कैंसर में जानलेवा साबित होती है। CAPE सेंटर इस देरी को कम कर अनावश्यक मौतों को रोकने में मदद करेगा और देश में बढ़ते कैंसर बोझ को घटाने में सहायक बनेगा।

सरल भाषा, वीडियो और दो-तरफा संवाद
इस केंद्र की खासियत इसकी कार्यप्रणाली है। यहां जटिल मेडिकल शब्दों के बजाय आम बोलचाल की भाषा का इस्तेमाल होगा। वीडियो, दृश्य-श्रव्य सामग्री और दो-तरफा बातचीत के जरिए मरीज और उनके परिजन खुलकर सवाल पूछ सकेंगे। इलाज के दौरान ही नहीं, बल्कि इलाज के बाद भी यह केंद्र मरीजों के साथ जुड़ा रहेगा। एम्स भोपाल का CAPE सेंटर यह संदेश देता है कि कैंसर केवल बीमारी नहीं, सही जानकारी और भरोसे से लड़ी जाने वाली चुनौती है। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) माधवानंद कर के निर्देशन में और सेट (सिमुलेशन, ई-लर्निंग एवं टेलीमेडिसिन) समिति के मार्गदर्शन में इस केंद्र को विकसित किया गया है। इसके निर्माण और योजना में वरिष्ठ संचार विशेषज्ञ श्री बीरेंद्र दास की अहम भूमिका रही। वहीं, सेट समिति के प्रो. (डॉ.) रजनीश जोशी (डीन-अकादमिक), डॉ. संजीव कुमार (चेयरमैन, सेट), डॉ. सैकत दास (सदस्य, सेट एवं सदस्य सचिव, ट्यूमर बोर्ड) और डॉ. गुंजन चौकसे (सदस्य सचिव, सेट) ने इस पहल को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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