Abhijeet Deepke Statement: ‘छात्रों को धमकाना बंद करे पुलिस’, NEET आंदोलन के बाद बड़ा संदेश

NEET आंदोलन के बाद अभिजीत दीपके ने छात्रों के समर्थन में बड़ा बयान देते हुए पुलिस से कथित तौर पर छात्रों को धमकाना बंद करने की अपील की है। उनके इस बयान के बाद शिक्षा और छात्र राजनीति को लेकर नई बहस छिड़ गई है। आखिर उन्होंने क्या कहा और इस पर क्या प्रतिक्रियाएं आईं, जानिए पूरी रिपोर्ट।

Abhijeet Deepke Statement

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 29, 2026

Abhijeet Deepke Statement:  नीट पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय तक चले छात्र आंदोलन के बाद CJP (Cockroach Janta Party) के संस्थापक अभिजीत दीपके बुधवार को छत्रपति संभाजीनगर पहुंचे। हवाई अड्डे पर मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने आंदोलन की सफलता पर छात्रों का आभार व्यक्त किया और केंद्र तथा राज्य सरकारों पर कई गंभीर सवाल उठाए। दीपके ने कहा कि यह आंदोलन केवल एक संगठन का नहीं, बल्कि देशभर के लाखों छात्रों के अधिकारों और भविष्य की लड़ाई था। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए।

‘छात्र अपने अधिकार मांग रहे हैं, अपराधी नहीं हैं’

पत्रकारों से बातचीत के दौरान अभिजीत दीपके ने कहा कि छात्र अपने भविष्य और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, इसलिए उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों को डराने, धमकाने या उन पर दबाव बनाने के बजाय सरकार को उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। उनके अनुसार, लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध हर नागरिक का अधिकार है और छात्रों के साथ किसी भी प्रकार का उत्पीड़न उचित नहीं माना जा सकता।

करीब 40 दिन बाद घर लौटने की जताई खुशी

दीपके ने बताया कि वे लगभग 40 दिनों के लंबे संघर्ष के बाद अपने घर लौट रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चला विरोध प्रदर्शन केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे देश में छात्रों की आवाज बन गया। उन्होंने इस आंदोलन की सफलता का श्रेय उन सभी विद्यार्थियों को दिया, जिन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को मजबूती से उठाया। साथ ही उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद अपने माता-पिता और परिवार से मिलने की खुशी उनके लिए बेहद खास है।

आंदोलन की सफलता को छात्रों के संघर्ष का परिणाम बताया

अभिजीत दीपके ने कहा कि इस आंदोलन ने देशभर में परीक्षा प्रणाली को लेकर व्यापक बहस शुरू की। उनके अनुसार, छात्रों के लगातार संघर्ष और जनसमर्थन के कारण सरकार पर दबाव बना। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन के प्रभाव से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। दीपके ने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि लाखों छात्रों की सामूहिक जीत है, जिन्होंने अपने अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाई।

आंदोलन के बाद भी छात्रों पर कार्रवाई का लगाया आरोप

दीपके ने आरोप लगाया कि आंदोलन समाप्त होने के बाद भी कई राज्यों में पुलिस छात्रों के घर पहुंच रही है और उन्हें गिरफ्तार करने या कार्रवाई की चेतावनी दे रही है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हो रहा है तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार की प्रताड़ना या दबाव की नीति को तुरंत समाप्त किया जाए, ताकि छात्र बिना भय के अपनी पढ़ाई और भविष्य पर ध्यान दे सकें।

20 जुलाई संसद मार्च की घटना पर जताई नाराजगी

अभिजीत दीपके ने 20 जुलाई को आयोजित ‘संसद मार्च’ के दौरान छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ हुई घटनाएं बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थीं। उनका कहना था कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कठोर व्यवहार नहीं होना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि भविष्य में ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और संवाद का रास्ता अपनाया जाए।

सरकार को दी आंदोलन तेज होने की चेतावनी

मीडिया से बातचीत के अंत में दीपके ने कहा कि यदि छात्रों को डराने या दबाने की कोशिश जारी रही तो आंदोलन आगे और व्यापक रूप ले सकता है। उन्होंने कहा कि देश का युवा अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की क्षमता रखता है। साथ ही उन्होंने दोहराया कि सरकार को छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और किसी भी प्रकार के विवाद का समाधान बातचीत और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से करना चाहिए।

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