West Bengal News: पश्चिम बंगाल में जांच एजेंसियों और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। शनिवार को सीआईडी (CID) की एक संयुक्त टीम ने विधानसभा फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच के सिलसिले में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को कानूनी नोटिस थमाया। अधिकारियों की यह टीम सबसे पहले हरीश मुखर्जी रोड स्थित उनके आवास ‘शांतिनिकेतन’ पहुंची थी, लेकिन वहां अभिषेक बनर्जी की अनुपस्थिति के कारण टीम को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा, जिससे कोलकाता में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई।
कालीघाट स्थित आवास पर पहुंची जांच टीम
अभिषेक बनर्जी ने जब अपने कालीघाट रोड स्थित आवास पर मीडिया को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि वह अब शांतिनिकेतन वाले घर में नहीं रहते, तो सीआईडी टीम ने तुरंत अपनी रणनीति बदली। अधिकारियों ने बिना देर किए कालीघाट स्थित उनके आवास का रुख किया। वहां पहुंचकर टीम ने सीधे अभिषेक बनर्जी के आवास के बाहर डेरा डाल दिया। जैसे ही अभिषेक बनर्जी बाहर आए, अधिकारियों ने उन्हें कानूनी नोटिस सौंप दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने शहर में जबरदस्त पुलिसिया और सियासी ड्रामा पैदा कर दिया।
जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर अभिषेक बनर्जी का कटाक्ष
नोटिस लेने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए अभिषेक बनर्जी ने जांच अधिकारियों के ज्ञान पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो अधिकारी इस मामले की जांच कर रहे हैं, उन्हें यह भी नहीं पता कि वह पिछले सात सालों से उस घर में नहीं रह रहे हैं। उन्होंने इसे गलत सूचना का नतीजा बताया। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि वह पहले नोटिस का अध्ययन करेंगे और अपने वकीलों से परामर्श लेने के बाद ही कोई अगला कदम उठाएंगे। उन्होंने दोहराया कि यदि उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया जाता है, तो वह कानून का पालन करने के लिए तैयार हैं।
केंद्र-राज्य एजेंसियों पर भड़के TMC सांसद
इस कानूनी नोटिस के बाद अभिषेक बनर्जी ने केंद्र और राज्य की जांच एजेंसियों पर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी और सीबीआई के बाद अब पुलिस और नगर पालिका जैसी संस्थाओं का भी राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है। टीएमसी सांसद ने एजेंसियों को खुली चुनौती देते हुए कहा, “हम उस मिट्टी के नहीं बने हैं जो डर जाएं। यदि आपमें हिम्मत और क्षमता है, तो मुझे गिरफ्तार करके दिखाएं, मैं कहीं भाग नहीं रहा हूं।”
कानूनी नोटिस के बाद बढ़ सकता है बंगाल में राजनीतिक टकराव
अभिषेक बनर्जी का यह कड़ा रुख स्पष्ट करता है कि आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ेगा। विधानसभा फर्जी हस्ताक्षर मामला फिलहाल बंगाल की राजनीति के केंद्र में है और इस पर होने वाली आगामी जांच पर सबकी नज़रें टिकी हैं। जहाँ टीएमसी इसे राजनीतिक प्रतिशोध का नाम दे रही है, वहीं सीआईडी का दावा है कि यह प्रक्रिया का एक हिस्सा है। इस घटनाक्रम ने बंगाल की सियासत में टकराव के एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी है।










